• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड के तमाम गांवों में नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी मूलभत सुविधा से वंचित हैं

25/06/21
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
176
SHARES
220
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला :

देश में आज 5 जी इंटरनेट की टैस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन इस इंटरनेट की दुनिया में कुछ गाँव ऐसे भी है जो नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी मूलभत सुविधा से भी वंचित है। यहाँ नेटवर्क के लिए ग्रामीणों व स्कूली बच्चों ऊँचे स्थानों में जाकर मोबाइल से बात व ऑनलाइन क्लास लेती पड़ती है। पिछले लाकडाउन से बन्द पड़े स्कूलों के कारण ऑनलाइन क्लास के लिए बच्चें आज भी नेटवर्क की राह देख रहे है।

जो आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे है। यहाँ इंटरनेट तो दूर की बात है। एक कॉल लगाने के लिए भी ऊँचे स्थानों में जाकर नेटवर्क ढूढना पड़ता है। ऐसा नहीं है कि यहाँ के ग्रामीणों ने नेटवर्क कम्पनियों से नेटवर्क स्थापित करने की मांग न कि हो। ग्रामीण व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि कई बार शासन, प्रशासन व नेटवर्क कम्पनियों के एजेंटों से यहाँ टावर लगाने की मांग कर चुके है। लेकिन अब तक ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ।

जिस कारण आज भी ग्रामीण नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे है।ग्रामीणों को नेटवर्क की सबसे ज्यादा समस्या पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण हुए लाकडाउन में आई। लेकिन इन आनलाइन क्लासों का फायदा हर किसी क्षेत्र के बच्चें नहीं उठा पाए। क्योंकि वहाँ नेटवर्क उपलब्ध नहीं था। ऐसे में बच्चें पहाड़ो की ऊंची चोटियों में जाकर नेटवर्क ढूढ कर पढ़ते नज़र आए। इस बात को एक वर्ष बीत गया। लेकिन बच्चों व ग्रामीणों की समस्या अबतक हल नहीं हुई।

संचार क्रांति के इस दौर में जब भारत में आज 5जी इंटरनेट की टेस्टिंग पर जोर दिया जा रहा है तो वहीं इंटरनेट की इस दुनिया में कुछ गांव ऐसे भी हैं जो नेटवर्क कनेक्टिविटी जैसी मूलभत सुविधा से वंचित हैं. ग्रामीणों को मोबाइल फोन पर बात करने के लिए के लिए 5 से 7 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. एक तरफ जहां लॉकडाउन के समय देश के बच्चे ऑनलाइन क्लास ज्वाइन कर रहे हैं तो वहीं गंगी गांव के बच्चे इंटरनेट से कोसों दूर हैं. भारत तिब्बत सीमा से सटे सीमांत गांव उत्तराखंड के कई गांव संचार सुविधा से महरूम हैं. जहां के ग्रामीणों और छात्रों को मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जो आज भी मोबाइल नेटवर्क की समस्या से जूझ रहे हैं. आपदा की दृष्टि से भी ये क्षेत्र संवेदनशील है, इसके बावजूद यहां पर नेटवर्क की समस्या बनी है.

ऐसा नहीं है कि यहां के ग्रामीणों ने शासन प्रशासन से नेटवर्क स्थापित करने की मांग ना की हो लेकिन अब तक ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है, वहीं डीएम का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क सेवा के लिए मोबाइल कंपनी के अधिकारियों से वार्ता की जा रही है. नेपाल सीमा से लगे उत्तराखंड के सैकड़ों निवासियों की पूरी जानकारी नेपाल सरकार के पास है। इन इलाकों में कौन सेना में नौकरी करता है और कौन बीएसएफ में यह जानकारी भी नेपाल के पास है। चीन से ताजा तनाव के बाद इस तल्खी के माहौल में यह कहना मुश्किल है कि नेपाल से यह जानकारी किसी और एजेंसी को नहीं मिली होगी। कहा तो यह भी जा रहा है कि सामरिक नजिरये से यह संवेदनशील भी हो सकता है। दरअसल इन इलाकों में नेपाल की सरकारी संचार एजेंसी स्काई इंसेट का ही दबदबा है।

ज्यादातर लोग बेहतर नेटवर्क के कारण नेपाली सिम का ही प्रयोग करते हैं और इसको हासिल करने में उनका आधार कार्ड और पहचान पत्र भी लगता है।चीन के साथ सबंधो में तल्खी के बाद भारत के लिए दूसरी बड़ी समस्या बनते जा रहे नेपाल का संचार नेटवर्क सीमा से लगे उत्तराखंड में भारतीय कंपनियों से बहुत बेहतर है। नेपाल की सरकारी संचार एजेंसी स्काई इंसेट के टावर के सिग्नल इन इलाकों में काफी मजबूत हैं। नेपाली नेटवर्क भारत के 40 किलोमीटर अंदर तक काम करता है। ऐसे में यहां के लोग नेपाली सिम को ही पसंद करते हैं। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो नेपाली सिम पर भारत के मुकाबले ज्यादा सस्ता ऑफर पर मिलता है।

नेपाली सिम रिचार्ज की शुरुआत पांच से छह भारतीय रुपए में होती है और इतना ही नहीं इतने कम रुपए में ही 100 मिनट तक का टॉक-टाइम दिया जा रहा है।वहीं इंटरनेट सेवा के लिए बीस रूपए में कूपन दिये जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में नेपाल सीमा पर पहाड़ों पर बीएसएनएल के टावर लगे हुए है। नेपाल से सीमा सटी होने की वजह से इनकी क्षमता बहुत कम रखी गई है. ऐसे में भारत के गांवों तक बीएसएनएल का सिग्नल पहुंच नहीं पाता है, क्योंकि ये गांव घाटियों के बीच बसे हैं। इतना ही नहीं सरकार ने इस भारतीय संचार कंपनी का नेटवर्क मजबूत करने की कोशिशें भी नहीं की।

ऐसे में स्थिति ये है कि बात करने के लिए और नेटवर्क रेंज में आने के लिए ऊंचे स्थान पर आना पड़ता है। इन दुर्गम इलाकों में भारत की संचार सुविधा लचर है। खासकर उत्तराखंड में नेपाल से लगे सीमावर्ती गांवों में बीएसएनएल के सिग्नल बहुत कमजोर हैं। स्थिति ये है कि भारत का नेटवर्क अक्सर घंटों काम नहीं करता है. ऐसे में सीमावर्ती गांवों के भारतीय लोग अभी भी नेपाली संचार सुविधा पर ही निर्भर हैं।जानकारी के मुताबिक, नेपाल की सरकारी संचार एजेंसी स्काई इंसेट के टावर के सिग्नल इन इलाकों में काफी मजबूत हैं। नेपाली नेटवर्क भारत के 40 किलोमीटर अंदर तक काम करता है। ऐसे में इन क्षेत्र के गांवों के लोग नेपाली सिम का इस्तेमाल करते हैं। इन इलाकों में नेपाली सिम की अवैध रूप से खरीद-फरोख्त भी होती है। कहा जा रहा है कि नेपाल की तीन संचार कंपनियों के सिम भारत में अवैध रूप से मिलते हैं।\

नेपाल में संचार कंपनियों को सिम का टारगेट दिया जाता है और सीमावर्ती क्षेत्रों में मांग होने के कारण इन्हें आसानी से यहां ग्राहक मिल जाते हैं।ये नागरिकों से पहचान पत्र और पूरी जानकारी फार्म में भरकर ले लेते हैं। ये स्थिति कोई आज की नहीं है। ऐसा सालों से चला आ रहा है पर चीन से ताजा विवाद के बाद नेपाल जिस तरह भारत विरोधी नजरिया दिखा रहा है उससे मामला संवेदनशील हो जाता है। कहा तो यह भी जा रहा है कि यहां तक कि सीमा पर सक्रिय भारत विरोधी तत्व भी नेपाली मोबाइल कंपनियों का ही प्रयोग करते हैं। इससे उनकी गतिविधियों की जानकारी प्रशासन व सुरक्षा एजेंसियों को नहीं मिल पाती है।

सेना की मध्य कमान के जनरल आफिसर इन कमांड (जीओसी) लेफ्टिनेंट जनरल ने सीमांत क्षेत्रों में स्थानीय अभिसूचना तंत्र को मजबूत करने की पैरवी की। पर्वतीय जनजीवन की खुशहाली के लिए कुछ भी ठोस दिशा नीति तय नहीं की गई. चूंकि उत्तराखंड उत्तर प्रदेश के पर्वतीय हिस्सों को अलग करके एक पर्वतीय राज्य बनाया गया लेकिन व्यावहारिक तौर पर पर्वतीय प्रदेश की जीवन पद्धति के हिसाब से विकास का आधारभूत ढांचा बनाने के बारे में सिर्फ जुबानी जमा खर्च होता रहा.असल में अतीत से ही इस संवेदनशील पर्वतीय अंचल की समस्याएं बाकी उत्तर प्रदेश से एकदम जुदा थीं.

लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि राज्य बनने के बाद यहां बदला कुछ भी ज्यादा नहीं. देहरादून में राजधानी उत्तर प्रदेश की राजधानी के एक्सटेंशन कांउटर की तरह काम कर रही है. पर्वतीय लोगों की पहचान को संरक्षित करने, रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य और विकास का मॉडल यहां के भौगोलिक परिवेश की तर्ज पर ढालना ही पर्वतीय राज्य के आंदोलन और राज्य बनाने के मकसद की मूल अवधारणा थी. लेकिन सालों में इस राज्य की सरकारों ने इन लक्ष्यों को पाने के लिए कैसे काम किया, पलायन आयोग की रिपोर्ट उसी नाकामी का दस्तावेज है. 

Share70SendTweet44
Previous Post

1 जुलाई से जनपद वासीयो के लिए केदारनाथ यात्रा के दृष्टिगत पुलिस उपाधीक्षक ने लिया जायजा

Next Post

संभावित तीसरी लहर की तैयारियों की समीक्षा करते सीएम तीरथ रावत

Related Posts

उत्तराखंड

अनुच्छेद 370 हटने के सात साल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा

August 5, 2026
6
उत्तराखंड

उत्तराखंड के ग्रीष्मकालीन राजधानी के विद्यालय का बुरा हाल

August 5, 2026
7
उत्तराखंड

राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण के सदस्य श्री प्रमोद नारायण ने किया लखवाड़ एवं व्यासी परियोजनाओं का निरीक्षण

August 5, 2026
32
उत्तराखंड

डोईवाला महाविद्यालय में ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

August 5, 2026
90
उत्तराखंड

एसडीआरएफ ने शंकराचार्य चौक पर लगाया निःशुल्क चिकित्सा शिविर

August 5, 2026
10
उत्तराखंड

नंदा देवी राजजात को लेकर 7 अगस्त की बैठक की तैयारियां तेज

August 5, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67718 shares
    Share 27087 Tweet 16930
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38072 shares
    Share 15229 Tweet 9518
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

अनुच्छेद 370 हटने के सात साल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा

August 5, 2026

उत्तराखंड के ग्रीष्मकालीन राजधानी के विद्यालय का बुरा हाल

August 5, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.