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वित्तीय अनियमितता के संदेह पर मांगा था स्पष्टीकरण, तब से मचा है बेवजह हंगामा: डीएफओ पंकज कुमार

27/11/18
in अल्मोड़ा, उत्तराखंड
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वन विभाग में चल रहे हंगामे का अंत नहीं, डीएफओ ने बुलाई प्रेस वार्ता
अल्मोड़ा। यहां वन विभाग के कर्मचारियों व डीएफओ पंकज कुमार के बीच उत्पन्न विवाद के बीच आज डीएफओ ने बकायदा प्रेस वार्ता बुलाकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि 16 नवंबर को वह जांचकृपड़ताल को रेंज कार्यालय में गये थे। जहां अभिलेखों की जांच के दौरान कोसी परियोजना के क्रय में कुछ वित्तीय अनियमितता होने का उन्हें संदेह हुआ, जिस पर उन्होंने रेंज अधिकारी से जवाब मांगा। तब से ही उनके खिलाफ यह पूरा हंगामा शुरू हो गया।

डीएफओ ने कहा कि उन पर लगाये गये तमाम आरोप तथ्यहीन और पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने सीधा सवाल किया कि क्या कमियां पाये जाने पर किसी अधिकारी या कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगना उत्पीड़न है ? यदि ऐसा है तो यह उनका विशेषाधिकार है, जिसे कोई चुनौती नहीं दे सकता। वह राजकीय कार्यों को द्रुत गति से संपादित करा रहे हैं। इस पर उन पर उत्पीड़न का आरोप कैसे लग सकता है ? उन्होंने समूचे घटनाक्रम की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि वह 15 अक्टूबर को छुट्टी पर चले गये थे। चूंकि उनके माताकृपिता की तबियत खराब है। वापस 10 नवंबर को आये। 12 नवंबर को दफ्तर पहुंचे। 13 को अवकाश था अतएव 14 नवंबर को कोसी से संबंधित बैठक ली। 16 नवंबर को अल्मोड़ा रेंज के इंस्पेक्शन पर चले गये। इसी बीच 16 नवंबर को ही सारा हंगामा शुरू हो गया। उन्होंने कार्यालय में विगत कई दिनों से चल रहे गतिरोध पर जवाब देते हुए कहा कि कर्मचारियों से उन्होंने कई बार वार्ता का प्रयास किया, लेकिन दोकृचार लोगों के बहकावे में वार्ता को टाल दिया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें यह महसूस हो रहा है कि कुछ कर्मचारियों को उच्चाधिकारियों का भी संरक्षण प्राप्त है, जिस कारण यह सब हरकतें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि उन पर जितने भी आरोप लगाये गये हैं उनको लेकर वह चुनौती देते हैं कि उनमें से एक को भी प्रमाणित करके दिखलायें। रिश्तेदारों को नौकरी पर रखने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी यहां रिश्तेदारी के नाम पर सिर्फ उनकी पत्नी है। जिसको कोई वेतन नहीं मिल रहा है। यहां शहर में तो उनका कोई दूरकृदराज तक का रिश्तेदार नहीं रहता है। उन्होंने कहा कि 16 नवंबर को उन्होंने अल्मोड़ा रेंज का इंस्पेक्शन किया था। उन्होंने देखा कि कोसी पुर्नजनन योजना के तहत जो कैंपा प्रोजेक्ट से 2 करोड़ का बजट आया है उसके क्रय आदि में उन्हें कुछ संदेह हुआ। जिस पर उन्होंने रेंज अधिकारी संचिता वर्मा से स्पष्टीकरण मांगा। जिसका जवाब उन्हें आज तक नहीं मिल पाया है। इसी बीच सारा विवाद शुरू हो गया और कर्मचारियों ने बिना बताये आपतकालीन बैठक बुला ली।

हमारी 24 घंटे की ड्यूटी होती है
अल्मोड़ा। पूरी प्रेस वार्ता में डीएफओ खुद पर लगे आरोपों पर अपना स्पष्टीकरण देते दिखाई दिये। उन्होंने कहा कि उन पर आरोप है कि वह कर्मचारियों से निर्धारित से अधिक काम ले रहा हूं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन विभाग की ड्यूटी 24 घंटे की होती है। मजाकिया लहजे में कहा कि क्या कभी कोई गुलदार इंसान पर हमला कर देता है तो यह देखता है कि 5 बजे का आॅफिस टाइम ओवर हो गया है। यदि वह ऐसी किसी घटना की जांच पर अपने चालक के साथ गये हैं तो क्या वाहन चालक को घर वापस भेज सकते हैं ? दूसरे सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि वह कनिष्ठ सहायक से कोर्ट का काम ले रहे हैं तो इसमें क्या गलत है। वह एक अधिकारी हैं और उन्हें अपने स्टॉफ से सरकारी काम तो लेना ही होगा।

सूना पड़ा रहा कार्यालय, चायकृपानी पिलाने वाला तक नहीं, डीएफओ को लाने के लिए वाहन तक नहीं मिला
अल्मोड़ा। आज वन विभाग के कार्यालय का नजारा आज इस तरह था कि वहां एक भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। यहां तक कि डीएफओ को घर से लाने के लिए चालक भी उपलब्ध नहीं हो पाया। जिस कारण डीएफओ अपने व्यक्तिगत साधन से कार्यालय तक पहुंचे। हालत यह थी कि मीडिया कर्मियों को पानी पिलाने तक के लिए कोई उपलब्ध नहीं था। जिस पर डीएफओ ने सीधे शब्दों में कहा कि मुख्य प्रशासनिक अधिकारी महेंद्र वर्मा ने उनके चालक कुंदन को भी डरायाकृधमकाया है। जिस कारण वह भी ड्यूटी नहीं दे रहा है।

कंजरवेटर कार्यालय में बैठे हैं सारे अधिकारी, अपना कार्यालय वीरान
अल्मोड़ा। आज हालत यह है कि सारे कर्मचारी इस बीच धार की तूनी स्थित कंजरवेटर कार्यालय में बैठकर अपने कार्यों का संपादन कर रहे हैं और माल रोड स्थित कार्यालय वीरान पड़ा है। कर्मचारी नेता कह रहे हैं कि वह डीएफओ पंकज कुमार के तबादलने की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं। कोई कर्मचारी कार्य बहिष्कार या हड़ताल में नहीं है, बल्कि अपने उच्च अधिकारी के संरक्षण में काम कर रहे हैं।

Tags: almora-forest-officer
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