• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

भगवान राम से जुड़ा है अल्मोड़ा का ऐतिहासिक रामशिला मंदिर

07/04/25
in अल्मोड़ा, उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
83
SHARES
104
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
रामनवमी को लेकर प्रभु रामचंद्र की नगरी अयोध्या राममय हो चुकी है. सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में आपको कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर और कई प्राचीन धरोहर देखने को मिलेगी, जिनका अपना ऐतिहासिक प्रमाण रहा है. जहां भगवान राम के शिला रूपी चरण देखने को मिलते हैं. उत्तराखंड अल्मोड़ा के मल्ला महल में रामशिला मंदिर स्थापित है. बताया जाता है कि ये मंदिर करीब 400 साल से भी ज्यादा पुराना है. इस मंदिर में रामनवमी के दिन काफी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटना शुरू हो जाती है. अल्मोड़ा के मल्ला महल में राजा रुद्रचंद ने 1588 में राम शिला मंदिर की स्थापना की थी. राजा ने राजमहल के पास ही भगवान राम के चरणों को स्थापित किया. ताकि वह भगवान राम के चरणों की श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर सकें.पुजारी ने बताया कि यह मंदिर चंद वंश राजाओं के द्वारा बसाया गया था. यहां सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है. काफी संख्या में लोग पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं. भगवान राम की शिला रूपी चरण पादुकाओं को श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं. अल्मोड़ा नगर स्थित रामशिला मंदिर (वर्तमान में जिलाधीश कार्यालय प्रांगण में स्थित) के भौगोलिक विस्तार, महत्व एवं संबंधित कथा का वर्णन प्राप्त होता है जिसके अनुसार कौशिकी (कोसी) तथा शालि (सुयाल) नदियों के मध्य स्थित क्षेत्र ‘विष्णुक्षेत्र कहलाता है जो रामक्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध है. जहाँ श्रीराम के चरणों से चिन्हित रामशिला विद्यमान है जिस पर बैठकर भगवान राम ने देवों, ऋषियों, सनकादि सप्तऋषियों तथा पितरों का तर्पण किया था.यहीं से श्रीराम के चरण युगल से रम्भानदी का उद्गम हुआ था जो संभवत: रम्भानौला रहा हो. यह रम्भानदी उत्तर की ओर बहती हुई कोसी नदी में मिलती थी. इस स्थान पर तिरात्ति प्रवास का महत्व भी इस अध्याय में बताया गया है. यहाँ मोक्षदायनी रामशिला अभी भी जाग्रत है. पर मानसखण्ड में अल्मोड़ा के समीपस्थ अनेक क्षेत्रों जैसे कसारदेवी, कटारमल, बिन्सर, सिमतोला आदि का वर्णन प्राप्त होता है.इस ग्रंथ के ‘कौशिकी महात्म्य’ नामक 37 वें अध्याय में स्वयंभूपर्वत एवं यहाँ स्थित स्वयम्भूनाथ के पूजन का महत्व बताया गया है. इस स्थान का तादात्म्य वर्तमान सिमतोला से किया गया है. इसके बाईं ओर स्थित ‘काषाय पर्वत’ (स्थानीय नाम कलमटिया) है. उक्त पर्वतों में प्रवास के उपरान्त कोसी में स्नान करके साहित्य के पूजन का महत्व बताया गया है. यह बड़ादित्य अल्मोड़ा नगर के समीप स्थित कोसी में कटारमल का सूर्यमंदिर है. मानसखण्ड के ‘बड़ादित्य महात्म्य’ नामक 38वें अध्याय साहित्य पूजन के महात्य का विस्तृत वर्णन किया गया है. ‘कौशिकी महात्म्य’ नामक 39वें अध्याय में राम के चरणों से उद्गमित रम्भा नदी के कौशिकी में मिलने का वर्णन है. श्याम पर्वत अर्थात स्याहीदेवी स्थित ‘शक्ति’ की उपासना का महत्व भी बताया गया है. अतीत की तरफ मुड़कर देखें तो अल्मोड़ा शहर अपने आप में एक इतिहास है और इसके साथ जुड़ी अतीत की इमारतें इसकी धरोहर। पत्थर और लकडिय़ों की बनी इमारतों में कई वर्षों का गुजरा कल बसता है। मल्ला महल भी एक ऐसी इमारत है। जिसने एक दौर में राजाओं की सल्तनत देखी। हुक्म देते हुए देखा और दरबार सजते भी हुए देखे। वर्तमान में इस महल में अल्मोड़ा का कलक्ट्रेट संचालित होता है। लेकिन यह महल अपनी पुरानी दास्तां को खुद बयां करे। इसके लिए अब इसे हैरिटेज के रूप में विकसित किया जा रहा है।बात मल्ला महल की करें तो वक्त ने ज्यों ज्यों करवट बदली तो इसके साथ किस्से भी हजारों जुड़ते चले गए। 1915 में पहले जिलाधिकारी के तौर पर ई डब्ल्यू गार्डनर ने यहां कलक्टर की कुर्सी संभाली थी। मगर बात इससे पहले की करें तो राजशाही सल्तनत मल्ला महल ने देखी है। अल्मोड़ा के इतिहास पर नजर डालें तो यह कस्बा स्थापना से पूर्व कत्यूरी राजा बैचलदेव के अधीन था। कत्यूरी शासन के दौरान इस शहर को राजपुर नाम से जाना जाता था।17 वीं शताब्दी में चंद राजाओं ने अल्मोड़ा पर अपना कब्जा जमा लिया और तत्कालीन राजा रूद्र चंद ने अल्मोड़ा के मध्य में मल्ला महल का निर्माण कराया। वर्ष 1731 में नेपाल के गोरखाओं ने काली नदी के पश्चिम से अपने राच्य का विस्तार किया और अल्मोड़ा पर आक्रमण कर उसे अपने अधीन कर लिया। बाद में अंग्रेजों ने भारत पर आक्रमण किया और गोरखाओं को परास्त कर अल्मोड़ा को अपने अधीन कर लिया। इस तरह अल्मोड़ा के मल्ला महल ने अतीत से लेकर अब तक अनेक उतार चढ़ाव देखे। यह महल आज भी पुरानी यादों को सहेजे हुए है और इस शहर की यह सबसे प्राचीन धरोहरों में एक भी है। अल्मोड़ा की बसासत के इतिहास की बात करें तो यह चंद और कत्यूरी राजाओं से जुड़ा हुआ है। कत्यूरी शासकों का यहां वर्ष 1560 तक प्रवास रहा। मगर इस शहर ने असल आकार 1563 में चंद राजाओं के शासन से लेना शुरू किया। यह शहर चंद राजाओं की राजधानी भी बना। द वंशीय राजा रूद्र चंद्र द्वारा 1588 में अष्ट पहल दुर्ग में रामशिला मंदिर का निर्माण कराया था। यह उत्तर मध्यकालीन वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस मंदिर के केंद्रीय कक्ष में विस्तृत प्रस्तर पर युगल चरण चिन्ह अंकित हैं। जिन्हें भगवान राम चंद्र के चरणों की मान्यता है। इसके पश्चिमी कक्ष में राजा बाज बहादुर चंद द्वारा 1671 में गढ़वाल के जूनियागढ़ किले से विजय के उपरांत लाई गई मां नंदा देवी की मूर्ति स्थापित की गई। वर्ष 1815 से 35 के मध्य ब्रिटिश कमिश्नर जी डब्ल्यू ट्रेल ने नंदा देवी और काल भैरव के विग्रहों को दुर्ग से बाहर मल्ला महल में स्थानांतरित किया।वर्तमान में मल्ला महल में कलक्ट्रेट का संचालन किया जा रहा है। लेकिन मल्ला के इतिहास को देखते हुए इसे हैरिटेज के रूप में विकसित करने का कार्य शुरू हो गया है। कलक्ट्रेट को विकास भवन के पास बन रहे नए भवन में स्थानांतरित किया जाएगा। मल्ला महल के मूल रूप को संरक्षित करते हुए यहां उन सभी शासकों से जुड़ी यादों से जोड़ा जाएगा। उनके द्वारा प्रयोग में लाई गई सामग्री का संकलन कर उसे यहां विरासत के रूप में सहेजा जाएगा। रानी महल में फोटो गैलरी के अलावा ओपन एअर थिएटर, सोलह संस्कार, नंदादेवी स्टोरी व अर्बन कल्चर से जुड़ी सामग्री भी यहां सैलानियों को आकर्षित करने का प्रयास करेगी। कुल मिलाकर अब इस मल्ला महल में यहां से सल्तनत कर चुके प्रत्येक राजाओं और उनके वंशजों से जुड़ी जानकारी सैलानियों को इस महल में आकर मिल सकेगी। रामनवमी को लेकर प्रभु रामचंद्र की नगरी अयोध्या राममय हो चुकी है। सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में आपको कई ऐसे ऐतिहासिक मंदिर और कई प्राचीन धरोहर देखने को मिलेगी, जिनका अपना ऐतिहासिक प्रमाण रहा है।  जहां ईश्वर राम के शिला रूपी चरण देखने को मिलते हैं। उत्तराखंड अल्मोड़ा के मल्ला महल में रामशिला मंदिर स्थापित है। कहा जाता है कि ये मंदिर करीब 400 वर्ष से भी अधिक पुराना है। उन्होंने यहां पर पूजा अर्चना की। श्रद्धालु लीला बोरा ने कहा कि सभी राम जन्मभूमि अयोध्या नहीं जा सकते, लेकिन अल्मोड़ा के रामशिला मंदिर आकर ईश्वर रामचंद्र की चरण पादुका के दर्शन कर रहे हैं। वह इस मंदिर में लोगों की आस्था आज भी बरकरार है . *लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

Share33SendTweet21
Previous Post

प्रधानमंत्री की नीतियों से तीस करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले – मुख्यमंत्री

Next Post

कोटद्वार प्रेस क्लब द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘मालिनी प्रवाह’ का हुआ विमोचन

Related Posts

उत्तराखंड

राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय विज्ञान क्विज प्रतियोगिता का आयोजन

January 16, 2026
29
उत्तराखंड

किसान आत्महत्या मामले में कांग्रेस का पुलिस मुख्यालय कूच, डोईवाला से बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल

January 16, 2026
13
उत्तराखंड

डोईवाला: केंद्र सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन

January 16, 2026
17
उत्तराखंड

नुक्कड़ सभा में अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग

January 16, 2026
11
उत्तराखंड

पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट को सम्मानित किया गया

January 16, 2026
11
उत्तराखंड

वीबी जी राम जी योजना से गांवों में रोजगार की मजबूत नींव रख रही है भाजपा: दीप्ति रावत

January 16, 2026
18

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67583 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय विज्ञान क्विज प्रतियोगिता का आयोजन

January 16, 2026

किसान आत्महत्या मामले में कांग्रेस का पुलिस मुख्यालय कूच, डोईवाला से बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल

January 16, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.