हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
देवाल /थराली।
विकासखंड देवाल के अंतर्गत ओडर ग्राम पंचायत के अनुसूचितजाति बाहुल्य गांव एरेठा में सड़क सुविधा के अभाव ने एक बार फिर से ग्रामीणों की प्रसव पीड़ा को डोली के सहारे अस्पताल तक पहुंचाना पड़ा।सुखद बात है कि देवाल चिकित्सा में युवती ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, किंतु ऐरठा गांव में कब तक सड़क पहुंचेगी आज भी याह यक्ष प्रश्न बना हुआ हैं। क्यूंकि ऐरठा तक सड़क पहुंचाने के लिए भूमि विवाद एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं।
रविवार की सुबह प्रसव पीड़ा से जूझ रही 34 वर्षीय गम्मोती देवी पत्नी प्रकाश राम को कई ग्रामीणों ने डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल चल कर प्रसव पीडिता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचाया। जहां पर दोपहर के महिला ने एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया। चिकित्सकों के अनुसार जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। ओडर की प्रधान प्रेमा देवी ने बताया कि एरेठा जोकि अनुसूचित जाति तोक है, जहां 60 से अधिक परिवारों हैं ,जिन की आवादी क़रीब 250 हैं। यहां से सड़क की दूरी करीब 5 से 6 किमी तक है। बताया कि सरकार के द्वारा इस तोक सहित ओडर गांव को सड़क से जोड़ने के लिए देवाल से पदमला-कंजेरू-एरेठा-ओडर तक करीब 8 किमी मोटर मार्ग को के निर्माण की 15 दिसंबर 2021 को स्वीकृति मिली थी, लेकिन आज तक सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। भाजपा के ओडर बूथ प्रभारी राजेंद्र टम्टा ने बताया कि पदमला क्षेत्र में कुछ स्थानों पर भूमि विवाद और खेतों से सड़क गुजरने को लेकर आपत्तियां उठने के कारण निर्माण कार्य अटका हुआ हैं। बताया सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत करीब एक वर्ष पूर्व दोबारा सर्वेक्षण भी किया गया, लेकिन सर्वे के बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय समन्वय की कमी के चलते सड़क निर्माण अधर में लटका हुआ है। लोक निर्माण विभाग का कहना है कि अब इस सड़क का कार्य पीएमजीएसवाई के माध्यम से किया जाना है,जबकि पीएमजीएसवाई अधिकारियों का कहना है कि वन भूमि संबंधी स्वीकृतियां और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही सड़क कटिंग का कार्य शुरू किया जा सकता है।
रविवार को सामने आई यह घटना एक बार फिर पहाड़ के दूरस्थ गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। ऐरठा के ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने के कारण बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को आज भी जान जोखिम में डालकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से ग्रामीण की पीड़ा को देखते हुए शीघ्र सड़क निर्माण शुरू कराने की मांग की है ।











