
पिथौरागढ़, 13 जुलाई 2026।
उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के उपलक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण एवं हरित हिमालय के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए 130 इन्फैंट्री बटालियन (प्रादेशिक सेना) इकोलॉजिकल कुमाऊँ की पंचाचूली कंपनी द्वारा वड्डा के समीप सुवाकोट में सोमवार को एक विशाल विशेष वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। अभियान के दौरान 10,000 पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
कार्यक्रम में बटालियन के अधिकारियों एवं सैनिकों के साथ पूर्व सैनिकों (Ex-Servicemen), स्थानीय ग्रामीणों, कैलाश आश्रम विद्यालय, शिशु विद्या मंदिर, वड्डा तथा विश्व भारती पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की सहभागिता ने इस अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
अभियान के अंतर्गत आम, अनार, अमरूद, लीची, नींबू, बाँज, मणिपुरी बाँज, चिनार, देवदार, सुरई एवं कचनार सहित फलदार एवं स्थानीय जलवायु के अनुकूल विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। इन प्रजातियों का चयन हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा देने, भू-क्षरण को रोकने तथा दीर्घकालिक पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया है।
बटालियन द्वारा हरेला सप्ताह के अंतर्गत संचालित विशेष वृक्षारोपण अभियान के तहत अब तक 50,000 पौधों का रोपण किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि यह अभियान वर्ष 2026–27 के लिए निर्धारित 8 लाख पौधों के वार्षिक लक्ष्य के अतिरिक्त स्वैच्छिक रूप से चलाया जा रहा है, जो बटालियन की पर्यावरण संरक्षण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक है।
इस अवसर पर बटालियन के अधिकारियों ने कहा कि “हरेला केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था, उत्तरदायित्व और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य सुनिश्चित करने का सामूहिक संकल्प है।” उन्होंने सभी सहभागी संस्थाओं, विद्यालयों, पूर्व सैनिकों एवं स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए अधिकाधिक वृक्षारोपण एवं पौधों के संरक्षण का आह्वान किया।
बटालियन का यह अभियान 16 जुलाई 2026 को हरेला पर्व के अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य समापन कार्यक्रम के साथ पूर्ण होगा। इस अवसर तक 70,000 पौधों के रोपण का लक्ष्य प्राप्त करने का संकल्प लिया गया है। यह पहल कुमाऊँ हिमालय की पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करने, हरित आवरण बढ़ाने तथा जनसहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।











