डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने हवाई सेवाओं की सुरक्षा पर चिंता खड़ी कर दी है। यह हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन कंपनी का था जबकि कुछ दिन पहले टिहरी जिले में इसी कंपनी के हेलीकॉप्टर की आपातकालीन लैंडिंग हुई थी। अब यात्रा के समापन से पहले हुई यह दुर्घटना बेहद दुखद है।पिछले वर्ष केदारनाथ मंदिर के पास और सेरसी हेलीपैड के निकट सड़क पर हेलीकॉप्टर की क्रैश लैंडिंग हुई थी। वहीं कुछ दिन पहले ट्रांस भारत एविएशन कंपनी के ही हेलीकॉप्टर की टिहरी जिले के चंबा के पास आपातकालीन लैंडिंग कराई गई थी। जानकारी के अनुसार हादसे के समय हेलीकॉप्टर में पायलट समेत छह लोग सवार थे। ज्योतिर्मठ के पास हेलीकॉप्टर हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे की वजह खराब मौसम व तकनीकी खराबी माना जा रहा है। खराब मौसम में हेलीकॉप्टरों के उड़ान भरने को लेकर प्रदेश सरकार की ओर से सख्त एसओपी बनाई गई है उसके बावजूद यह हेलीकॉप्टर कैसे उड़ान भरते रहे यह सवाल बना हुआ है।
चमोली जिले में बृहस्पतिवार से मौसम खराब था। शुक्रवार सुबह से बारिश का सिलसिला जारी था। चोटियों से लेकर घाटियों तक कोहरा छाया हुआ था लेकिन हेलीकॉप्टर धड़ल्ले से उड़ान भर रहे थे। सख्त नियमों के बावजूद हेली कंपनी की मनमानी छह लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ गई। जून 2025 में केदारघाटी में बड़ा हेलीकॉप्टर हादसा हो गया था। उस समय भी हादसे का कारण खराब मौसम बताया गया था। उसके बाद सरकार ने हेली सेवाओं की सुरक्षा और तकनीकी जांच के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने और समीक्षा समिति गठित करने के निर्देश दिए थे। सरकार के स्तर से एसओपी बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने भी इसको लेकर सख्त निर्देश दिए थे। इसके तहत खराब मौसम, क्षमता से अधिक भार और उड़न मार्गों पर कड़ी निगरानी रखने के लिए एसओपी लागू की गई है। मगर इस एसओपी का ठीक से अनुपालन नहीं हो रहा है। शुक्रवार को खराब मौसम के बावजूद आखिर कैसे हेलीकॉप्टर एक के बाद एक उड़ान भरते रहे यह सवाल बना हुआ है। हालांकि हादसे की स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है। जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम पहले से ज्यादा अनिश्चित हो गया है. इसलिए फ्लाइट क्रू को हमेशा सतर्क रहना है. सर्कुलर में साफ कहा गया है कि उड़ान का समय-सारिणी से ज्यादा जरूरी सुरक्षित उड़ान है. पायलटों को खराब मौसम में फ्लाइट को डायवर्ट करने, रास्ता बदलने या वापस लौटाने की आजादी दी गई है. कप्तानों को मौसम के हिसाब से तुरंत फैसला लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जोशीमठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे में मारे गए सभी छह लोगों के शव देर रात सेना ने अपने कब्जे में ले लिए थे। हालांकि, अंधेरा होने और घटनास्थल तक पहुंचने का रास्ता दुर्गम होने के कारण शवों को रात में सड़क तक नहीं लाया जा सका। इसके चलते रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर दुर्घटना की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और डीजीसीए की टीम करेगी। शनिवार को विशेषज्ञों की टीम उत्तराखंड पहुंचेगी। जांच के बाद ही हादसे के कारणों का सही पता लग पाएगा। इस साल चारधाम यात्रा के अंतिम चरण में पहला हेलिकॉप्टर हादसा है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.














