• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

सरदार पटेल की आखिरी दौरा साक्षी, आज पन्नों में जिंदा हैं यादें

31/10/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
3
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
दरअसल, सरदार वल्लभभाई पटेल का नाम भारतीय इतिहास में एक ऐसे नेता के तौर पर दर्ज है, जिन्होंने देश को एकजुट रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 15 दिसंबर 1950 को उनके निधन से पहले ही भारत के राजनीतिक एकीकरण की मजबूत नींव रखी थी. 15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, उस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक सैकड़ों देसी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना था. ऐसे मुश्किल दौर में सरदार पटेल ने तत्कालीन गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में अहम जिम्मेदारी निभाई.उन्होंने वी.पी. मेनन के साथ मिलकर बातचीत, कूटनीति और जरूरत पड़ने पर कठोर फैसलों के जरिए रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया.जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतों का भारत में विलय इस ऐतिहासिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण अध्याय रहे.सरदार पटेल को लौह पुरुष यूं ही नहीं कहा जाता, उनके मजबूत फैसलों, दृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें भारतीय इतिहास में एक अलग पहचान दिलाई. आजादी की लड़ाई के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.साल 1928 में गुजरात के बारडोली सत्याग्रह का सफल नेतृत्व करने के बाद उन्हें ‘सरदार’ के नाम से व्यापक पहचान मिली. महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले स्वतंत्रता आंदोलन में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी रही.आजादी के बाद देश के सामने सिर्फ राजनीतिक एकीकरण ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की भी चुनौती थी. सरदार पटेल ने अखिल भारतीय सेवाओं के महत्व पर जोर दिया और एक मजबूत प्रशासनिक ढांचे के निर्माण में योगदान दिया. सरदार पटेल की जयंती को साल 2014 से राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य देशवासियों को एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकजुटता का संदेश देना है. भारत अलग-अलग धर्मों, भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं वाला देश है. ऐसे में राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि विविधता के बावजूद देश की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है.सरदार पटेल का जीवन यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए आपसी सहयोग और एकजुटता से बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है. राजधानी दिल्ली में सरदार पटेल की जयंती पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि देश के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करने का अवसर भी रहा. जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. कैमल्स बैक रोड स्थित कमला कैसल एस्टेट कभी देश के दो बड़े नेताओं की मेजबानी कर चुका है. मई 1948 में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल यहां ठहरे थे. इसके करीब छह साल बाद मई 1954 में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी इसी भवन में प्रवास किया था. आज वह ऐतिहासिक इमारत अस्तित्व में नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी यादें, पत्र और तस्वीरें एक परिवार के पास सुरक्षित हैं.आज 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के मौके पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने अपने परिवार से जुड़ी इन यादों को साझा किया है. उनके पिता दिवंगत आरजीआर भारद्वाज अपने समय के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे. उनका निवास कृष्णा निवास एस्टेट कमला कैसल के ठीक नीचे कैमल्स बैक रोड पर था. गोपाल भारद्वाज के मुताबिक, सरदार पटेल का मई 1948 का मसूरी दौरा निजी था और यह उनकी मसूरी की अंतिम यात्रा भी थी. कमला कैसल में सरदार पटेल और पंडित नेहरू ठहरे थे, वह पुराना भवन अब नहीं रहा. उसे ध्वस्त कर वहां आलीशान होटल बनाया जा रहा है. इस बात का उन्हें गहरा दुख है. उनके अनुसार, उस भवन से उनकी कई व्यक्तिगत यादें जुड़ी थीं. उन्होंने इमारत को गिराए जाने से पहले उसकी कुछ तस्वीरें भी ले ली थीं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए उसकी यादें सुरक्षित रह सकें. यह घटना मसूरी की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की जरूरत पर भी सवाल उठाती है. शहर की पहचान केवल पर्यटन स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता से नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक स्थलों से भी बनती है, जिनका संबंध देश के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से रहा है. कमला कैसल भले ही आज पुराने स्वरूप में मौजूद नहीं है, लेकिन उससे जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि मसूरी का इतिहास राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं और व्यक्तित्वों से भी जुड़ा हुआ है. मार्च 1948 में दिल्ली में सरदार पटेल को दिल का दौरा पड़ा था. चिकित्सकों ने उन्हें पहाड़ी क्षेत्र में आराम करने की सलाह दी थी. इसके बाद मई 1948 में वह स्वास्थ्य लाभ के लिए मसूरी पहुंचे. उनके साथ उनकी पुत्री मणिबेन पटेल भी थीं, जो उनकी देखभाल कर रही थीं.मसूरी प्रवास के दौरान सरदार पटेल, आरजीआर भारद्वाज से मिलने कृष्णा निवास पहुंचे. गोपाल बताते हैं कि सरदार पटेल अपनी पुत्री मणिबेन के विवाह को लेकर चिंतित थे. सरदार पटेल ने पिता को मणिबेन की कुंडली दिखाई और विवाह के संबंध में सलाह ली. उनके पिता ने कुंडली देखने के बाद विवाह योग नहीं होने की बात कही. सरदार पटेल के आग्रह पर विशेष पूजा-अनुष्ठान भी कराए गए. मणिबेन ने आगे चलकर विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन पिता की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण में लगा दिया. गोपाल भारद्वाज का कहना है कि जिस कमला कैसल में सरदार पटेल और पंडित नेहरू ठहरे थे, वह पुराना भवन अब नहीं रहा. उसे ध्वस्त कर वहां आलीशान होटल बनाया जा रहा है. इस बात का उन्हें गहरा दुख है. उनके अनुसार, उस भवन से उनकी कई व्यक्तिगत यादें जुड़ी थीं. उन्होंने इमारत को गिराए जाने से पहले उसकी कुछ तस्वीरें भी ले ली थीं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए उसकी यादें सुरक्षित रह सकें. यह घटना मसूरी की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने की जरूरत पर भी सवाल उठाती है. शहर की पहचान केवल पर्यटन स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता से नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक स्थलों से भी बनती है, जिनका संबंध देश के महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों से रहा है. कमला कैसल भले ही आज पुराने स्वरूप में मौजूद नहीं है, लेकिन उससे जुड़े दस्तावेज और तस्वीरें इस बात का प्रमाण हैं कि मसूरी का इतिहास राष्ट्रीय महत्व की घटनाओं और व्यक्तित्वों से भी जुड़ा हुआ है. रदार पटेल की जयंती के अवसर पर ये यादें इसलिए साझा की हैं, ताकि मसूरी की नई पीढ़ी को पता चल सके कि उनके शहर में कभी देश के दो महान नेताओं ने समय बिताया था. उनका मानना है कि ऐसी ऐतिहासिक यादों और दस्तावेजों को पहचानकर संरक्षित करने की जरूरत है. कमला कैसल की इमारत भले ही मिट गई हो, लेकिन उससे जुड़े पत्र, तस्वीरें और पारिवारिक संस्मरण आज भी मसूरी के इतिहास का एक अनमोल अध्याय हैं. आज 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के मौके पर इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने अपने परिवार से जुड़ी इन यादों को साझा किया है. उनके पिता दिवंगत आरजीआर भारद्वाज अपने समय के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य थे. उनका निवास कृष्णा निवास एस्टेट कमला कैसल के ठीक नीचे कैमल्स बैक रोड पर था. गोपाल भारद्वाज के मुताबिक, सरदार पटेल का मई 1948 का मसूरी दौरा निजी था और यह उनकी मसूरी की अंतिम यात्रा भी थी.मसूरी प्रवास के दौरान सरदार पटेल, आरजीआर भारद्वाज से मिलने कृष्णा निवास पहुंचे. गोपाल बताते हैं कि सरदार पटेल अपनी पुत्री मणिबेन के विवाह को लेकर चिंतित थे. सरदार पटेल ने पिता को मणिबेन की कुंडली दिखाई और विवाह के संबंध में सलाह ली. उनके पिता ने कुंडली देखने के बाद विवाह योग नहीं होने की बात कही. सरदार पटेल के आग्रह पर विशेष पूजा-अनुष्ठान भी कराए गए. मणिबेन ने आगे चलकर विवाह नहीं किया और अपना पूरा जीवन पिता की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण में लगा दिया. भारत विश्व शक्ति के रूप में स्थापित हैं. उनके द्वारा देश के प्रति किए योगदान से प्रेरणा लेकर हम सभी ने संकल्प लिया है कि अपने सामर्थ्य अनुसार उन्हें के पदचिन्हों पर चलते हुए देश के हित में काम करेंगे.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share1SendTweet1
Previous Post

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के साथ भर्ती में जवाबदेही ?

Next Post

नियम दरकिनार खराब मौसम में उड़ान भरने के जोखिम

Related Posts

उत्तराखंड

नियम दरकिनार खराब मौसम में उड़ान भरने के जोखिम

October 31, 2026
5
उत्तराखंड

विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के साथ भर्ती में जवाबदेही ?

October 31, 2026
5
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड पुलिस के नवीन गौरव चिह्नों का किया अनावरण

October 31, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला: अस्पताल में ऑनलाइन बुकिंग के नाम पर 1.28 लाख की ठगी

October 31, 2026
4
उत्तराखंड

डोईवाला: चार आरोपितों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी

October 31, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला डिग्री कॉलेज में अभाविप की नई कार्यकारिणी घोषित

October 31, 2026
4

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67759 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37387 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

नियम दरकिनार खराब मौसम में उड़ान भरने के जोखिम

October 31, 2026

सरदार पटेल की आखिरी दौरा साक्षी, आज पन्नों में जिंदा हैं यादें

October 31, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.