हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली/नंदाधाम कुरूड़।
ना तों सरकार की और ना ही नंदा राजजात समिति के झंडाबरदारों की ही चली ,चली तों केवल उन हजारों नंदा भक्तों की जिन्हें अपनी नंदा पर अटूट आस्था थी। उनक हजारों,हजार नंदा भक्तों को ना तों राजनीति से कुछ लेना-देना था और ना ही किसी किस्म के आर्थिक लाभ का लालच,उनकी तों केवल एक ही मुराद थी कि वें 12 वर्षों के लंबे समयांतराल में माता नंदा को कैलश विदा करने के साक्षी बने और वें इसमें सफल भी हुए।
बिना सरकारी सहयोग के प्रति दिन मीलों की लंबी और दुर्गम रास्तों, नालों,गद्देरों को जिस भक्तिभावना से नंदा- भगवती के जयकारों को बोलते हुए पार कर यात्रा के अंतिम लक्ष्य होमकुड़ तक पहुंचे, नंदा को कैलाश विदाई की प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखा उससे यात्री अपने आप को धन्य मान कर चल रहें हैं।श्री नंदादेवी बड़ीजात यात्रा 2026 में सामिल भक्तों ने साबित कर दिया कि सच्चें मन से की गई भक्ति के आगे अन्य सब गौण हैं, बहरहाल 2026 में आयोजित हुई नंदा बड़ीजात को लंबे समय तक कई मायनों में याद किया जाता रहेगा।इस यात्रा को पूरी करने वाले यात्री निश्चित ही अपनी आने वाली पीढ़ियों को यात्रा से संबंधित खट्टे,मीठे अनुभवों को साझा कर यात्रा की स्मृति को आगे बढ़ाएंगे। बताएंगे कि बड़ीजात यात्रा को उन्होंने बिना किसी सहयोग के अपने बलबूते ऐतिहासिक देव यात्रा को पूरी की।अब जब यात्रा अपने अंतिम पड़ावों पर पहुंच चुकी हैं, तों राज्य सरकार के यात्रा के प्रति असहयोग और राजजात समिति के हाई एटिट्यूड में विपरित मौसम होने, मोटर सड़कों,पैदल मार्गों की दुर्दशा होने, निर्जन पड़ावों रहने,खाने, पानी, शौचालयों सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने आदि-आदि पर चर्चा होना लाजमी हैं। इस सब के बीच निश्चित ही यात्रियों में सुकून भी होगा कि वें बिना किसी बाह्य सहयोग के देव यात्रा पूरी करने में सफल रहे। और वह भी देवी की कृपा से ऐसे खुशगवार मौसम में जो शायद दशकों के बाद मिला, और ना जाने कितने वर्षों बाद फिर से ऐसा खुशगवार मौसम मिलेगा, पिछली राजजात यात्राओं के संबंध में बताया जाता हैं कि 1987,2000 एवं 2014 में काफी विपरीत मौसम में यात्रा का आयोजन हुआ था। जबकि इस बार का खुला मौसम यात्रियों को बेहद रोमांचित,उत्साहित कर गया।
पिछले दो-तीन वर्षों से श्री नंदादेवी राजजात यात्रा 2026 को हिमालयी सचल महाकुंभ के रूप में आयोजित करने के लिए राज्य सरकार व नंदा राजजात कमेटी नौटी ने घोषणा कर देश में ही नही विदेशियों में भी खूब प्रचार किया जिससे नंदा भक्तों की नजरें प्रस्तावित यात्रा के प्रति आकृषित हुईं । परंतु राजजात यात्रा का दिन पट्टा (नंदादेवी का राजजात कार्यक्रम) जों कि इसी साल की बसन्त पंचमी 23 जनवरी को नौटी से निकाल जाना था, इससे कुछ दिन पहले ही समिति ने कर्णप्रयाग में एक प्रेस कांफ्रेंस कर इस वर्ष मलमास होने ,यात्रा के सितंबर माह के पहले सप्ताह में शुरू हो कर दूसरे पखवाड़े में उच्च हिमालई क्षेत्रों में पहुंचने,इस दौरान उच्च हिमालई क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने सहित कई अन्य बातें कह कर श्री नंदादेवी राजजात यात्रा को 2026 में टाल कर 2027 के लिए प्रस्तावित कर दिया। अचानक लिए गए इस फैसले से नंदा भक्त हतप्रभ रह गए। माता नंदा पर अटूट विश्वास करने वाले भक्तों को इस फैसले से निश्चित ही आघात पहुंचा। समिति का एक तरफा फैसला खटकने लगा। भक्तों के द्वारा समिति व सरकार से लंबे अनुनय-विनय करने के बाद समिति एवं राज्य सरकार अपनी हठधर्मिता पर अड़ी रही और राजजात का आयोजन 2027 में करने की बात कहते रहें। राजजात समिति 2027 में राजजात यात्रा की पैरवी करते रही,राज्य सरकार भी पर्दें के पीछे से ही सही इस समिति का खुला समर्थन करने में जुटी रही,यह बात तब साबित हो जाती हैं कि समिति के प्रभाव में सरकार कितनी प्रभावित थी,नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से होमकुंड एवं वहां से वापसी तक के पड़ावों में सरकारी की ओर से कोई भी व्यवस्था नही करना साबित कर चुकी हैं।कि राज्य सरकार भी इस यात्रा को आयोजित करने के पक्ष में नही थी।बहरहाल नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से बसन्त पंचमी के दिन श्री नंदादेवी बड़ीजात समिति के द्वारा दिन पट्टा जारी होने के बावजूद, राज्य सरकार, राजजात समिति ने इस कार्यक्रम को हल्के में लेते हुए यात्रा के प्रति आंखें मूंद ली। जबकि बड़ी जात समिति कुरूड़ (पंजीकृत) यात्रा को सफल बनाने में दिन रात जुटी रही, इस दौरान आंखें मुदें ही सही सरकार एवं समिति को एक बड़ी सफलता हासिल हुई कि उसने गढ़वाल एवं कुमाऊं से आने वाली देव डोलियों, निशानों, छंतोलियों के साथ आने वाले यात्रियों को रोक दिया,यही नही यात्रा के दौरान सबसे सम्मानित परगना बधाण की राजराजेश्वरी श्री नंदा देवी की डोली को भी बड़ीजात में सामिल नही होने दिया और बधाण की डोली वेदनी में लोकजात (छोटी जात) कर 6 महिने के प्रवास पर देवराड़ा -थराली को लौट पड़ी, जबकि दशोली, बण्ड़, ज्वाल्पा की डोलियां,भारी मात्रा में छतोलियों एवं चौसिंगा खांडुओं ने वेदनी बुग्याल से आगे होमकुंड की यात्रा जारी रखी और तीन निर्जन पड़ावों को पार कर होमकुंड पहुंच कर बड़ी जात भी सम्पन्न करवा ली हैं।इस दौरान मजेदार बात रही कि लंबे समय तक बधाण की डोली के साथ चल रहे काफी यात्री वेदनी बुग्याल से बड़ीजात यात्रा के साथ हो लिए, उन्होंने होमकुंड तक की यात्रा भी पूरी की। बिना सरकारी सहयोग के अपने बलबूते जिस तरह से पूरे हौसले, आत्मविश्वास, बिना खराब रास्तों, नालों ,गदेरो की परवाह किए बगैर, निर्जन पड़ावों में पानी, शौचालयों, चिकित्सा सुविधाओं के अभाव, आपातकालीन स्थिति से निपटने की ठोस व्यवस्था नही होने आदि के बावजूद जिस तादाद में निर्जन पड़ावों में यात्रियों का दबाव था, और उन्होंने बिना कोई शिकायत किए यात्रा की हैं वह अपने आप में ऐतिहासिक ही मानी जाएगी। बताया तों यह भी जा रहा है कि 2000 एवं 2014 में आयोजित श्री नंदा देवी राजजात यात्रा में जब राज्य सरकार यात्रा के संचालन में पूरा सहयोग कर रही थी उस समय भी करीब, करीब इतने ही यात्री उन यात्राओं में सामिल हुए थे, जितने की बड़ीजात यात्रा 2026 सामिल हुए, बड़ी बात यह रही कि इस यात्रा का ना तों सरकार ने प्रचार प्रसार किया और ना ही मीडिया ने ही इसे अधिक तवज्जो दी, बावजूद इसके सच्चे मन , दृढ़इच्छा शक्ति के यात्रा में पहुंचे भक्तों के साथ माता नंदा ने न्याय करते हुए ऐसी कृपा बरसाईं कि बड़ीजात यात्रा को लेकर राज्य सरकार, राजजात समिति किंतु, परंतु कहते रही और नंदा की इच्छा के अनुरूप एक ऐसे मौसम में यात्रा सम्पन्न होने को है जिसकी कल्पना तक नही की गई थी।
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*पीएम मोदी की खुलें में शौच ना करने की अपील हुईं धराशाई*
राज्य सरकार की कमी के कारण नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन, खुलें में शौच ना करने का संकल्प पूरी तरह धराशाही हो कर रह गया। दरसअल जब से कुरूड़ से यात्रा शुरू हुई और यात्रा में लगातार यात्रियों का कारवां बढ़ता गया, ग्रामीणों क्षेत्रों व कस्बों में सभी को नही तों काफी तादाद में यात्रियों को स्थानीय लोगों के शौचालय उपयोग में लाने को मिल गए, परंतु गैरोलीपातल, वेदनी बुग्याल,आली बुग्याल, पातरनचौनिया, कैलवाबिनायक, बगुवावासा, जामुन डाली,लाटा खोपड़ी,तातड़ा आदि बुग्यालों एवं उच्च हिमालई क्षेत्रों में जहां पर हजारों की संख्या में यात्री पहुंचे और विश्राम किया ऐसे निर्जन पड़ावों में सरकार के द्वारा अस्थाई शौचालयों की व्यवस्था तक करने की जहमियत नहीं उठाईं ऐसे में महिला यात्री हो या पुरुष यात्री उन्हें खुले आसमान तले ही शौच के लिए मजबूर होना पड़ा। जिससे बुग्यालों एवं हिमालय पर निश्चित ही गंदगी फैली होगी।इसके अलावा इन पड़ावों पर पीने तक के पानी की कोई व्यवस्था नही होने के कारण यात्रियों को दूर-दूर स्रोतों, नालों, गद्देरों से पानी ला कर पीना पड़ा।
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*2026 के बजाय 2027 यात्रा आयोजन का प्रस्ताव का लक्ष्य क्या था कौन देगा जवाब।*
अब जबकि श्री नंदादेवी बड़ीजात यात्रा बिना किसी बड़ी घटना के संपन्न होने को हैं और बहुसंख्यक यात्री अपने घरों की ओर प्रस्थान करने के लिए निकल चुकें हैं तों अब राजजात समिति नौटी एवं राज्य सरकार के द्वारा करीब 8 महिनें पहले यात्रा को लेकर उठाएं गए संदेहों का जबाब क्या देवी भक्तों को देंगे?। आखिर किस वजह से प्रस्तावित 2026 की यात्रा को 2027 में प्रस्तावित कर दिया गया। इसके पीछे समिति एवं सरकार की क्या मंशा रही इस प्रश्न का उत्तर हर कोई नंदा भक्त जानने को निश्चित ही उत्सुक हैं। यहां उत्सुकता राज्य के ही नही देश, विदेश के सनातन धर्म को मानने वाले लोग में निश्चित ही होंगी।
*पुलिस, प्रशासन की हुई सराहना*
यात्रा के अंतिम चरणों में अचानक से बहुत अधिक संसाधनों को मुहैया करवाए जिस तरह पुलिस, प्रशासन को बड़ी जात,लोकजात यात्रा में सक्रिय किया गया उससे एक बारगी यात्री भी अचम्भित हों उठें, किंतु प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारियों, जवानों, एसडीआरएफ ने यात्रा के दौरान यात्रियों के साथ जिस तरह का बेहद आत्मीय व्यवहार किया उससे यात्री गदगद हो उठें और उन्होंने पुलिस, प्रशासन की तारीफें ही की।











