डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में चारधाम से कनेक्टिविटी और यात्रा को सुगम बनाने के लिए प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ऑल वेदर रोड पहली बारिश में कहीं या तो धंस जा रही है या तो बह जा रही है। इसके साथ ही निर्माणाधीन पुल की शटरिंग टूटने से भी इस परियोजना में काम कर रहे ठेकेदारों पर सवाल उठने लगे हैं। ऑल वेदर रोड का निर्माण सामरिक दृष्टि से भी किया गया है, क्योंकि यह सड़क सीधे चीन बॉर्डर तक जाती है। बीते 13 जुलाई को पहली बारिश के बाद ऋषिकेश-बदरीनाथ ऑलवेदर रोड हाईवे पर पुरसाड़ी के पास सड़क किनारे बनी आरसीसी दीवार का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था, जिससे पूरा हाईवे बाधित हो गया था। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए सुधारीकरण कार्य पहली ही बरसात की परीक्षा में फेल साबित हो रहे हैं। एक वेदर भी नहीं झेल पाए इन निर्माण कार्यों के चलते कमेड़ा और बेलाकूची जैसे संवेदनशील भूस्खलन जोन फिर से सक्रिय हो गए हैं।गौचर के पास कमेड़ा में नवनिर्मित सुरक्षा दीवार का करीब 15 मीटर हिस्सा धंस गया है जबकि पीपलकोटी के समीप बेलाकूची में नई दीवार पर मोटी-मोटी दरारें पड़ गई हैं। इससे निर्माण गुणवत्ता और कार्यों की स्थायित्व पर सवाल उठने लगे हैं। कमेड़ा क्षेत्र में लंबे समय से भूधंसाव की समस्या बनी हुई है। यहां करीब 120 मीटर प्रभावित हिस्से में एंकरिंग और रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया गया था। अभी निर्माण कार्य पूरा भी नहीं हुआ था कि फिर से भूधंसाव शुरू हो गया और दीवार का लगभग 15 मीटर हिस्सा धंस गया। वहीं बेलाकूची में भी हाईवे किनारे हाल ही में बनी सुरक्षा दीवार में बड़ी दरारें उभर आई हैं। फिलहाल कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल प्रभावित हिस्सों में मिट्टी का भरान कर यातायात सुचारु रखने का प्रयास कर रही है।एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि भूधंसाव वाले स्थलों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा तथा कारणों का अध्ययन कर स्थायी उपचार किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो। वहीं दूसरी ओर राज्य के कई मार्ग भूस्खलन से बाधित हैं। जिस कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग में मंगलवार को चार घंटे वाहनों की आवाजाही बाधित रही। जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक एनएच में अमोड़ी और स्वाला के समीप सुबह चार बजे पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मलबा गिर गया। इससे यहां से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई। दरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग जोशीमठ चुंगी के पास पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण इस कारण बद्रीनाथ धाम की यात्रा रुक गई है। बद्रीनाथ धाम की यात्रा पर निकले हजारों तीर्थ यात्री फंस गए हैं। सड़क बंद होने के कारण सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई है। सड़क बंद होने के कारण जोशीमठ में फंसे तीर्थ यात्रियों को प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर बने रहने और रात गुजारने के लिए कहा है। बदरीनाथ हाईवे पर कंचन गंगा नाले के पास करीब 400 मीटर सड़क बदहाल बनी हुई है। जगह-जगह बड़े गड्ढे होने से सड़क तालाब में तब्दील हो गई है। बीते दिनों हुई भारी बारिश के कारण कंचन गंगा नाले में मलबा भरने से हाईवे की स्थिति और खराब हो गई है। इससे बदरीनाथ धाम की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बदरीनाथ धाम से करीब दो किलोमीटर पहले कंचन गंगा नाले में हाईवे को सुचारु रखने के लिए बीआरओ की ओर से करीब दो वर्ष पूर्व मोटर पुल का निर्माण शुरू किया जाना था। पुल निर्माण की सामग्री भी मौके पर पहुंचा दी गई थी लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाले में बारिश के दौरान मलबा आने से सड़क बार-बार बंद होती है। माणा गांव के ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह ने कहा कि कंचन गंगा नाले में हाईवे की आवाजाही सुचारु रखने के लिए पुल निर्माण बेहद जरूरी है। उन्होंने बीआरओ से जल्द पुल निर्माण शुरू करने की मांग की है। वहीं बेलाकूची में भी हाईवे किनारे हाल ही में बनी सुरक्षा दीवार में बड़ी दरारें उभर आई हैं। फिलहाल कार्यदायी संस्था एनएचआईडीसीएल प्रभावित हिस्सों में मिट्टी का भरान कर यातायात सुचारु रखने का प्रयास कर रही है।एनएचआईडीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि भूधंसाव वाले स्थलों का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा तथा कारणों का अध्ययन कर स्थायी उपचार किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा न हो। प्रशासन के अनुसार सड़क खोलने में और समय लग सकता है। ऐसे में तीर्थ यात्रियों को अपनी जगह रहने और भोजन की व्यवस्था करने के लिए कह दिया गया है।मंगलवार सुबह 7 बजे जोशीमठ चुंगी के पास पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर टूट कर अचानक सड़क पर आ गए, जिस कारण सड़क का आधा हिस्सा भी गायब हो गया है। सुबह से ही सीमा सड़क संगठन और प्रशासन की संयुक्त टीम मार्ग खोलने में जुटी हुई है। पहाड़ी से गिर रहे मलबे के कारण सड़क खोलने में समय लग रहा है। जोशीमठ के पास सड़क बंद होने के बाद कुछ तीर्थ यात्री अपनी जान जोखिम में डालकर जोगी धारा के ऊपर से इंदिरा पॉइंट होते हुए पैदल सड़क के उस पर निकले। लोगों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर यह रास्ता पार किया। यदि समय रहते ऋषिकेश-बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर ध्यान दिया जाता तो इस कटाव का आसानी से ट्रीटमेंट भी होता जाता है, लेकिन लेकिन अब झील के कटाव से पूरी सड़क ही नीचे आ गयी है, जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं है.बता दें कि बदरीनाथ और केदारनाथ धाम जाने के लिए श्रद्धालु इस हाईवे से गुजरते है. वहीं ये हाईवे रुद्रप्रयाग और चमोल जिले को सीधे ऋषिकेश, हरिद्वार और राजधानी देहरादून से जोड़ता है. वहीं इस हालत को लेकर जब लोक निर्माण विभाग खंड एनएच के सहायक अभियंता गर्विता पांडेय से बात की गई तो झील के पानी के कटान के चलते हाईवे करीब 50 मीटर नदी में समा गया. टूटे हुए हिस्से को सही करने का प्रयास किया जा रहा है. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











