डोईवाला, (प्रियांशु सक्सेना)। स्वच्छता पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत ओएनजीसी, तेल भवन, देहरादून के सीएसआर सहयोग एवं मुमकिन है डेवलपमेंट फाउंडेशन के संचालन में रविवार को हिमालय रक्षक फाउंडेशन, रानीपोखरी में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ विषय पर पुराने कपड़ों से कपड़े के बैग एवं अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य अनुपयोगी पुराने कपड़ों को उपयोगी उत्पादों में बदलकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना था। इससे पूर्व फाउंडेशन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में चलाए गए संग्रह अभियान के माध्यम से 685 किलोग्राम पुराने कपड़े एकत्र किए गए थे। इन्हीं कपड़ों का उपयोग कर महिलाओं को आकर्षक कपड़े के बैग एवं अन्य घरेलू उपयोगी उत्पाद बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षक आरती भारद्वाज ने प्रतिभागियों को कपड़ों की छंटाई, कटिंग, सिलाई, उत्पाद की गुणवत्ता, डिजाइन, फिनिशिंग तथा विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। प्रशिक्षण में हिमालय रक्षक फाउंडेशन, आरवी स्वयं सहायता समूह, देवभूमि स्वयं सहायता समूह एवं आयुष्मान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर पालिका डोईवाला के मुख्य सफाई निरीक्षक सचिन रावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास न केवल प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में सहायक हैं, बल्कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार के अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने महिलाओं से कपड़े के पुनः उपयोग को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
निदेशिका प्रगति सडाना ने बताया कि आज देश में वस्त्र अपशिष्ट (टेक्सटाइल वेस्ट) के पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरित रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं। वही, संस्था से जुड़े लोगों ने बताया भविष्य में भी महिलाओं को कौशल विकास, स्वरोजगार एवं पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने वाली ऐसी अभिनव गतिविधियों का संचालन करती रहेगी।
यह पहल “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को साकार करते हुए स्वच्छ, प्लास्टिक मुक्त और आत्मनिर्भर समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में रिंकल, प्रेम चंद पंवार, कमलेश, आरती, यशोदा, इंदु, लक्ष्मी आदि ने भाग लिया।











