• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

अधूरा रह गया सीडीएस बिपिन रावत का पैतृक गांव में बसने का सपना

11/12/21
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
147
SHARES
184
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला:

बिपिन रावत ने देहरादून में कैंब्रियन हॉल स्कूल, शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से पढ़ाई की। 11वीं गोरखा राइफल की पांचवीं बटालियन से 1978 में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम. फिल की डिग्री हासिल की। वहीं, सैन्य मीडिया रणनीतिक अध्ययन पर अपना शोध पूरा किया है। साल 2015 में भी बिपिन रावत एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में बाल-बाल बच निकले थे। पौड़ी जिले में जन्मे सीडीएस रावत का उत्तराखंड से विशेष लगाव था।

भारत-चीन बॉर्डर पर हो रही हर गतिविधियों पर सीडीएस रावत की हमेशा ही पैनी नजर रहती थी। हाल ही में सीडीएस रावत गढ़वाल विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में 01 दिसंबर को भी उत्तराखंड आए थे। इससे पहले वह उत्तराखंड स्थापना दिवस 09 दिसबंर को भी देहरादून आए थे।सीडीएस बिपिन रावत ने सेना में जाकर देश की सेवा करने में इच्छुक उत्तराखंड के युवाओं को तोहफा भी दिया था। सेना भर्ती के कठिन मानकों को शिथलता करते हुए सीडीएस रावत ने हजारों युवाओं का सेना की वर्दी पहनने का सपना साकार किया था। युवाओं को सेना भर्ती के ऊंचाई मानकों में छूट देने की हामी सीडीएस रावत ने ही भरी थी। 

उन्हीं की बदौलत सेना भर्ती में युवाओं को ऊंचाई मानकों में पांच सेंटीमीटर की छूट मिली थी। 16 मार्च 1958 को पौड़ी में जन्में जनरल विपिन रावत का परिवार कई पीढ़ियों से भारतीय सेना में सेवाएं दे रहा है। उनके पिता सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत 1988 में वे उप सेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

वह 16 दिसंबर 1978 में गोरखा राइफल्स की पांचवीं बटालियन में शामिल हुए। सितंबर 2016 में वह देश के 26वें थल सेनाध्यक्ष बने थे। 2019 तक वो इस पद पर रहे। 01 जनवरी 2020 से वह देश के पहले सीडीएस नियुक्त किया गया था। उन्होंने कार्यभार संभाला था। परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, युद्ध सेवा पदक, सेना पदक, विशिष्ट सेवा पदक, ऐड-डि-कैम्प रहे विपिन रावत रक्षा और रणनीतिक मामलों में सरकार के प्रमुख सलाहकार भी थे। जनरल रावत को पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा, कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में काम करने का लंबा अनुभव है।

अपने करियर में जनरल बिपिन रावत को यूआईएसएम, एवीएसएम, वाईएसएम, एसएम, वीएसएम के साथ वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए सम्मानित किया गया है। दो मौकों पर सीओएएस कमेंडेशन और आर्मी कमांडर कमेंडेशन भी दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के साथ सेवा करते हुए, उन्हें दो बार फोर्स कमांडर के कमेंडेशन से सम्मानित किया गया। साल 2019 में जनरल बिपिन रावत ने इच्छा जताई थी कि वह रिटायरमेंट के बाद अपने पैतृक गांव में ही रहेंगे।

वे 2004 में अपने मामा ठाकुर बीरेंद्रपाल सिंह परमार के साथ थाती गांव आए थे। उसके बाद 2019 में उन्हें ननिहाल आने का मौका मिला था। उन्होंने गांव के छोटे-बड़े बच्चों और बुजुर्गों से मुलाकात कर रिटायरमेंट के बाद थाती गांव में ही रहने की बात कही थी। सीडीएस बिपिन रावत के निधन से सशत्र सेनाओं के शिखर पर पहुंचे उत्तराखंड के दोनों बेटों का सेवा के दौरान निधन होने का दुखद दुर्योग बन गया है इससे पूर्व जनरल बिपिन चंद्र जोशी का थल सेनाध्यक्ष रहते हुए आकस्मिक निधन हुआ था।

इत्तेफाक से दोनों के नाम बिपिन ही रहा। पूर्व आर्मी चीफ जनरल बिपिन चंद्र जोशी का जन्म 05 दिसम्बर 1935 को पिथौरागढ़ में जन्म हुआ था। जनरल जोशी अल्मोड़ा जिले के दन्या के मूल निवासी थे।  जोशी थल सेनाध्यक्ष पद पर पहुंचने वाले उत्तराखंड के पहले सैन्य अधिकारी बने। वे भारतीय थल सेना के 17वें प्रमुख बने। लेकिन सेवाकाल के दौरान ही 18 नवम्बर 1994 को उनका नई दिल्ली के मिलिट्री हॉस्पिटल में आकस्मिक निधन हो गया ।

तब वो 58 वर्ष के थे, इस तरह उनका सेवा काल अभी करीब एक साल बचा हुआ था।  बिपिन चंद्र जोशी ने 04 दिसम्बर 1954 को सेकेंड लान्सर (गार्डनर्स हॉर्स) इंडियन आर्म्ड कॉर्प्स में भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया। सीडीएस बिपिन रावत का आकस्मिक निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। देश की सुरक्षा के लिए उनका महान योगदान रहा। देश की सीमाओं की सुरक्षा और रक्षा के लिए उनके द्वारा लिए गए निर्णयों को सदैव याद रखा जाएगा। उनके निधन से उत्तराखंड को भी बड़ी क्षति हुई है।

हम सबकों अपने इस महान सूपत पर हमेशा गर्व रहेगा। दरअसल जनरल रावत ने सेना से रिटायर होने के बाद अपने पैतृक गांव में बसने की इच्छा जताई थी. लेकिन उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी. जनरल रावत का देहरादून से खासा लगाव रहा। यही वजह है कि वे दून में अपना नया मकान बना रहे थे। शहर से करीब 20 किमी दूर जंगल के बीच शांत क्षेत्र प्रेमनगर पौंधा के जलवायु विहार स्थित सिल्वर हाइट्स उनका एक प्लाट है, जिसमें निर्माण कार्य भी शुरू हो गया था। वे खाली हो चुके गांव को लेकर काफी गंभीर नजर आए।

साथ ही वन्य जीवों के कारण छूट रही खेती पर भी उन्होंने ङ्क्षचता जताई। जनरल रावत का कहना था कि ऐसी योजनाएं बनें, जिससे गांव का पलायन रुक सके। इस दौरान उन्होंने अपनी पैतृक भूमि भी देखी और गांव में आवास बनाने की बात कही। देश की सेवा में हर मोर्चे पर काबिलियत और क्षमता का लोहा मनवाने वाले चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत के जीवन में दिसंबर काफी महत्वपूर्ण रहा। यह वो महीना है, जो उनके जीवन में आए तमाम उतार-चढ़ाव का साक्षी बना।

वर्ष 1978 में दिसंबर में ही जनरल रावत ने सेना में देश सेवा की कमान संभाली थी और दिसंबर में ही उन्हें सेना के उच्च पदों की जिम्मेदारी मिली। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि दिसंबर ही उनके बलिदान का भी साक्षी बना। उत्तराखंड की माटी में जन्मे कई लाल देश की सेना में बड़ी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।

इनमें प्रमुख रूप से पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल बीसी जोशी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल डीके जोशी, पूर्व रा प्रमुख अनिल धस्माना, कोस्टगार्ड के हेड रहे राजेंद्र सिंह और डीजीएमओ की जिम्मेदारी संभाल चुके ले. जनरल अनिल भट्ट का नाम शामिल है। थलसेना प्रमुख रहते हुए जनरल बीसी जोशी की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई थी।

Share59SendTweet37
Previous Post

पांडवलीला नृत्य का आकर्षक आयोजन

Next Post

भाजपा-कांग्रेस ने उत्तराखंड में सिर्फ लूटपाट मचाई हैः चौहान

Related Posts

उत्तराखंड

जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : गैरोला

July 23, 2026
12
उत्तराखंड

डोईवाला: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका, इस्तीफे की मांग

July 23, 2026
12
उत्तराखंड

अमानत में खयानत: जब रक्षक ही भक्षक बने

July 23, 2026
7
उत्तराखंड

प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी मात्र सरकारी योजनाओं की ही नहीं अपितु समाज की भी हो – पद्मश्री डॉ. कल्याण सिंह रावत ‘मैती’

July 23, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले- श्रमिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

July 23, 2026
6
उत्तराखंड

डोईवाला: पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस सेवा दल का मौन व्रत

July 23, 2026
23

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67713 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38069 shares
    Share 15228 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : गैरोला

July 23, 2026

डोईवाला: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका, इस्तीफे की मांग

July 23, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.