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कपाट खोलने की तिथि में परिवर्तन का शुभ अशुभ से भी संबंध

20/04/20
in उत्तराखंड, चमोली
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फोटो- भगवान बदरीविशाल का सिंहद्वार जिसके कपाट अब तय समय से 15 दिनों बाद खुलने हैं।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि परिवर्तन को लेकर बदरीनाथ से जुडे धार्मिक क्षेत्र को लोग इसे बोलांदा बदरी का आदेश मानते हुए सही ठहरा रहे हैं। हाॅलाकि पहली बार हुई तिथि परिवर्तन के इस एतिहासिक निर्णय को अनादिकाल से चली आ रही पंरपराआंे के साथ छेड़छाड़ बताते हुए इसे शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। सूबे के पर्यटन एवं धर्मस्व सचिव दलीप जावलकर ने कहा कि कोविड-19 के कारण टिहरी के महाराजा द्वारा इस प्रकार का निर्णय लिया गया है।
भू-वैकंठ धाम श्री बदरीनाथ के कपाट आगामी तीस अप्रैल को खोले जाने थे और शासन/प्रशासन द्वारा कपाट खोलने की परंपराआंे के निर्वहन के लिए मुख्य पुजारी श्री रावल की मौजूदगी सुनिश्चित करते हुए उन्हें केरल से सड़क मार्ग से बदरीनाथ पंहुचाने की सभी व्यवस्थाए भी कर ली गई थी। श्री रावल 22 अप्रैल को जोशीमठ पंहुच भी रहे हैं। इसके अलावा कपाटोद्घाटन की तैयारियों को लेकर देवस्थानम बोर्ड के सीईओ के निर्देश पर मंदिर अधिकारियों व कर्मचारियों का दल धाम में बीती 18 अप्रैल से कार्य में जुटा है। लेकिन इस सबके बाद अचानक कपाटोद्घाटन की ही तिथि परिवर्तन कर देना यह किसी के गले नहीं उतर रहा है। हाॅलाकि कोरोना जैसी महामारी के कारण संभवतः मुख्य पुजारी श्री रावल को क्वारंटीन किया जाना हो, लेकिन यदि यह सब करना ही था तो श्री रावल को पहले भी सड़क मार्ग से लाय जा सकता था। लेकिन उनके वहाॅ से प्रस्थान करने के बाद अचानक तिथि परिवर्तन कर दी गई।
भगवान बदरीविशाल के कपाट अनादिकाल से ही शीतकाल मे बंद होते है और ग्रीष्मकाल में दर्शनांे के लिए खोले जाते है। यहाॅ के कपाट खुलने की पौराणिक परंपरा का आज भी निर्वहन हो रहा है। वसंत पंचमी के पर्व पर टिहरी राजदरबार में महाराजा की मौजूदगी मे राजपुरोहितांे द्वारा कपाट खुलने की तिथि निश्चित की जाती है और विजयदशमी पर्व पर बदरीनाथ के मुख्य पुजारी श्री रावल की मौजूदगी व आद्यजगदगुरू शंकराचार्य की गददी को साक्षी मानते हुए धर्माधिकारी द्वारा कपाट बंद करने का मुहुर्त तय किया जाता है। इस वर्ष कपाट खुलने की तिथि तीस अप्रैल को प्रात साढे चार बजे निश्चित की गई थीं जिसमे अब टिहरी महाराजा के द्वारा बदलाव कर 15मई प्रात साढे चार बजे कर दिया गया है।
बदरीनाथ के धर्माधिकारी आचार्य भुवन च्रद उनियाल के अनुसार टिहरी नरेश द्वारा कपाटेादघाटन की तिथि 15मई घोषित कर दी गई है। और अब गाडू-घडा तेल कलश 5 मई को टिहरी दरबार से प्रस्थान करेंगे। उन्हांेने कहा कि तिथि परिवर्तन की घटना को वो भी पहली बार ही देख सुन रहे हैं। श्री उनियाल ने यह भी जानकारी दी कि टिहरी राजपुरोहित द्वारा नवीन तिथि घोषित करने से पूर्व उनसे भी सलाह-मशमिरा किया गया था।
कपाटोदघाटन की तिथि में बदलाव को लेकर राज्य के पर्यटन एवं धर्मस्व सचिव दलीप जावलकर से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि कोविड-19के कारण इस प्रकार का निर्णय टिहरी महाराजा द्वारा लिया गया है। उनका कहना था कि केन्द्र सरकार की गाइड लाइन का पालन करने के लिए ऐसा किया जाना भी जरूरी था। क्योंिक तेल निकालने वाले दिन भी कई लोग टिहरी दरबार मे मौजूद रहेगे इसके अलावा डोलियो के प्रस्थान के दौरान भी सोसिएल डिस्टेशं का पालन सुनिश्चित कराया जाना भी एक चुनौती होता इसलिए श्री बदरीनाथ धाम के कपाटोदघाटन की तिथि मे परिवर्तन ही इस समय एक मात्र उपाय था। कोविड-19 को देखते हुए धर्म क्षेत्र से जुडे लोग भी इस निर्णय का अवश्य स्वागत करेगे। धर्मस्व सचिव ने कहा कि भगवान केदारनाथ के कपाट खुलने की तिथि के निर्णय की जानकारी मंगलवार दोपहर तक दी जा सकेगी।
देवभूमि चारधाम हकहकूकधारी महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी के अनुसार टिहरी राजा को बोलांदां बदरी कहा जाता हैं उनका निर्णय एक प्रकार से राजाज्ञा ही है। लेकिन चारधाम महापंचायत जो देवस्थानम बोर्ड के विरोध मे न्यायालय मे पैरवी कर रही है उसके लिए यह घटनाक्रम भी एक आधार बन गया है। और उन्हें पूर्ण भरोसा है कि उत्तराख्ंाड के धामांे को बचाने के लिए आगे भी टिहरी महाराजा इस प्रकार का हस्तक्षेप करेंगे।
दूसरी ओर श्री बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व सीईओ जेएस विष्ट ने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी उम्र इस वक्त 76वर्ष है और उन्होंने कपाट खुलने या बंद होने की तिथि में कभी परिर्वतन होते नहीं देखा। कहा कि उन्होंने करीब 35 वर्ष श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सेवाएं की है । उन्होंने कहा कि कपाट खोलने व बंद करने के दौरान यह भी अवश्य ही देखा जाता रहा है कि भगवान को एक पूजा वैसाख मास की तथा एक पूजा मार्गशाीर्ष मास की मिले।’’ यदि इस प्रकिया के दौरान मलिन मास ना हो’’ लेकिन अब 15 मई को जेष्ठ मास में ही कपाट खोलने का निर्णय हुआ है। उनका कहना था कि विकट से विकट समस्याआंे के बावजूद भी कपाट खुलने की तिथि परिवर्तन होते हुए ना देखा है और ना ही अपने पूर्वजों से सुना है। इसे शुभ संकेत नहीं कहा जा सकता ।
बहरहाल भगवान बदरीविशाल के कपाट खुलने की नई तिथि 15 घोषित हो गई है। और कोविड-19 इस तिथि को बदलने का एक मात्र व मुख्य कारण है। उम्मीद की जानी चाहिए कि 15मई तक देश व प्रदेश से कोरोना वायरस की समाप्ति हो और चारधाम यात्रा पूर्व वर्षो की भाॅति संचालित हो सके। ताकि पर्यटन ब्यवसाय से जुडे हजारो परिवारों का गुजर-बसर हो सके।

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