• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

क्यों कड़ाके की ठंड में भी सुलग रहे जंगल, कौन है जिम्मेदार?

15/01/26
in उत्तराखंड, देहरादून
11
SHARES
14
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
यूनेस्को विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ क्षेत्र में सामने आई आग की घटना के बाद हरिद्वार सहित मैदानी क्षेत्रों में भी वन विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। वर्षा न होने और लंबे समय से शुष्क मौसम बने रहने के कारण जंगलों में आग लगने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।  नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क की फूलों की घाटी रेंज के जंगलों में सप्ताहभर से लगी आग की घटना ने उच्च हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता के साथ ही अन्य खतरों को लेकर सोचने पर विवश कर दिया है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के असर के तौर पर देख रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि शीतकाल में जंगलों के सुलगने के सही कारणों का पता लगाने को वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है। इसमें सामने आने वाले कारणों के आधार पर उच्च हिमालयी क्षेत्र के वनों में अग्नि नियंत्रण के लिए ठोस एवं प्रभावी नीति बननी चाहिए।उच्च हिमालयी क्षेत्र के जंगलों के परिदृश्य में देखें तो फूलों की घाटी रेंज से पहले भी राज्य में इस तरह की घटनाएं नियमित अंतराल में हो रही हैं। वर्ष 2016 से लेकर 2025 तक भी पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली जिलों के 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र के जंगलों में शीतकाल में आग धधकी थी। यद्यपि, इन पर जल्द काबू पा लिया गया था, लेकिन आग लगने के कारणों का आज तक खुलासा नहीं हुआ। इस बार फूलों की घाटी रेंज में जिस तरह से सप्ताहभर से जंगल सुलग रहे हैं, उसने उच्च हिमालयी क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी भी बजा दी है। उत्तराखंड में शीतकाल में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। कारणों का पता लगाने के लिए सरकार गहन अध्ययन कराएगी। वन मंत्री ने इस संबंध में विभाग प्रमुख को निर्देश दिए हैं। वन मंत्री ने कहा कि शीतकाल में वनों में आग की घटनाएं चिंता का विषय है। विशेषकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों के जंगलों में आग क्यों लग रही है, इसके कारणों की पड़ताल होनी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के मुखिया प्रमुख वन संरक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि इन कारणों के दृष्टिगत वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि अध्ययन रिपोर्ट के बाद स्थिति से निबटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।वन विभाग की टीम भ्यूंडार की पुष्प गंगा को बल्ली लगाकर किसी तरह पार करने में सफल रही, लेकिन ऊंची चट्टानों में आग लगने के कारण इसे बुझाने का काम वन कर्मियों के लिए मुश्किल भरा है।नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के फूलों की घाटी रेंज के बफर जोन में तीन दिनों से आग लगी है जो निरंतर फैल रही है। आग बुझाने के लिए भेजी गई वन कर्मियों की टीम भ्यूंडार की पुष्प गंगा में पुल न होने के कारण अटकी हुई थी। हालांकि लकड़ियों की बल्ली लगाकर वन कर्मी किसी तरह नदी पार कर जंगल की ओर रवाना हुए हैं। जंगल में लगी आग लगातार फैल रही है। दूसरी ओर ज्योतिर्मठ के चांई थेंग के जंगलों में भी लगी आग लगातार फैल रही है।नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क और फूलों की घाटी में बेशकीमती वन संपदा मौजूद है। इसमें कस्तूरा, स्नोलैपर्ट सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी हैं। आग के कारण इन जीवों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।बताया गया है कि बारिश न होने के कारण जंगलों में झाड़ सूखी हुई है, जो आग फैलने का मुख्य कारण बन रहा है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के प्रभागीय वनाधिकारी अभिमन्यु ने कहा कि आग अभी फूलों की घाटी रेंज के नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के बफर जोन में लगी है।लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आग पर काबू पाने में कठिनाई हो रही है। निचले क्षेत्र में लगी आग पर काबू पा लिया गया है जबकि चट्टानी भाग पर लगी आग को बुझाने में वन कर्मी जुटे हुए हैं। आग बुझाने में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी वन दरोगा, वनबीट अधिकारी सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।  वन क्षेत्रों को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए वहां आग की घटनाओं पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देशित किया कि मंदिर समितियों को फायर सेफ्टी से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाए तथा उन्हें अग्निरोधक जैकेट, अग्निशमन उपकरणों और आवश्यक संसाधनों की सूची उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share4SendTweet3
Previous Post

हिमालय पौष के महीने मे भी सूखे से कराह रहा है

Next Post

सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में उत्तराखंड सरकार का ऐतिहासिक कदम

Related Posts

उत्तराखंड

ग्राम्य विकास के लिए संकल्पित होकर कार्य करें : गोस्वामी

May 31, 2026
14
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने बालिकाओं के साथ प्रधानमंत्री के मन की बात के 134 वें संस्करण को सुना

May 31, 2026
5
उत्तराखंड

उत्तराखंड में प्रदेश के कई गांव आज भी विस्थापन की बाट जोह रहे हैं

May 31, 2026
7
उत्तराखंड

कुलसचिव डॉ० मंद्रवाल ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका

May 31, 2026
113
उत्तराखंड

नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ का भव्य शुभारंभ

May 31, 2026
9
उत्तराखंड

वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी व मुजफ्फरनगर गोली काण्ड की मुख्य गवाह रही श्रीमती विमला कोटियाल (65) जी का निधन

May 31, 2026
13

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67692 shares
    Share 27077 Tweet 16923
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45779 shares
    Share 18312 Tweet 11445
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38057 shares
    Share 15223 Tweet 9514
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37446 shares
    Share 14978 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37331 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

ग्राम्य विकास के लिए संकल्पित होकर कार्य करें : गोस्वामी

May 31, 2026

मुख्यमंत्री ने बालिकाओं के साथ प्रधानमंत्री के मन की बात के 134 वें संस्करण को सुना

May 31, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.