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क्यों कड़ाके की ठंड में भी सुलग रहे जंगल, कौन है जिम्मेदार?

15/01/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
यूनेस्को विश्व धरोहर ‘फूलों की घाटी’ क्षेत्र में सामने आई आग की घटना के बाद हरिद्वार सहित मैदानी क्षेत्रों में भी वन विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट हो गया है। वर्षा न होने और लंबे समय से शुष्क मौसम बने रहने के कारण जंगलों में आग लगने की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।  नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क की फूलों की घाटी रेंज के जंगलों में सप्ताहभर से लगी आग की घटना ने उच्च हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता के साथ ही अन्य खतरों को लेकर सोचने पर विवश कर दिया है। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन के असर के तौर पर देख रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि शीतकाल में जंगलों के सुलगने के सही कारणों का पता लगाने को वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है। इसमें सामने आने वाले कारणों के आधार पर उच्च हिमालयी क्षेत्र के वनों में अग्नि नियंत्रण के लिए ठोस एवं प्रभावी नीति बननी चाहिए।उच्च हिमालयी क्षेत्र के जंगलों के परिदृश्य में देखें तो फूलों की घाटी रेंज से पहले भी राज्य में इस तरह की घटनाएं नियमित अंतराल में हो रही हैं। वर्ष 2016 से लेकर 2025 तक भी पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली जिलों के 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र के जंगलों में शीतकाल में आग धधकी थी। यद्यपि, इन पर जल्द काबू पा लिया गया था, लेकिन आग लगने के कारणों का आज तक खुलासा नहीं हुआ। इस बार फूलों की घाटी रेंज में जिस तरह से सप्ताहभर से जंगल सुलग रहे हैं, उसने उच्च हिमालयी क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी भी बजा दी है। उत्तराखंड में शीतकाल में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को लेकर सरकार सतर्क हो गई है। कारणों का पता लगाने के लिए सरकार गहन अध्ययन कराएगी। वन मंत्री ने इस संबंध में विभाग प्रमुख को निर्देश दिए हैं। वन मंत्री ने कहा कि शीतकाल में वनों में आग की घटनाएं चिंता का विषय है। विशेषकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों के जंगलों में आग क्यों लग रही है, इसके कारणों की पड़ताल होनी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वन विभाग के मुखिया प्रमुख वन संरक्षक को निर्देश दिए गए हैं कि इन कारणों के दृष्टिगत वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि अध्ययन रिपोर्ट के बाद स्थिति से निबटने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।वन विभाग की टीम भ्यूंडार की पुष्प गंगा को बल्ली लगाकर किसी तरह पार करने में सफल रही, लेकिन ऊंची चट्टानों में आग लगने के कारण इसे बुझाने का काम वन कर्मियों के लिए मुश्किल भरा है।नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के फूलों की घाटी रेंज के बफर जोन में तीन दिनों से आग लगी है जो निरंतर फैल रही है। आग बुझाने के लिए भेजी गई वन कर्मियों की टीम भ्यूंडार की पुष्प गंगा में पुल न होने के कारण अटकी हुई थी। हालांकि लकड़ियों की बल्ली लगाकर वन कर्मी किसी तरह नदी पार कर जंगल की ओर रवाना हुए हैं। जंगल में लगी आग लगातार फैल रही है। दूसरी ओर ज्योतिर्मठ के चांई थेंग के जंगलों में भी लगी आग लगातार फैल रही है।नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क और फूलों की घाटी में बेशकीमती वन संपदा मौजूद है। इसमें कस्तूरा, स्नोलैपर्ट सहित कई दुर्लभ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी हैं। आग के कारण इन जीवों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।बताया गया है कि बारिश न होने के कारण जंगलों में झाड़ सूखी हुई है, जो आग फैलने का मुख्य कारण बन रहा है। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के प्रभागीय वनाधिकारी अभिमन्यु ने कहा कि आग अभी फूलों की घाटी रेंज के नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के बफर जोन में लगी है।लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आग पर काबू पाने में कठिनाई हो रही है। निचले क्षेत्र में लगी आग पर काबू पा लिया गया है जबकि चट्टानी भाग पर लगी आग को बुझाने में वन कर्मी जुटे हुए हैं। आग बुझाने में केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी वन दरोगा, वनबीट अधिकारी सहित कई ग्रामीण शामिल रहे।  वन क्षेत्रों को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए वहां आग की घटनाओं पर सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देशित किया कि मंदिर समितियों को फायर सेफ्टी से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाए तथा उन्हें अग्निरोधक जैकेट, अग्निशमन उपकरणों और आवश्यक संसाधनों की सूची उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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