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बारिश से पहाड़ों में बढ़ा खतरा

22/07/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड में लगातार कई घंटे से बारिश का सिलसिला जारी है. देहरादून के अलावा दूसरे मैदानी इलाकों और खासकर पर्वतीय जिलों के ज्यादातर क्षेत्र बारिश से प्रभावित दिखाई दे रहे हैं. लगातार हो रही बारिश के कारण पर्वतीय जिलों में कई मार्गों पर भूस्खलन की भी घटनाएं भी हुई. जिसके कारण कुछ मार्ग बाधित भी हुए हैं.बता दें कि उत्तराखंड में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है. पिछले कई घंटों से लगातार हो रही बारिश ने मैदानी से लेकर पर्वतीय जिलों तक जनजीवन प्रभावित कर दिया है. राजधानी देहरादून समेत हरिद्वार, नैनीताल, उधम सिंह नगर और पर्वतीय जिलों में लगातार बारिश का दौर जारी है. सबसे ज्यादा असर पहाड़ी इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां जगह-जगह भूस्खलन होने से कई मोटर मार्ग बाधित हो गए हैं. इससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है.  उत्तराखंड के लिए 19 से 23 जुलाई तक पांच दिनों का जिला स्तरीय मौसम पूर्वानुमान जारी किया है. पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य के ज्यादात हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना है. 19 और 20 जुलाई को देहरादून, नैनीताल, चंपावत, उधम सिंह नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर समेत कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश भी हो सकती है. मौसम विभाग ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों के किनारे न जाने और प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है. वहीं, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को भी सतर्क रहने को कहा है. साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं. लगातार बारिश के कारण राज्य के कई पर्वतीय जिलों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं. कई स्थानों पर मलबा आने से सड़कें बंद हो गई हैं. लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पीएमजीएसवाई और बीआरओ की टीमें प्रभावित मार्गों को खोलने में जुटी हुई हैं. हालांकि, लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों में भी बाधा बन रही है. प्रशासन का कहना है कि जहां भी सड़कें बंद हो रही हैं, वहां मशीनें लगाकर जल्द से जल्द यातायात बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है. उधर, उत्तरकाशी के अलावा चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चंपावत, अल्मोड़ा जैसे जिलों में भी भूस्खलन से कुछ सड़कें बाधित होने की खबरें आ रही हैं. हालांकि, जिला प्रशासन के स्तर पर संवेदनशील मार्गो में सड़कों को जल्द से जल्द खोलने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं. आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से भी जिला प्रशासन को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं. मौसम विभाग की चेतावनी को देते हुए पर्वतीय जिलों को विशेष तौर पर चारधाम से जुड़े जिलों में विशेष एहतियात बरतने के लिए कहा गया है.  यात्रियों से मौसम को देखते हुए पूरी सावधानी बरतने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है.लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखा गया है.गौर है कि, उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है. कई छोटे-बड़े मार्ग लैंडस्लाइड और मलबा आने से बंद हो रहे हैं. जबकि नदी नालों का जलस्तर काफी बढ़ गया है. लगातार हो रही बारिश से चारधाम यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने पर्वतीय जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है। सबसे ज्यादा असर उत्तरकाशी और चमोली जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां सड़कों पर मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने से वाहनों की आवाजाही रुक गई है। प्रशासन ने लोगों से केवल आवश्यक होने पर ही यात्रा करने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।त्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे स्याना चट्टी के पास भारी भूस्खलन के कारण बंद हो गया। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाईवे चौड़ीकरण के दौरान निर्माण एजेंसी द्वारा की जा रही अनियंत्रित कटिंग के कारण बार-बार भूस्खलन हो रहा है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों की जान जोखिम में पड़ रही है। लोगों ने प्रशासन से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।यमुनोत्री धाम की यात्रा पर भी इस भूस्खलन का सीधा असर पड़ा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रास्ते में फंस गए और उन्हें सड़क खुलने का लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि संवेदनशील इलाकों में अनियंत्रित कटिंग पर रोक नहीं लगी तो भविष्य में और बड़े भूस्खलन हो सकते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होने की आशंका बढ़ जाएगी।वहीं चमोली जिले में देवाल-लोहाजंग-वाण स्टेट हाईवे भी गमलीगाड़ क्षेत्र में भारी मलबा आने से पूरी तरह बंद हो गया। सड़क बंद होने से देहरादून, हल्द्वानी, गोपेश्वर और अन्य स्थानों की ओर जाने वाले 30 से अधिक वाहन बीच रास्ते में फंस गए। सूचना मिलते ही प्रशासन और संबंधित विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और जेसीबी सहित अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने पर जल्द से जल्द मार्ग को यातायात के लिए खोलने का प्रयास किया जाएगाविशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश के साथ-साथ अनियोजित कटिंग और निर्माण गतिविधियां भी पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं को बढ़ा रही हैं। प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों से अपील की है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य लें तथा संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा करने से बचें।।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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