डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के दयारा बुग्याल में पौराणिक और धार्मिक बटर फेस्टिवल के नाम से विख्यात अढूंड़ी उत्सव पर्यटकों की उपस्थिति में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इसमें लोगों ने दूध, मक्खन और मट्ठे से जमकर होली खेली. इस दौरान भगवान सोमेश्वर देवता की डोली की पूजा अर्चना के साथ ग्रामीणों ने प्रकृति के प्रति आभार जताया. इस अवसर पर ग्रामीणों ने क्षेत्र की समृद्धि और खुशहाली की कामना की. देश-विदेश से आए पर्यटकों ने बटर फेस्टिवल के दौरान एक-दूसरे पर दूध, मक्खन और मट्ठा लगाकर धूमधाम से होली खेली. भटवाड़ी ब्लॉक के पंचगई क्षेत्र के रैथल, क्यार्क, बन्दरणी, नटिन और भटवाडी गांवों के निवासियों ने 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित और 28 वर्ग किलोमीटर में फैले दयारा बुग्याल में इस अनोखे पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया.बटर फेस्टिवल के दौरान बड़ी संख्या में टिहरी, उत्तरकाशी, देहरादून और अन्य जिलों से पर्यटकों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर इस अनोखे पर्व का आनंद लिया. यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार जताने के उद्देश्य से मनाया जाता है और इसके पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी है. बुग्यालों में ग्रीष्मकाल के दौरान ग्रामीण अपने पशुओं को चराने के लिए ले जाते हैं, जहां पशुधन की समृद्धि होती है. ग्रामीण इस समृद्धि को संजोने और उसका सम्मान करने के लिए बटर फेस्टिवल का आयोजन करते हैं.समुद्रतल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दयारा बुग्याल में सोमवार को पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव (बटर फेस्टिवल) धूमधाम से मनाया गया। वर्षा में भी बटर फेस्टिवल का उत्साह व उल्लास कम नहीं हुआ। ग्रामीण व पर्यटकों ने विधिवत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर उन्हें दूध-मक्खन अर्पित किया। इसके बाद लोक वाद्य यंत्रों ढोल-दमाऊं की थाप पर दूध-मक्खन की होली खेल ग्रामीणों ने पारंपरिक लोक परंपराओं को जीवंत किया।दो दिनी पारंपरिक अंढूड़ी उत्सव(बटर फेस्टिवल) के लिए रविवार से ही स्थानीय ग्रामीण व पर्यटक दयारा बुग्याल पहुंचना शुरू हो गए थे। इस दौरान पहले दिन दयारा के आधार स्थल रैथल गांव से सोमेश्वर देवता की भव्य डोली यात्रा भी निकाली गई।उत्सव की क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और सदियों पुरानी परंपराओं के प्रतीक हैं। इन आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण नई पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं और देव संस्कृति से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, जो सराहनीय है। आयोजन समिति अध्यक्ष मनोज राणा ने बताया कि पंचगांई क्षेत्र के आराध्य सोमेश्वर देवता के पूजा-अर्चना के साथ ग्रीष्मकाल में बुग्यालों में चरने वाले दुधारू पशुओं की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने देवी-देवताओं व आछरी-मांतरियों का आभार जताया।इसके बाद राधा-कृष्ण रूप में सजे कलाकाराें ने जैसे ही मक्खन से भरी हांडी फोड़ी तो दूध-मक्खन की होली का आगाज हो गया। सुबह दस बजे से लेकर दोपहर बाद तक वर्षा के बीच हाथी घोड़ा-पालकी, जय कन्हैया लाल की के जयकारों के साथ ग्रामीण व पर्यटकों ने एक-दूजे पर दूध, दही व मक्खन लगाकर बटर फेस्टिवल मनाया।पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने राधा-कृष्ण के रूप में सजे कलाकारों के साथ यहां रासो-तांदी नृत्य कर समां बांध दिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष ने कहा कि यह फेस्टिवल अब भव्य रूप लेता जा रहा है, जिसका पर्यटकों को बेसब्री से इंतजार रहता है।दोनों पट्टियों के ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में बैड़थात पहुंचे, श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य हुण देवता और नागराज देवता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान देवताओं को दूध और दही से स्नान कराया गया तथा क्षेत्र में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।सेमेश्वर देवता की डोली के साथ ग्रामीणों की आस्था का नजारा दयारा बुग्याल में देखने को मिला। बारिश और ऊंचाई के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उत्सव में शामिल हुए। ग्रामीणों ने देवता की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।दयारा बुग्याल के विकास को लेकर अत्यधिक चिंतित हैं. सरकार द्वारा दयारा बुग्याल तक रोपवे सहित अन्य आधारभूत सुविधाएं जुटाने के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं. इस प्रकार बटर फेस्टिवल न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व है, बल्कि यह क्षेत्रीय विकास और पर्यटन को भी बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन है.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











