• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

नए जिलों के गठन की मांग को पूरा नहीं कर पाई सरकार!

06/05/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
4
SHARES
5
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखंड राज्य में नए जिलों के गठन की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति उत्तराखंड ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है. समिति के पदाधिकारियों ने चेताया कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो उन्हें आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. समिति के संयोजक ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में विकास की गति को बेहतर बनाने के लिए, राज्य से पलायन रोकने के लिये व बेरोजगारों को रोजगार प्रदान किए जाने के लिए ग्यारह और नए जिले बनने बेहद जरूरी हैं.उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों को नए जिलों के रूप में गठित करने की मांग को लेकर प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि उत्तराखंड में नए जिले न बनने के कारण ढेर सारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं. इन्हीं समस्याओं का समाधान करने के लिए ही ग्यारह और नए जिले बनने चाहिए और सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए एक अभियान तेजी के साथ चलाया जाएगा. समिति के अनुसार, राज्य के कई दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आज भी विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है. प्रशासनिक दूरी और संसाधनों के असमान वितरण के कारण आम जनता को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.समिति का कहना है कि यदि नए जिलों का गठन किया जाता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी सुविधाएं भी आम जनता तक आसानी से पहुंच सकेगी.साथ ही स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नए जिलों में उत्तरकाशी से पुरोला, नौगांव, मोरी क्षेत्र, टिहरी से नरेंद्र नगर,प्रतापनगर; पौड़ी से कोटद्वार,बीरोंखाल; चमोली जनपद से गैरसैंण, नैनीताल से हल्द्वानी,रामनगर के साथ ही हरिद्वार से रुड़की, देहरादून ज़िले से विकासनगर,चकराता, अल्मोड़ा से रानीखेत, पिथौरागढ़ से डीडीहाट तथा उधमसिंहनगर से काशीपुर, गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र शामिल हैं. समिति के संयोजक ने यह भी कहा कि नए जिलों के गठन से युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा. विकास कार्यों के सही ढंग से संचालन और आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से छोटी प्रशासनिक इकाइयां महत्वपूर्ण होती हैं, लेकिन यह भी सही है कि नए जिलों या प्रशासनिक इकाइयों के गठन का मतलब गैर योजनागत बजट में भारी इजाफा होना भी है। ऐसे में यह आवश्यक है कि नए जिलों के गठन से पहले इनका तथ्यपरक आकलन करा लिया जाए और फिर वित्तीय हालत समेत अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाए। प्रशासनिक लिहाज से देखें तो उत्तराखंड में दो मंडल, 13 जिले, 110 तहसीलें, 18 उप तहसीलें अस्तित्व में हैं।हालांकि विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए नए जिलों के गठन की मांग राज्य गठन के बाद से ही उठती रही है। वर्ष 2011 में इस मांग ने जोर पकड़ा और तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेश में चार नए जिलों कोटद्वार (पौड़ी), यमुनोत्री (उत्तरकाशी), रानीखेत (अल्मोड़ा) और डीडीहाट (पिथौरागढ़) के गठन की घोषणा की। इसके बाद सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और फिर दिसंबर 2011 को तत्कालीन सरकार ने जिलों के गठन का शासनादेश जारी किया, लेकिन विधानसभा चुनाव के कारण मसला लटक गया। वर्ष 2012 के चुनाव में सत्ता कांग्रेस के हाथों में आई तो जिलों का मसला ठंडे बस्ते में चला गया।उत्तराखंड में नए जिलों के गठन की मांग पिछले लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार इस मांग को पूरा नहीं कर पाई है। हर विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में राजनीतिक दल नए जिलों के गठन का वायदा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने पर वे इसे भूल जाते हैं। 25 वर्षों में राज्य में एक भी नए जिले का गठन नहीं हो पाया है।नए जिलों के गठन की मांग के पीछे की मुख्य वजह ये है कि प्रदेश के 10 पर्वतीय जिलों में विकास और मूल भूत जरूरतों की अलग-अलग मांग रही है। इसे देखते हुए राज्य गठन के दौरान ही छोटी-छोटी इकाइयां बनाने की मांग की गई, जिससे न सिर्फ प्रशासनिक ढांचा जन-जन तक पहुंच सके, बल्कि प्रदेश के विकास की अवधारणा के सपने को भी साकार किया जा सके। दरअसल, सूबे में कोटद्वार समेत रानीखेत, प्रतापनगर, नरेंद्रनगर, चकराता, डीडीहाट, खटीमा, रुड़की और पुरोला ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें जिला बनाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है। कई सामाजिक संगठनों के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी इस आवाज को समय-समय पर बुलंद किया है। वर्ष 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चार नए जिले बनाने की घोषणा की थी।उन्होंने गढ़वाल मंडल में 2 जिले (कोटद्वार, यमुनोत्री) और कुमाऊं मंडल में 2 जिले (रानीखेत, डीडीहाट) बनाने की बात कही थी। चुनावी साल में हुई इस घोषणा का शासनादेश भी जारी कर दिया गया था, लेकिन गजट नोटिफिकेशन नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के पद से हटते ही यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इतना ही नहीं इसके बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार आने के बाद तत्कालीन की सरकार ने इस मामले को राजस्व परिषद की अध्यक्षता में नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन संबंधी आयोग के हवाले कर दिया, लेकिन साल 2016 में मुख्यमंत्री बदलने के बाद मुख्यमंत्री सत्ता पर काबिज हुए और उन्होंने एक बार फिर 8 नए जिले बनाने की कवायद शुरू कर एक सियासी दांव खेला। साथ ही नए 8 जिलों (डीडीहाट, रानीखेत, रामनगर, काशीपुर, कोटद्वार, यमुनोत्री, रुड़की, ऋषिकेश) को बनाने का खाका भी तैयार कर लिया था, लेकिन कुछ नहीं हो पाया।उसके बाद से अभी तक नए जिले बनाए जाने की चर्चाएं हर सरकार के कार्यकाल में होती रही हैं। इस बार मुख्यमंत्री ने भी बीच में राज्य में नए जिले बनाए जाने की बात की थी, लेकिन वे इस दिशा में कुछ भी नहीं कर पाए। अपने चार वर्ष के इस कार्यकाल में धामी सरकार नए जिलों के गठन के मामले में एक कदम भी आग नहीं बढ़ी। विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले इस प्रदेश के नए जिलों के गठन का मामला हर बार सियासत की भेंट चढ़ता रहा है। सूबे में विधानसभा चुनावों के दौरान नए जिलों के गठन का वादा किया जाता रहा है। न केवल पक्ष और विपक्ष की तरफ से नए जिलों के गठन के वादे किए जाते रहे हैं, बल्कि 2022 के विधानसभा चुनाव में तो पहली बार चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी के मुखिया ने भी राज्य में 6 नए जिलों के गठन का सपना दिखाया था। उन्होंने काशीपुर को जिला बनाने के लिए सार्वजनिक घोषणा की थी तो वहीं उनकी इच्छा यमुनोत्री, कोटद्वार, रुड़की, डीडीहाट और रानीखेत को भी जिला बनाने की थी, लेकिन आम आदमी पार्टी इस चुनाव में मटियामेट हो गई और नए जिले की बात भी गायब हो गई।
उत्तराखंड राज्य स्थापना से पहले से ही प्रदेश के कुछ जिले ऐसे रहे, जिनका क्षेत्रफल बेहद ज्यादा था। इसी वजह से दूरदराज और जिला मुख्यालयों से कटे होने की वजह से कई क्षेत्रों में नए जिलों के पुनर्गठन की मांग उठी थी। इसमें खासतौर पर चमोली जिला रहा, जिसका क्षेत्रफल काफी बड़ा था। इस जिले में जिन क्षेत्रों में नए जिलों की मांग उठी, इसमें थराली, गैरसैंण और कर्णप्रयाग क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा हरिद्वार जिले में भी रुड़की के लिए मांग उठाई गई। उधर, उत्तरकाशी में यमुनोत्री, पिथौरागढ़ में डीडीहाट और पौड़ी जिले में कोटद्वार समेत उधम सिंह नगर में काशीपुर को जिला बनाए जाने की मांग उठती रही है। उत्तराखंड में नए जिलों के गठन की मांग पिछले लंबे समय से की जा रही है, लेकिन सरकार इस मांग को पूरा नहीं कर पाई है। हर विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में राजनीतिक दल नए जिलों के गठन का वायदा करते हैं, लेकिन सत्ता में आने पर वे इसे भूल जाते हैं। 25 वर्षों में राज्य में एक भी नए जिले का गठन नहीं हो पाया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने जिलों का गठन न होने के लिए एक-दूसरे पर दोषारोपण किया, मगर यह भी सही है कि दोनों ने ही अब तक जिलों के मसले को खास तवज्जो नहीं दी है। हालांकि सरकार ने इस विषय पर विचार की बात कही है। इसे लेकर वह क्या कदम उठाती है यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है। अलबत्ता पिछले अनुभवों को देखते हुए यह साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव में जिलों का मसला फिर से गूंजेगा। जिलों का सपना या रहेगा सिर्फ ज़ुमला?लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

Share2SendTweet1
Previous Post

मंत्री गणेश जोशी ने यूनियन बैंक के मध्यम से डिजिटल भुगतान प्रणाली (सीबीडीसी) के अनुदान वितरण प्रक्रिया का किया शुभारम्भ

Related Posts

उत्तराखंड

मंत्री गणेश जोशी ने यूनियन बैंक के मध्यम से डिजिटल भुगतान प्रणाली (सीबीडीसी) के अनुदान वितरण प्रक्रिया का किया शुभारम्भ

May 5, 2026
13
उत्तराखंड

राइंका जौरासी में असामाजिक तत्वों ने की तोड़फोड़, पुलिस में शिकायत दर्ज कराई

May 5, 2026
84
उत्तराखंड

उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र

May 5, 2026
9
उत्तराखंड

श्रीलंका के सिविल सर्वेंट्स ने एसडीआरएफ मुख्यालय में किया अध्ययन भ्रमण

May 4, 2026
21
उत्तराखंड

डोईवाला: घीसरपड़ी क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग के लिए सिंचाई नहर को किया ध्वस्त

May 4, 2026
56
उत्तराखंड

पश्चिम बंगाल एवं असम में भाजपा जनता पार्टी के प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज करने पर देवाल के भाजपाइयों ने विजय जुलूस निकाल कर जश्न मनाया

May 4, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67682 shares
    Share 27073 Tweet 16921
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38052 shares
    Share 15221 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37442 shares
    Share 14977 Tweet 9361
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

नए जिलों के गठन की मांग को पूरा नहीं कर पाई सरकार!

May 6, 2026

मंत्री गणेश जोशी ने यूनियन बैंक के मध्यम से डिजिटल भुगतान प्रणाली (सीबीडीसी) के अनुदान वितरण प्रक्रिया का किया शुभारम्भ

May 5, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.