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दिव्यांग छात्रों के लिए रिसर्च सेंटर की कवायद राज्य सरकार से नहीं हो रहा समन्वय

18/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान का उत्तराखंड में रिसर्च सेंटर से जुड़ा सपना फिलहाल पूरा होता नजर नहीं आ रहा है. यह स्थिति भारत सरकार के इस संस्थान और उत्तराखंड सरकार के बीच समन्वय ना होने के कारण बनी हुई है. खास बात यह है कि इसको लेकर पूर्व में एक बार बातचीत हो चुकी है लेकिन उसे पर बात आगे नहीं बढ़ पाई है.दरअसल प्रदेश में दूर दराज क्षेत्र के दिव्यांगजनो को भी शैक्षणिक रूप से बेहतर सुविधाएं देने की मनसा के साथ राज्य के कुमाऊं क्षेत्र में रिसर्च सेंटर बनाने की कोशिशे की जा रही है। इस कड़ी में काशीपुर, रुद्रपुर या हल्द्वानी क्षेत्र में इस केंद्र को स्थापित करने की मंशा NIEPVD संस्थान की है. लेकिन जमीन और इंफ्रास्ट्रक्चर ना मिल पाने के कारण फिलहाल इस पर काम आगे नहीं बढ़ पाया है. राज्य की भौगोलिक स्थिति बेहद विषम है, ऐसे में पर्वतीय क्षेत्र के दिव्यांग छात्रों का देहरादून या दूसरे क्षेत्रों में शैक्षणिक कार्यों के लिए आना काफी मुश्किल होता है इसी बात को समझते हुए कुमाऊं के कुछ शहरों में से किसी एक में कंपोजिट रिसर्च सेंटर खोलने की इच्छा जताई गई है. इस रिसर्च सेंटर में किसी भी श्रेणी के दिव्यांगजन को हर तरह की सुविधा दी जाएगी.उनके शैक्षणिक कार्य से लेकर उन्हें इक्विपमेंट दिए जाने तक का भी इस केंद्र में काम हो सकेगा. यही नहीं दिव्यांगजन छात्रों की काउंसलिंग तक भी इस रिसर्च सेंटर में हो सकेगी. इस मामले में फिलहाल संस्थान के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो पा रही है. हालांकि यह मामला समाज कल्याण से जुड़ा हुआ है, लेकिन अल्पसंख्यक विभाग ने इसमें गंभीरता दिखाकर हर तरह की मदद करने की बात कही है.दरअसल अल्पसंख्यक विभाग की रुद्रपुर में जमीन मौजूद है, जिस पर निर्माण कार्य भी किया गया है. फिलहाल इस जमीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है और इसलिए NIEPVD के निदेशक ने अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव से भी बात की है. इस मामले में अल्पसंख्यक विभाग के विशेष सचिव से बात करते हुए कहा कि इस मामले में संस्थान के निदेशक ने संपर्क किया है और किसी भी तरह की मदद के लिए विभाग तैयार है. स्कॉलरशिप लैपटॉप और ब्रेल टीचर समेत लगभग 27 मांगों को लेकर एजुकेशन हब देहरादून के राजपुर रोड स्थित एनआईईपीवीडी यानी राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांग सशक्तिकरण संस्थान के स्कूली छात्र पिछले कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे. संस्थान की स्वीकृति के बाद छात्रों ने अपनी स्ट्राइक रोक दी है. सामान्य छात्रों से अलग दृष्टिबाधित छात्र-छात्राओं के लिए कई तरह की सुविधाओं की जरूरत होती है. बता दें कि इस संस्थान की प्रिंसिपल मंजू हैं.हालांकि संस्थान में शिक्षा के साथ-साथ स्पोर्ट्स और स्किल डेवलपमेंट के लिए कई एक्टिविटीज करवाई जाती है, लेकिन स्कॉलरशिप, लैपटॉप और ब्रेल जैसी कई सुविधाओं के लिए दृष्टि बाधित छात्र-छात्राओं ने लगभग 10 दिन पहले स्ट्राइक शुरू की थी. संस्थान द्वारा उपलब्ध कराई गई मांगों पर कार्रवाई के बाद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया. हालांकि स्टूडेंट्स अब अपनी कक्षा में लौट गए हैं और अब भी छात्र सरकार से इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं. आज के समय में डिजटलीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है. हम भी इससे जुड़ना चाहते हैं और स्वतंत्र रूप से हम अपना पेपर कर सकें, इसके लिए हम लैपटॉप की मांग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि हमने ऑडिटोरियम, फुटबॉल ग्राउंड और विषयों के सुधारीकरण, शिक्षकों और स्टाफ की पर्याप्त मात्रा में करने को लेकर हमारा आंदोलन है और अब भी हम दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से अपील करते हैं उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए देहरादून या अन्य मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुमाऊं क्षेत्र में रिसर्च सेंटर खोलने की पहल की जा रही है।इस प्रस्तावित केंद्र में विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांगजनों के लिए एक ही स्थान पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें शैक्षणिक सहायता, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे दिव्यांग छात्रों और उनके परिवारों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। कि वह हमारी मांगों का संज्ञान लें, संस्थान के कार्यवाहक निदेशक ने बताया कि बच्चों की जो मांगे थी. संस्थान प्रशासन की ओर से वार्ता करने के बाद उन्हें मान लिया गया है. इनमें से कुछ ऐसी मांगे थी, जिसका निवारण संस्थान अपनी तरफ से कर सकता था, उस पर हम काम कर रहे हैं और अन्य जो मांगे जिन्हें मिनिस्ट्री में भेजा गया है, क्योंकि आर्थिक और प्रशासनिक तौर पर केंद्र सरकार की ओर से ही इन पर काम किया जा सकता है.उन्होंने बताया कि हम मामला सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं और मामला सुधर भी गया है. उन्होंने कहा कि बच्चों की लैपटॉप की मांग पर खरीदारी की प्रक्रिया चल रही है. स्कॉलरशिप और ब्रेल पढ़ने के लिए डिजिटल टीचर की जरूरत थी, उन्हें उपलब्ध करवा दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि ऑडिटोरियम और फुटबॉल ग्राउंड जैसी कंस्ट्रक्शन के प्रस्ताव उन्होंने मिनिस्ट्री में भेज दिए हैं, जिन पर काम होगा, उन्हें उम्मीद है. NIEPVD का प्रस्ताव अमल में आने पर कुमाऊं समेत पर्वतीय क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शिक्षा, उपकरण, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। अब इस योजना की प्रगति काफी हद तक राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग छात्रों के लिए देहरादून या अन्य मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुमाऊं क्षेत्र में रिसर्च सेंटर खोलने की पहल की जा रही है।इस प्रस्तावित केंद्र में विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांगजनों के लिए एक ही स्थान पर कई सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें शैक्षणिक सहायता, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराना, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इससे दिव्यांग छात्रों और उनके परिवारों को स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।  प्रस्ताव अमल में आने पर कुमाऊं समेत पर्वतीय क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शिक्षा, उपकरण, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। अब इस योजना की प्रगति काफी हद तक राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर है।  प्रस्ताव अमल में आने पर कुमाऊं समेत पर्वतीय क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को शिक्षा, उपकरण, प्रशिक्षण और काउंसलिंग जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकेंगी। अब इस योजना की प्रगति काफी हद तक राज्य सरकार की ओर से जमीन उपलब्ध कराने और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर है।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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