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सभी को कक्षा 5 तक मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध करायी जायेगी: धन सिंह रावत

उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य

16/11/22
in उत्तराखंड, देहरादून
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उत्तराखण्ड राज्य स्तरीय संगीत प्रतिभा सम्मान समारोह 2022-23 का आयोजन एस.सी.ई.आर.टी. द्वारा नगर निगम, देहरादून के टाउन हॉल में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विशिष्ट अतिथि सुप्रसिद्ध सिने अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी एवं आर. जे. काव्य द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया। डॉ. ऊषा कटियार ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस अवसर पर मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। जहाँ पर बच्चों की प्रारम्भिक शिक्षा हेतु बालवाटिका के माध्यम से बच्चे की मातृभाषाओं में स्थानीय इतिहास, भूगोल, समाज-संस्कृति की जानकारी दी जायगी। सभी को कक्षा 5 तक मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध करायी जायेगी। हर जिले में संस्कृत ग्राम बनाये जायेंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाना, टी.बी. मुक्त उत्तराखण्ड, गंगा की स्वच्छता और नशामुक्त उत्तराखण्ड के लिए हम कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगीत मन और आत्मा की शांति प्रदान करना है, छात्रों को इससे जुड़ना चाहिए।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं प्रसिद्ध रंगकर्मी श्रीमती हिमानी शिवपुरी ने समारोह में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इसी टाउन हॉल में मैंने अपने कैरियर की शुरुआत की। रंगमंच के लिए मेरा प्रेम यहीं से शुरु हुआ। मैं आभारी हूँ इस धरती का कि यहां से मैंने जो कार्य प्रारम्भ किया उसके कारण आज लोग मुझे जानने लगे हैं।टाउन हॉल के मंच को चूमते हुए वे अत्यन्त भावुक हो गयी। उन्होंने इस अवसर पर संगीत प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रहे सभी बच्चों/शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतियोगिता में जो भाग लेता है वह विजेता होता है। प्रथम, द्वितीय आना तो मात्र एक घटना और संयोग होता है।
कार्यक्रम के विशिष्टि अतिथि आर. जे. काव्य (कवीन्द्र सिंह मेहता) व्भ्व् रेडियो, उत्तराखण्ड ने प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का अर्थ केवल अधिक अंक अर्जित करना ही नहीं होता है। समाज सेवा तथा कला के विविध क्षेत्र में कुछ कर दिखाना और उसकी प्रेरणा प्राप्त करना भी शिक्षा है। सिर्फ नम्बरों के पीछे नहीं पड़ना चाहिए। जीवन के दूसरे क्षेत्र में भी प्रतिभा को निखारना चाहिए। इस कार्य की शिक्षकों पर बड़ी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर उन्होंने गिर्दा का लिखा गीत ‘उत्तराखण्ड मेरी मातृभूमि, मेरी पितृभूमि’ गीत भी सुनाया।
एस.सी.ई.आर.टी. के पाठ्यक्रम शोध एवं विकास विभाग के विभागाध्यक्ष श्री प्रदीप रावत ने इस समारोह की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए बताया कि संगीत शिक्षा विद्यालय के वातावरण को आनन्दमय बनाती है। अध्यापकों और छात्रों की इस प्रस्तुति का उद्देश्य विद्यालय के वातावरण को आनन्दमय बनाना, छात्र शिक्षकों के बीच मधुर सम्बन्ध स्थापित करना, शिक्षकों विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करना है ताकि उनका सर्वांगीण विकास हो सके। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम स्कूल स्तर, ब्लॉक स्तर, जिला स्तर के बाद राज्य स्तर पर आयोजित किया जा रहा है।
इससे पूर्व निदेशक, अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण उत्तराखण्ड श्रीमती सीमा जौनसारी ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम को हम विगत तीन वर्षों से कर रहे हैं। इस बार इसमें हमने बच्चों को भी जोड़ा। इसका उद्देश्य है कि शिक्षक अधिक से अपने ज्ञान और प्रतिभा को विद्यार्थियों को स्थानान्तरित कर सकें।
डॉ. आर.डी. शर्मा, अपर निदेशक, एस.सी.ई.आर.टी. द्वारा अतिथियों का धन्यवाद और आभार ज्ञापित करते हुए कहा कि अतिथियों की उपस्थिति से शिक्षकों और विद्यार्थियों को  प्रोत्साहन मिला। यह प्रतिभाओं को तराशने के लिए जरूरी है।
समारोह के प्रथम दिवस शास्त्रीय गायन में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सर्वप्रथम शास्त्रीय गायन में रा.इ.का. भरैसा, भीमताल के शिक्षक डॉ. हरीश जोशी ने मेघ मल्हार ‘गरजे घटा घन, आई बरखा झूम-झूम के, पवन चलत सनन सनन सन’ गाया। रा.इ.का. हल्द्वानी की शिक्षिक श्रीमती डिम्पल जोशी ने भिटौली लोकगीत प्रस्तुत किया-‘चैतू कू म्हेण ए रे, भिटुली की आश है रे,आई गै तो ऋतु रैण रे, आई गै छो चैत मैणा रे।’
शास्त्रीय गीत प्रतियोगिता के दूसरे प्रतिभागी रा.इ.का. रुद्रप्रयाग की शोभा डोभाल ने राग विहाग प्रस्तुत किया- ”क्यों तुम रुठ गये मनमोहन, कौन सी भूल भई है मोसे“ एम.के.पी. की शिक्षिका, सीमा रस्तोगी ने राग विलास खाली तोड़ी प्रस्तुत किया- ”हमें ना सिखाओ ये ज्ञान“। रा.बा.इ.का. कनालीछीना की हर्षिता पुनेठा ने राग शुद्ध सारंग गाया जबकि रा.इ.का. जयहरीखाल के शिक्षक दिनेश चन्द्र पाठक ने राग कल्याण में छोटा खयाल गाया। अटल उत्कृष्ट  रा.इ.का. चम्पावत की लीला तिवारी ने राग भोपाली प्रस्तुत किया-‘नमन कर चतुर। श्री गुरु चरण जोई-जोई ध्यावत, शुभफल पावत’। श्रीमती कंचन मल्होत्रा ने ”करम करने मोये साई, तुम बिन और दूजा नाहीं“ गाया। रा.इ.का. देवाल के हिमांशु पंत ने राग हमीर में छोटा ख्याल प्रस्तुत किया- ”नमन करूं में गुरु चरणा, भवभय हरणा, वंदित चरणा। मीनाक्षी उप्रेती, रा.आ. बा.इ.का. रानीखेत, अल्मोड़ा ने राग मिंया मल्हार/ध्रुपद गायन प्रस्तुत किया-“चमकत घन श्याम बीच, चमक तीज रीझ रीझ“। श्रीमती सविता जोशी/रा.इ.का. बागेश्वर ने राग वृन्दावनी सारंग प्रस्तुत किया- ”मधुर धुन बाजी, बाजे रे कित“। ललित मोहन जोशी, रा.गां.न.वि. खटीमा ने राग भैरवी गाया- जागो मोहन प्यारे-प्यारे सांवर सूरति ….“।
दूसरे सत्र में लोक गायन प्रस्तुत किया गया। जिसमें डॉ. ज्ञान सागर रा.उ.मा.वि. कनपोलाखाल टिहरी गढ़वाल ने संस्कार गीत- ”दैणा होयां रब्बोली का गणेश देणा होया मोरी का नारैण है“ गाया। धर्मेन्द्र सिंह चौहान, रा.उ.मा.वि. आन्तरखोली, थलीसैंण, पौड़ी ने थड्या चौंफला गीत गाया- ”को होलो धौलिका का किनारा घुघरू यात्रा ज्वोंगो वालू बैख“। श्रीमती पुष्पा कनवासी रा.बा.इ.का. नारायणबगड़ ने नंदा गीत प्रस्तुत किया- ”कै देव चढ़ोला, मासी को धूप, द्यो थान एग्ये। जै नंदा भवानी, माझी को धप इसे बान ऐग्यै।“ श्री मुकेश चन्द्र नौटियाल रा.आ.इ.का. चिन्याली सौड़, उत्तरकाशी ने आह्वान गीत- ”जै बदरी केदारनाथ, गंगोत्री जै-जै, यमनोत्री जै-जै’’ गीत गाया। श्री मनोज थापा रा.इ.का. रुद्रप्रयाग ने राधाखण्डी शैली का गीत ‘‘जैन रची सकल संसार…. गाया’’। कालिका प्रसाद सेमवाल, रा.इ.का. बद्रीपुर देहरादून ने ‘‘सात समुन्दर पार च जाण ब्वे’’ गाया। डॉ. रमा खर्कवाल भट्ट, रा.बा.इ.का. पिथौरागढ़ ने यज्ञोपवीत में गाया जाने वाला गीत- ‘‘बोल सगुन दे भला-भला दिन….’’ गाया। श्री दीवान सिंह कोश्यारी, रा.इ.का. चेताबगड़, बागेश्वर द्वारा चांचरी में गायन किया। श्री नारायण कुमार, रा.उ.मा.वि. पंतकवाली, बागेश्वर ने ‘‘रूम झूमा बरखा लागी…’’ गीत गाया। श्रीमती मिताली भट्ट, रा.इ.का. काकड़, चम्पावत ने ‘दैणा हवे जाये खोली का गणेश’ तथा श्री अंकित पाण्डे, रा.इ.का. किच्छा, उधमसिंह नगर ने ‘छाजा में बैठी समधन पूछे…’ गीत गाया।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों के मूल्यांकन हेतु श्रीमती सोनल वर्मा, डॉ. विजय गोडबोले एवं डॉ. राकेश भट्ट निर्णायक मंण्डल के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संगतकार के रूप में तबले पर विक्रम सिंह, रा.इ.का. कण्डारा, पौड़ी तथा ढोलक पर संस्कृति विभाग के मोहित पंत ने साथ दिया।
शिक्षक/शिक्षिकाओं एवं छात्र-छात्राओं की दो दिवसीय संगीत प्रतियोगिता एस.सी.इ.आर.टी. द्वारा प्रस्तुत की जा रही है। इसमें शिक्षकों के लिए शास्त्रीय संगीत गायन में बड़ा ख्याल, छोटा ख्याल, तराना, ध्रुपद, धमार, ठुमरी, दादरा, लोकगायन में उत्तराखण्ड का लोक संगीत गायन एवं संस्कार गीत, शास्त्रीय नृत्य में समस्त भारतीय शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य में उत्तराखण्ड के समस्त लोक नृत्यों की प्रतियोगिताएं रखी हैं। विद्यार्थियों हेतु सेमी क्लासिकल (उप शास्त्रीय नृत्य) प्रतियोगिता रखी है।
कार्यक्रम में सीमैट, उत्तराखण्ड से श्री दिनेश चन्द्र गौड़, अपर निदेशक, श्री आकाश सारस्वत, उप निदेशक एवं डायट देहरादून से प्राचार्य श्री राकेश जुगरान जी तथा एस.सी.ई.आर.टी. उत्तराखण्ड से श्रीमती आशारानी पैन्यूली, संयुक्त निदेशक, श्री राय सिंह रावत, उप निदेशक, श्रीमती हिमानी बिष्ट, उप निदेशक, श्री शैलेन्द्र अमोली, उप निदेशक, श्रीमती अनीता द्विवेदी, सहायक निदेशक, श्री सोहन सिंह नेगी, डॉ. शक्ति प्रसाद सेमल्टी, डॉ. संजीव चेतन, श्रीमती गंगा घुघत्याल, डॉ. शिवानी चन्देल, श्री देवराज राणा, श्री दिनेश चन्द्र चौहान, डॉ. बिन्दु नौटियाल, श्री रविदर्शन तोपाल, श्रीमती शुभ्रा सिंघल, श्री मनोज किशोर बहुगुणा, श्रीमती सुनीता उनियाल, श्री राज कुमार उपस्थित थे। रा.गां.न.वि. देहरादून से बृजेश शाह व रा.उ.मा. वि. शेरगढ़ से प्रधानाध्यापक डॉ. एन. के. हटवाल तथा अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन से श्री अम्बरीश बिष्ट भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन  डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और डॉ. ऊषा कटियार द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
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