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विश्व में बड़ी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक नेपाल, भारत दूसरे नंबर पर

30/12/19
in उत्तराखंड, हेल्थ
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
बड़ी इलायची के सुखाये हुए फल और बीज भारतीय तथा अन्य देशों के व्यंजनों में मसाले के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इसे काली इलायची, भूरी इलायची, लाल इलायची, नेपाली इलायची या बंगाल इलायची इसके बीजों में से कपूर की तरह की खुशबू आती है और थोड़ा धूंये का सा स्वाद आता है, जो उसके सुखाने के तरीके से आता है। बड़ी इलायची का नाम संस्कृत में एला, काता इत्यादि मराठी में वेलदोड़े, गुजराती में मोटी एलची तथा लैटिन में ऐमोमम कार्डामोमम है। इसके वृक्ष से पाँच फुट तक ऊँचे भारत तथा नेपाल के पहाड़ी प्रदेशों में होते हैं। फल तिकोने, गहरे कत्थई रंग के और लगभग आधा इंच लंबे तथा बीज छोटी इलायची से कुछ बड़े होते हैं। आयुर्वेद तथा यूनानी उपचार में इसके बीजों के लगभग वे ही गुण कहे गए हैं जो छोटी इलायची के बीजों के। परंतु बड़ी इलायची छोटी से कम स्वादिष्ट होती इसके सुखाए गई फलियाँ मसाले के रूप में छोटी इलायची की ही तरह इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन जहाँ छोटी इलायची का इस्तेमाल मीठे पकवानों में भी किया जाता है, वहीं बड़ी इलायची आमतौर पर अपनी ख़ुशबू और स्वाद के कारण नमकीन व्यंजनों में ही इस्तेमाल की जाती है। खुली आग में सुखाने के परम्परागत तरीक़े की वजह से इसमें अनूठा धूंये का स्वाद आता है। एसुबुलेटम की फलियाँ दोनों में से छोटी होती हैं और भारतीय तथा पाकिस्तानी व्यंजनों में इस्तेमाल की जाती हैं जबकि एकॉस्टेटम की बड़ी फलियाँ चीनी व्यंजनों में पड़ती हैं। भारत और पाकिस्तान में इसका पुलाव इत्यादि बनाने में काफ़ी इस्तेमाल किया जाता है। मुग़लई व्यंजनों में भी इसका प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल होता है। गरम मसाले में भी यह एक अहम सामग्री है।
पारंपरिक मसालेदार चाय के मसाले में भी इसे इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी इलायची का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक नेपाल है और उसके बाद क्रमशः भारत और भूटान हैं। इलायची की बीज से निकले वाले तेल की गिनती सबसे प्रभवशाली सुगंधित तेल में होती है और सुगंध.चिकित्सा अरोमाथेरेपी में इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। इलायची का इस्तेमाल आप बेहतर स्वास्थ और अपने बालों को चमकीला बनाने के साथ.साथ कई रूपों में कर सकते हैं। बडी इलायची स्वास्थ, त्वचा और बालों के लिए किस तरह से फायदेमंद है। इलायची का गैस्ट्रो.इंटेस्टाइनल की कार्य प्रणाली पर बहुत ज्यादा साकारात्मक असर होता है। अपने गुणों के कारण इलायची गैस्ट्रिक और इंटेस्टाइनल ग्लांड को उत्तेजित कर जरूरी द्रव्य के स्राव में मदद करता है। साथ ही यह द्रव्य के स्राव की प्रक्रिया को भी दुरुस्त रखता है, ताकि पेट के मौजूद एसिड को नियंत्रण में रखा जा सके। इससे गैस्ट्रिक अल्सर या दूसरे पाचन संबधी बीमारियों का खतरा काफी कम जो जाता है। काली इलायची हृदय के स्वास्थ को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। कार्डिक रिदम को नियंत्रित करना इसका सबसे बड़ा फायदा हैए जिससे ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहता है। अगर आप नियमित रूप से काली इलायची का सेवन करेंगे तो आपका हृदय स्वस्थ बना रहेगा। यह खून के जमने की संभावना को काफी कम कर देता है। सांस अगर आप सांस संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो काली इलायची से आपको काफी फायदा पहुंच सकता है। इसके जरिए अस्थमा, कुकुर खांसी, फेफड़ा संकुचन, फेफड़े की सूजन और तपेदिक जैसे सांसों से संबंधित बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। काली इलायची के जरिए दांतों की कई समस्याओंए जैसे दांतों और मसूड़ों में संक्रमण से छुटकारा मिल सकता है। इसके अलावा इसके जरिए सांसों की दुर्गंध से भी निजात मिलता है। काली इलाचली एक बेहतरीन डाइयूरेटिक भी है। इससे न सिर्फ यूरीनेशन सही रहता हैए बल्कि यह गुर्दे से संबंधित बीमारियों को भी दूर रखता है। ऐसे दो तरह के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो ब्रेस्ट, कोलोन और ओवेरियन कैंसर को रोकते हैं। काली इलायची में एंटी कार्सिनजेनिक गुण होने के कारण शरीर में ग्लूटाथियोन एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट, की मात्रा भी बढ़ जाती है। इससे कैंसर से ग्रस्त सेल का निर्माण और विकास रुक जाता है। इचायची शरीर के लिए एक बेहतरीन डिटॉक्सीफायर भी है। इसमें शरीर से कैफीन निकालने की क्षमता होती है, जिससे तो यह तुरंत आराम दिलाता है।
इससे तैयार किए जाने वाले सुगंधित तेल का इस्तेमाल भी तनाव और थकान दूर करने के लिए किया जाता है काली इलायची 14 तरह के जीवाणु को नष्ट कर सकती है। इसलिए इसे खाने से न सिर्फ इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता हैए बल्कि शरीर बैक्टीरिया और वाइरल इंफेक्शन से भी सुरक्षित रहता है। काली इलायची एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और जरूरी खनिज पोटैशियम से भरी होती है। इसे नियमित खाने से शरीर टॉक्सिक से मुक्त रहता है, जिससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और शरीर स्वस्थ रहता है। एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण काली इलायची का इस्तेमाल स्किन एलर्जी के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में होता है। काली इलायची में एंटी.ऑक्सीडेटिव गुण पाया जाता है, जिससे यह सिर के खाल में पोषण प्रदान करती है और बालों को मजबूत बनाती है। साथ ही आपके बाल घनेए मजबूत और चमकीले भी हो जाएंगे। चूंकि काली इलायची में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता हैए जिससे यह सिर के खाल में इंफेक्शन होने पर औषधि का काम करता है। काली इलायची भीषण गर्मी में लू लगने से भी बचाता है। ऊखीमठ ब्लॉक के एक गरीब गांव पेलिंग के नेगी ने अपनी कर्मठता से गरीबी के दाग को धो डाला है। नेगी की कोशिश है कि अन्य गांववाले भी उनकी तरह बड़ी इलायची की खेती में रमें तो गांव की तस्वीर बदल कर सकती है।
पिछले साल उन्होंने 3 लाख रुपये के इलायची के पौधे बेचे। इस साल एक लाख पौधे बिकने के लिए तैयार हैं। जगत सिंह 60 कहते हैं, पहले मैं सब्जी उगाता था लेकिन इससे रोजी.रोटी तो चल जाती थी पर आर्थिक हालत नहीं सुधरी। सन् 2000 में भेषज संघ वालों ने इलायची की खेती शुरू करने को प्रेरित किया तो वह इस काम में जुट गए। शुरुआत 5 हजार पौधों से की। लेकिन बड़ा झटका लगा, जब आधे पौधे सड़ गए। इसके बावजूद जगत ने हार नहीं मानी। अब उनकी नर्सरी में बिक्री के लिए एक लाख पौधे तैयार हैं। एक पौधा पांच रुपए का बिकता है। इस हिसाब से जगत सिंह इस साल पांच लाख के पौधे बेचेंगे। इस आमदनी के दम पर उनका बेटा देहरादून में उच्च शिक्षा ले रहा है और बिटिया की शादी कर चुके हैं। नर्सरी के पास एक मकान भी बना लिया है। जगत सिंह जिले के एकमात्र किसान हैं, जिन्होंने बड़ी इलाइची की नर्सरी का उल्लेखनीय काम किया है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भी इसकी खेती की अपार संभावनाएं हैं।
यहां 1000 से 4500 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दल.दल और नमी वाली जगहों पर इसकी अच्छी खेती हो सकती है। थलीसैंण ब्लॉक में बुंगीधार क्षेत्र में आने वाले कांडई गांव के प्रगतिशील किसान बचीराम ढौडियालए पौड़ी ब्लाक के खरकोटा गांव निवासी मातवर सिंहए उनियाल गांव निवासी फरसराम समेत कुछ काश्तकार इसकी खेती भी कर रहे हैं।
प्रगतिशील काश्तकार बचीराम ढौडियाल तो पिछले साल से इसकी खेती कर रहे हैं। इसकी खेती से हर साल चार से पांच लाख से अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। वह इसके पौधे भी बेच रहे हैं। खरकोटा के मातवर सिंह ने भी अपने खेतों में इसके सैकड़ों पौधे लगाए हुए हैं।
इसकी फसल की बड़ी विशेषता यह है कि इसकी पौध को खेत में सिर्फ एक बार लगाना पड़ता है जो इसके बाद पौधे खुद फैलने लगते हैं। वर्तमान में बाजार में यह 2200 से 2500 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा थे है बड़ी इलायची के की अपार संभावनाएं हैंण् पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य दोनों को ही लाभ होगा। उत्तराखण्ड के लिए सुखद ही होगा किया जाता है तो यदि रोजगार से जोड़े तो अगर ढांचागत अवस्थापना के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो यह पलायन रोकने में कारगर होगी उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य फसल उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती है।

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