• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

विश्व में बड़ी इलायची का सबसे बड़ा उत्पादक नेपाल, भारत दूसरे नंबर पर

30/12/19
in उत्तराखंड, हेल्थ
Reading Time: 1min read
797
SHARES
996
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
बड़ी इलायची के सुखाये हुए फल और बीज भारतीय तथा अन्य देशों के व्यंजनों में मसाले के रूप में इस्तेमाल की जाती है। इसे काली इलायची, भूरी इलायची, लाल इलायची, नेपाली इलायची या बंगाल इलायची इसके बीजों में से कपूर की तरह की खुशबू आती है और थोड़ा धूंये का सा स्वाद आता है, जो उसके सुखाने के तरीके से आता है। बड़ी इलायची का नाम संस्कृत में एला, काता इत्यादि मराठी में वेलदोड़े, गुजराती में मोटी एलची तथा लैटिन में ऐमोमम कार्डामोमम है। इसके वृक्ष से पाँच फुट तक ऊँचे भारत तथा नेपाल के पहाड़ी प्रदेशों में होते हैं। फल तिकोने, गहरे कत्थई रंग के और लगभग आधा इंच लंबे तथा बीज छोटी इलायची से कुछ बड़े होते हैं। आयुर्वेद तथा यूनानी उपचार में इसके बीजों के लगभग वे ही गुण कहे गए हैं जो छोटी इलायची के बीजों के। परंतु बड़ी इलायची छोटी से कम स्वादिष्ट होती इसके सुखाए गई फलियाँ मसाले के रूप में छोटी इलायची की ही तरह इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन जहाँ छोटी इलायची का इस्तेमाल मीठे पकवानों में भी किया जाता है, वहीं बड़ी इलायची आमतौर पर अपनी ख़ुशबू और स्वाद के कारण नमकीन व्यंजनों में ही इस्तेमाल की जाती है। खुली आग में सुखाने के परम्परागत तरीक़े की वजह से इसमें अनूठा धूंये का स्वाद आता है। एसुबुलेटम की फलियाँ दोनों में से छोटी होती हैं और भारतीय तथा पाकिस्तानी व्यंजनों में इस्तेमाल की जाती हैं जबकि एकॉस्टेटम की बड़ी फलियाँ चीनी व्यंजनों में पड़ती हैं। भारत और पाकिस्तान में इसका पुलाव इत्यादि बनाने में काफ़ी इस्तेमाल किया जाता है। मुग़लई व्यंजनों में भी इसका प्रचुर मात्रा में इस्तेमाल होता है। गरम मसाले में भी यह एक अहम सामग्री है।
पारंपरिक मसालेदार चाय के मसाले में भी इसे इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी इलायची का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक नेपाल है और उसके बाद क्रमशः भारत और भूटान हैं। इलायची की बीज से निकले वाले तेल की गिनती सबसे प्रभवशाली सुगंधित तेल में होती है और सुगंध.चिकित्सा अरोमाथेरेपी में इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है। इलायची का इस्तेमाल आप बेहतर स्वास्थ और अपने बालों को चमकीला बनाने के साथ.साथ कई रूपों में कर सकते हैं। बडी इलायची स्वास्थ, त्वचा और बालों के लिए किस तरह से फायदेमंद है। इलायची का गैस्ट्रो.इंटेस्टाइनल की कार्य प्रणाली पर बहुत ज्यादा साकारात्मक असर होता है। अपने गुणों के कारण इलायची गैस्ट्रिक और इंटेस्टाइनल ग्लांड को उत्तेजित कर जरूरी द्रव्य के स्राव में मदद करता है। साथ ही यह द्रव्य के स्राव की प्रक्रिया को भी दुरुस्त रखता है, ताकि पेट के मौजूद एसिड को नियंत्रण में रखा जा सके। इससे गैस्ट्रिक अल्सर या दूसरे पाचन संबधी बीमारियों का खतरा काफी कम जो जाता है। काली इलायची हृदय के स्वास्थ को बेहतर बनाने में भी मदद करती है। कार्डिक रिदम को नियंत्रित करना इसका सबसे बड़ा फायदा हैए जिससे ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहता है। अगर आप नियमित रूप से काली इलायची का सेवन करेंगे तो आपका हृदय स्वस्थ बना रहेगा। यह खून के जमने की संभावना को काफी कम कर देता है। सांस अगर आप सांस संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो काली इलायची से आपको काफी फायदा पहुंच सकता है। इसके जरिए अस्थमा, कुकुर खांसी, फेफड़ा संकुचन, फेफड़े की सूजन और तपेदिक जैसे सांसों से संबंधित बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है। काली इलायची के जरिए दांतों की कई समस्याओंए जैसे दांतों और मसूड़ों में संक्रमण से छुटकारा मिल सकता है। इसके अलावा इसके जरिए सांसों की दुर्गंध से भी निजात मिलता है। काली इलाचली एक बेहतरीन डाइयूरेटिक भी है। इससे न सिर्फ यूरीनेशन सही रहता हैए बल्कि यह गुर्दे से संबंधित बीमारियों को भी दूर रखता है। ऐसे दो तरह के एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो ब्रेस्ट, कोलोन और ओवेरियन कैंसर को रोकते हैं। काली इलायची में एंटी कार्सिनजेनिक गुण होने के कारण शरीर में ग्लूटाथियोन एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट, की मात्रा भी बढ़ जाती है। इससे कैंसर से ग्रस्त सेल का निर्माण और विकास रुक जाता है। इचायची शरीर के लिए एक बेहतरीन डिटॉक्सीफायर भी है। इसमें शरीर से कैफीन निकालने की क्षमता होती है, जिससे तो यह तुरंत आराम दिलाता है।
इससे तैयार किए जाने वाले सुगंधित तेल का इस्तेमाल भी तनाव और थकान दूर करने के लिए किया जाता है काली इलायची 14 तरह के जीवाणु को नष्ट कर सकती है। इसलिए इसे खाने से न सिर्फ इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता हैए बल्कि शरीर बैक्टीरिया और वाइरल इंफेक्शन से भी सुरक्षित रहता है। काली इलायची एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन सी और जरूरी खनिज पोटैशियम से भरी होती है। इसे नियमित खाने से शरीर टॉक्सिक से मुक्त रहता है, जिससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और शरीर स्वस्थ रहता है। एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण काली इलायची का इस्तेमाल स्किन एलर्जी के लिए प्राकृतिक औषधि के रूप में होता है। काली इलायची में एंटी.ऑक्सीडेटिव गुण पाया जाता है, जिससे यह सिर के खाल में पोषण प्रदान करती है और बालों को मजबूत बनाती है। साथ ही आपके बाल घनेए मजबूत और चमकीले भी हो जाएंगे। चूंकि काली इलायची में एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण पाया जाता हैए जिससे यह सिर के खाल में इंफेक्शन होने पर औषधि का काम करता है। काली इलायची भीषण गर्मी में लू लगने से भी बचाता है। ऊखीमठ ब्लॉक के एक गरीब गांव पेलिंग के नेगी ने अपनी कर्मठता से गरीबी के दाग को धो डाला है। नेगी की कोशिश है कि अन्य गांववाले भी उनकी तरह बड़ी इलायची की खेती में रमें तो गांव की तस्वीर बदल कर सकती है।
पिछले साल उन्होंने 3 लाख रुपये के इलायची के पौधे बेचे। इस साल एक लाख पौधे बिकने के लिए तैयार हैं। जगत सिंह 60 कहते हैं, पहले मैं सब्जी उगाता था लेकिन इससे रोजी.रोटी तो चल जाती थी पर आर्थिक हालत नहीं सुधरी। सन् 2000 में भेषज संघ वालों ने इलायची की खेती शुरू करने को प्रेरित किया तो वह इस काम में जुट गए। शुरुआत 5 हजार पौधों से की। लेकिन बड़ा झटका लगा, जब आधे पौधे सड़ गए। इसके बावजूद जगत ने हार नहीं मानी। अब उनकी नर्सरी में बिक्री के लिए एक लाख पौधे तैयार हैं। एक पौधा पांच रुपए का बिकता है। इस हिसाब से जगत सिंह इस साल पांच लाख के पौधे बेचेंगे। इस आमदनी के दम पर उनका बेटा देहरादून में उच्च शिक्षा ले रहा है और बिटिया की शादी कर चुके हैं। नर्सरी के पास एक मकान भी बना लिया है। जगत सिंह जिले के एकमात्र किसान हैं, जिन्होंने बड़ी इलाइची की नर्सरी का उल्लेखनीय काम किया है। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भी इसकी खेती की अपार संभावनाएं हैं।
यहां 1000 से 4500 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दल.दल और नमी वाली जगहों पर इसकी अच्छी खेती हो सकती है। थलीसैंण ब्लॉक में बुंगीधार क्षेत्र में आने वाले कांडई गांव के प्रगतिशील किसान बचीराम ढौडियालए पौड़ी ब्लाक के खरकोटा गांव निवासी मातवर सिंहए उनियाल गांव निवासी फरसराम समेत कुछ काश्तकार इसकी खेती भी कर रहे हैं।
प्रगतिशील काश्तकार बचीराम ढौडियाल तो पिछले साल से इसकी खेती कर रहे हैं। इसकी खेती से हर साल चार से पांच लाख से अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। वह इसके पौधे भी बेच रहे हैं। खरकोटा के मातवर सिंह ने भी अपने खेतों में इसके सैकड़ों पौधे लगाए हुए हैं।
इसकी फसल की बड़ी विशेषता यह है कि इसकी पौध को खेत में सिर्फ एक बार लगाना पड़ता है जो इसके बाद पौधे खुद फैलने लगते हैं। वर्तमान में बाजार में यह 2200 से 2500 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा थे है बड़ी इलायची के की अपार संभावनाएं हैंण् पर्यावरण तथा मानव स्वास्थ्य दोनों को ही लाभ होगा। उत्तराखण्ड के लिए सुखद ही होगा किया जाता है तो यदि रोजगार से जोड़े तो अगर ढांचागत अवस्थापना के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो यह पलायन रोकने में कारगर होगी उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य फसल उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहती है।

Share319SendTweet199
Previous Post

सरस्वती विद्या मंदिर में एनएसएस का सात दिवसीय शिविर शुरू

Next Post

सवाडा इंटर कालेज में सालों से गणित, जीव विज्ञान, हिंदी के शिक्षक नहीं

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का स्थलीय निरीक्षण किया

April 21, 2026
6
उत्तराखंड

चारधाम यात्रा पर साइबर ठगों की नजर

April 21, 2026
8
उत्तराखंड

नृसिंह मंदिर में पंच पूजा के उपरांत मुख्य पुजारी श्री रावल आद्य जगदगुरु शंकराचार्य की गद्दी, गाड़ू घड़ी -तेल कलश एवं विष्णु वाहन गरुड़ के साथ श्री बद्रीनाथ धाम के लिए प्रस्थान किया

April 21, 2026
15
उत्तराखंड

अंबेडकर के आदर्शों से ही मजबूत होगा राष्ट्र: डॉ. भसीन

April 20, 2026
21
उत्तराखंड

सीमांत बलाण गांव में प्रसव पीड़ा झेल रही महिला को एयरलिफ्ट कर हायर सेंटर भेजा

April 20, 2026
8
उत्तराखंड

सुदूरवर्ती गांव बलाण में बहुप्रतीक्षित मोटर सड़क का आगामी 22 अप्रैल को थराली विधायक भूपाल राम टम्टा भूमि पूजन करेंगे

April 20, 2026
10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67671 shares
    Share 27068 Tweet 16918
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37329 shares
    Share 14932 Tweet 9332

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के निर्माणाधीन पुल का स्थलीय निरीक्षण किया

April 21, 2026

चारधाम यात्रा पर साइबर ठगों की नजर

April 21, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.