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कैसे चलेगा सरकार ? बारिश के मौसम में आपदा का डर, ऊपर से बिजली भी गायब

03/07/21
in अवर्गीकृत, उत्तराखंड, चमोली
Reading Time: 1min read
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थराली से हरेंद्र बिष्ट। पिछले लंबे समय से पिंडर घाटी की जनता हल्की बूंदाबांदी होने से एक दम से दहशियत में आ जाती हैं। बूंदाबांदी होने अथवा बारिश होने की संभावनाओं के बाद क्षेत्र के लोग को अपने तमाम कामों को छोड कर बिजली की वैकल्पिक व्यवस्थाओं को जुटने पर मजबूर होना पड़ रहा हैं।

यह पिछले कई वर्षों से एक नियति सी बन गई हैं। अभी पिछले महीने ही 18 से 22 जून तक पूरे  पांच  दिनों तक पिंडर घाटी की बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप होने के कारण यहां के लोगों की रातें अंधेरों में ही गुजरी थी। अभी इन पांच दिनों तक अंधेरों में अपनी रातें गुजारने का दर्द भूले भी नही थे कि ठीक 10 वें दिन हल्की बारिश होते ही पिंडर घाटी में एक बार फिर से पिछले 20 घंटों से अधिक समय से बिजली गुल हो गई हैं।         

पिछले कुछ वर्षों से पिंडर घाटी में बिजली सप्लाई के संबंध में एक धारणा आम हों गई हैं कि चाहें,गर्मी हों या जाड़ा अथवा बरसात आसमान में बादल आये नही और हल्की बूंदाबांदी अथवा हल्की हवा के चलते ही इस क्षेत्र के देवाल, थराली एवं नारायणबगड़ विकासखंडों की बिजली घंटों तक गुल हो जाना आम बात हो गई हैं। इसे देखते ही अब लोग मौसम के बदलते ही बूंदाबांदी अथवा हवा चलने की संभावना को देखते हुए अपने तमाम महत्वपूर्ण कामों को छोड कर रात के लिए बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था करने के साथ ही मोबाइल सहित अन्य बिजली आधारित उपकरणों को चार्ज करने में जुटने पर मजबूर होना पड़ जाता हैं।

ऊर्जा निगम इस क्षेत्र की बिजली आपूर्ति के प्रति किस कदर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा हैं इस का पता बीते जून महा में क्षेत्र में हुई बारिश के चलते 18 जून को पिंडर घाटी के तीनों विकासखंडों  की बिजली गुल हो गई थी,जोकि पूरे 5 दिनों बाद 22 जून को ही आ पाई थी।इस दौरान जहां ऊर्जा निगम के अधिकारी ग्वालदम-कर्णप्रयाग राष्ट्रीय राजमार्ग पर आमसौड़ के पास बीआरओ के द्वारा सड़क के चौड़ीकरण के कारण हुए भूस्खलन के कारण कई स्पान 33 केवी  बिजली लाईन के क्षतिग्रस्त होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसके लिए बीआरओ एवं उसकी सड़क को कसूरवार ठहराते हुए अपनी कार्यप्रणाली का बचाव करते  रहे थे।

किंतु कि 10 दिनों के अंदर ही शुक्रवार 2 जुलाई को आई हल्की बारिश ने ऊर्जा निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्य-प्रणाली पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार की सांय करीब 4.30 बजे अचानक पिंडर घाटी के तीनों विकासखंडों की बिजली एक बार फिर गुल हो गई थी। जोकि 20 घंटों के बाद भी समाचार लिखे जाने तक बहाल नही हो सकी है।इस संबंध में ऊर्जा निगम के नारायणबगड़ वितरण खंड के एसडीओ अतुल कुमार ने बताया कि नारायणबगड़-सिमली (कर्णप्रयाण) के बीच 33 केवी बिजली लाईन पर फाल्ट आ जानें के कारण सप्लाई बाधित हुई हैं जिसे ठीक कर आपूर्ति सुचारू किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मौसम खराब होते ही आये दिन बिजली आपूर्ति बाधित होने पर पूर्व दर्जाधारी मंत्री एवं थराली के पूर्व ब्लाक प्रमुख सुशील रावत, देवाल के पूर्व प्रमुख एवं कांग्रेसी नेता डीडी कुनियाल, पीसीसी महावीर बिष्ट आदि ने ऊर्जा निगम के आलाधिकारियों पर पिंडर घाटी क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सरकार को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब अधिकारी पिछले चार सालों से जब से पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के अनुसार गांव-गांव,घर-घर बिजली के कनेक्शन देने की योजना धरातल पर उतारी गई और ऊर्जा निगम को करोड़ों की धनराशि मुहैया करवाई गई।तभी से पिंडर घाटी में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पटरी से उतरी हुई हैं।

नेताओं ने सिमली (कर्णप्रयाग) से सब स्टेशन देवाल तक 33 केवी बिजली लाईन पर प्रति वर्ष रखरखाव पर किए जाने वाली धनराशि की उच्चस्तरीय जांच किए जाने एवं दोषियों पर कार्रवाई की मांग की हैं। उधर देवाल के प्रमुख दर्शन दानू ने भी उर्जा निगम के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वें पिंडर घाटी को आने वाली 33 केवी बिजली लाईन के प्रति पूरी तरह से लापरवाही बरतने हुए हैं।कहा कि इस मामले को उच्च स्तर पर उठा कर आवश्यक कार्रवाई की मांग उठाएंगे ताकि आये दिन बिजली को लेकर आने वाली समस्याओं का निराकरण हो सकें।

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