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उद्घाटन के इंतजार में 3 साल से धूल फांक रहा गैरसैंण का अत्याधुनिक ऑडिटोरियम

31/07/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
उत्तराखण्ड में लगभग 20 साल के लंबे संघर्ष के बाद गैरसैंण को आखिरकार राजधानी का दर्जा मिल ही गया। गैरसैंण भले उत्तराखण्ड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनी हो लेकिन इससे निश्चित ही यहां का कायाकल्प हो जायेगा। खूबसूरत प्राकृतिक नजारों से भरपूर गैरसैंण को राजधानी बनाने का आंदोलन भावनात्मक मुद्दा भी था जिसका समाधान आखिरकार हो ही गया। उत्तराखण्ड राज्य के लिए जब से आंदोलन चला था तब से लोगों की यही मांग थी कि गैरसैंण को ही राजधानी बनाया जाये। अभी देहरादून राज्य की राजधानी है लेकिन उसे अस्थायी राजधानी का ही दर्जा प्राप्त है। वैसे देखा जाये तो इसी के साथ ही उत्तराखण्ड देश का ऐसा पांचवां राज्य बन गया है जहां दो राजधानियां हैं। यूपी से एक अलग राज्य उत्तराखंड बनाने के साथ ही उसकी राजधानी गैरसैंण को बनाने की मांग उठने लगी थी। राज्य आंदोलनकारियों और यूकेडी ने भी इसको लेकर कई बार आंदोलन तेज किया, जिसके बाद उनका ये आंदोलन नौ नवंबर 2000 को खत्म हुआ और उत्तरप्रदेश से एक अलग राज्य उत्तराखंड का निर्माण हुआ। हालांकि फिर उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण न होकर देहरादून(अस्थाई) बन गई। इसे लेकर फिर से आंदोलन शुरू हुए और राज्य आंदोलनकारियों ने ‘पहाड़ी प्रदेश की राजधानी पहाड़ हो’ का नारा बुलंद किया। इसलिए गैरसैंण को जनभावनाओं की राजधानी भी कहा जाने लगा।  ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में 3 वर्ष पूर्व 4 करोड़ से अधिक की भारी भरकम धनराशि खर्च करने के बाद एक ऑडिटोरियम तैयार किया गया, लेकिन ऑडिटोरियम उद्घाटन की बाट जोह रहा है. करोड़ों रुपये से निर्मित ऑडिटोरियम धूल फांक रहा है. राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण में लगभग साढे चार करोड़ रुपए की लागत से बने अत्याधुनिक बालकनी ऑडिटोरियम हॉल पर लटके हुए ताले इसकी गवाही दे रहे हैं.गैरसैंण नगर के महत्व को देखते हुए सरकार ने अत्याधुनिक ऑडिटोरियम बनाने की घोषणा की थी. जिसके बाद साल 2020-21 में इसका काम शुरू होकर, 2023 में निर्माण कार्य पूरा कर लिए गया था. ऑडिटोरियम का निर्माण पूरा होने के साथ ही सभी आधुनिक उपकरण भी स्थापित कर लिए जाने के बावजूद इसका उपयोग न होने से जहां एक तरफ महंगे उपकरण धूल फांक रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ ऑडिटोरियम हॉल बंद होने से बरसात के दिनों में लगने वाली फंफूद से हाल की साउंड प्रूफ दिवारें,महंगे उपकरण,फर्नीचर व मैटिंग की भी खराब होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं. उल्लेखनीय है कि 4 करोड़ 37 लाख 86 हजार की भारी भरकम धनराशि से राजकीय इंटर कॉलेज गैरसैंण की भूमि पर आधुनिक ऑडिटोरियम का निर्माण पूर्ण कर कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम यूनिट-2 श्रीनगर द्वारा नवंबर 2023 में ही इसे शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया था. लेकिन अब तक इसका ना तो विद्यालय द्वारा कोई उपयोग किया जा रहा है और ना किसी अन्य संस्था को उपयोग के लिए दिये जाने की कोई नीति बनाई गई है. बताया जा रहा है कि ऑडिटोरियम का उद्घाटन न होने से फिलहाल इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिसके चलते ऑडिटोरियम पर ताले लटके हुए हैं. लगभग 250 दर्शकों की क्षमता वाले बालकनी के साथ बने अत्याधुनिक ऑडिटोरियम हॉल में महंगी पुशबैक कुर्सियां लगी हुई है, जिसके साथ ही विशाल एलईडी ,पब्लिक ऐड्रेसिंग सिस्टम,ऑडियो-वीडियो सिस्टम,पोडियम, मेटिंग, महंगे पर्दों के साथ ही हाल में बनी साउंड प्रूफ दीवारें भी बनी हैं. जिनके रखरखाव की कोई विभागीय व्यवस्था न होने से इन पर धूल जम रही है. वहीं बरसात में लगने वाली फंफूद भी नुकसानदायक साबित हो रही है. मामले को लेकर विद्यालय के प्रधानाचार्य कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को संचालित करने के लिए विद्यालय के पास कोई तकनीकी व्यक्ति नहीं है. जिससे फिलहाल इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है. उप जिलाधिकारी गैरसैंण ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है. शिक्षा विभाग से वार्ता कर जल्द ही ऑडिटोरियम का निरीक्षण कर इसे शुरू करवाने की कार्रवाई की जाएगी. मामले को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष मोहन भंडारी ने कहा कि, नगर पंचायत द्वारा लगातार ऑडिटोरियम को कार्यक्रमों हेतु उपलब्ध कराने की मांग की जाती रही है. इससे पूर्व भी दिसंबर में हुए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली एवं इंद्र मणि बड़ौनी स्मृति दिवस पर ऑडिटोरियम की मांग की गई थी, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा इसे देने से इंकार कर दिया गया था.मोहन भंडारी ने बताया कि, इसके बाद विधानसभा बजट सत्र के दौरान कैबिनेट को भी पत्र लिखकर ऑडिटोरियम का उद्घाटन जल्द करने की मांग की गई. लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि,ऑडिटोरियम को बने हुए लगभग 3 वर्ष होने वाला है और करोड़ों की लागत से बने इस ऑडिटोरियम का रखरखाव भी चिन्ता का विषय है. कहा कि, हम यही चाहते हैं कि ऑडिटोरियम जल्द से जल्द आम जनता के उपयोग हेतु उपलब्ध हो. उत्तराखंड में सरकारें बनी और सभी ने यहां की जनता को गैरसैंण राजधानी का सपना भी दिखाया, जो सिर्फ सपना ही बनकर ही रह गया था। फिर इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक दल हमेशा अपनी रोटी सेंकने में लगे रहे।उत्तराखंड आंदोलन की जनभावनाओं का केंद्र रहा गैरसैंण राज्य के मध्य में अवस्थित है। गैरसैंण से लगभग 10 किलोमीटर पहले भराड़ीसैंण में लगभग 47 एकड़ में फैला विधानसभा परिसर अपनी आलीशान इमारतों से नई इबारत लिख रहा है। राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाना चाहिए। भराड़ीसैंण विधानसभा सिर्फ एक भवन नहीं है, यह जनभावनाओं का मंदिर है। सड़कें, स्वास्थ्य समेत अन्य सुविधाओं का विकास होना चाहिए।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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