डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
कोशिशें रंग लाईं तो चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले की नेलांग घाटी के नेलांग और जादूंग गांव इनर लाइन से बाहर होंगे। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के निर्देश पर इस क्षेत्र का दौरा करने के बाद अब ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग इस बारे में मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने जा रहा है। फिर सरकार इसे केंद्र को भेजेगी। आयोग के उपाध्यक्ष के मुताबिक नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण नेलांग व जादूंग क्षेत्र में पर्यटन विकास के दृष्टिगत भारतीय नागरिकों के लिए इसे इनर लाइन से मुक्त किया जाना चाहिए।ष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार परिषद ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे देश के गांवों पर ध्यान केंद्रित किया है। इस कड़ी में परिषद की टीम ने उत्तराखंड का दौरा कर चीन सीमा से सटे चार विकासखंडों धारचूला, मुनस्यारी, जोशीमठ व भटवाड़ी के गांवों से पलायन समेत अन्य बिंदुओं पर जानकारी ली।उत्तरकाशी जिले में वर्ष 1962 से वीरान पड़े चीन सीमा पर स्थित नेलांग और जादुंग गांवों को बसाने की कवायद शुरू हो गई है. 1962 से पहले उत्तरकाशी जिले में चीन सीमा पर स्थित नेलांग गांव में करीब 40 परिवार और जादुंग गांव में करीब 30 परिवार निवास करते थे. उनका मुख्य व्यवसाय कृषि और भेड़पालन था. 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान सेना ने नेलांग और जादुंग को खाली करा दिया. जिसके बाद यहां के ग्रामीणों ने बगोरी और डुंडा में शरण ली.ऋषिकेश से उत्तरकाशी की दूरी 162 किमी पर है. पहला स्टॉप आपको यहां करना होगा. यदि आप देहरादून से उत्तरकाशी आते हैं, तो आप को देहरादून से उत्तरकाशी की दूरी 139 किमी तय कर यहा पहुंचना होगा. जिसके बाद आपको उत्तरकाशी से हर्षिल तक 76 किमी की दूरी तय करनी होगी. उसके बाद हर्षिल से जादुंग गांव 56 किमी की दूरी पर है. हर्षिल से भैरव घाटी तक नेलांग की दूरी 19 किमी है. जिसके बाद नेलांग गांव से जादुंग की दूरी 16 किमी है. वहीं भैरव घाटी से जादुंग गांव की दूरी 40 किमी है. यह इलाका बहुत ही ठंडा है.उत्तरकाशी जिले में वर्ष 1962 से वीरान पड़े चीन सीमा पर स्थित नेलांग और जादुंग गांवों को बसाने की कवायद शुरू हो गई है. 1962 से पहले उत्तरकाशी जिले में चीन सीमा पर स्थित नेलांग गांव में करीब 40 परिवार और जादुंग गांव में करीब 30 परिवार निवास करते थे. उनका मुख्य व्यवसाय कृषि और भेड़पालन था. 1962 में भारत चीन युद्ध के दौरान सेना ने नेलांग और जादुंग को खाली करा दिया. जिसके बाद यहां के ग्रामीणों ने बगोरी और डुंडा में शरण ली.दूरी 16 किमी है. वहीं भैरव घाटी से जादुंग गांव की दूरी 40 किमी है. यह इलाका बहुत ही ठंडा है.भारत-चीन सीमा से सटे जादुंग गांव में पर्यटन विकास की योजना अब धरातल पर दिखाई देने लगी है. केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत समुद्रतल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे जादुंग में छह होमस्टे का निर्माण लगभग पूरा हो गया है. इन होमस्टे को जल्द ही भूमि स्वामी ग्रामीणों को सौंपे जाने की उम्मीद है. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि इनर लाइन की पाबंदियों के चलते होमस्टे तैयार होने के बाद भी पर्यटन गतिविधियों को अपेक्षित गति नहीं मिल पाएगी.जादुंग में छह होमस्टे का निर्माण पूरा: वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद जादुंग गांव से ग्रामीणों को विस्थापित किया गया था. अब सरकार की ओर से सीमांत गांवों को दोबारा आबाद करने और पर्यटन से जोड़ने की पहल की जा रही है. इसी के तहत जादुंग में प्रथम चरण में छह होमस्टे तैयार किए गए हैं. निर्माण कार्य का राजस्व विभाग और ग्राम पर्यटन समिति जादुंग की ओर से निरीक्षण भी किया गया है. ग्रामीणों के अनुसार मुख्य सचिव के जल्द जादुंग पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने की संभावना है. उन्हें उम्मीद है कि इस दौरान तैयार होमस्टे ग्रामीणों को सौंपने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी. जादुंग और नेलांग क्षेत्र में इनर लाइन के नियमों की बाध्यताएं अभी भी बरकरार हैं. इसके कारण रात में पर्यटकों के ठहरने सहित आवाजाही को लेकर कई तरह की पाबंदियां हैं. ग्रामीणों को अपने पारंपरिक धार्मिक आयोजनों और पूजा के लिए भी अनुमति की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. ऐसे में उनका कहना है कि यदि होमस्टे में पर्यटकों को ठहराने की सुविधा ही सुगम नहीं होगी, तो पर्यटन योजना का उद्देश्य पूरी तरह हासिल करना मुश्किल होगा. ग्रामीणों का कहना है कि जादुंग में होमस्टे शुरू होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे. पर्यटकों के आने से स्थानीय उत्पाद, पारंपरिक भोजन और ग्रामीण संस्कृति को भी पर्यटन से जोड़ा जा सकेगा. लंबे समय बाद पैतृक गांव के विकास की पहल से विस्थापित ग्रामीणों में उत्साह है, लेकिन वे चाहतेजादुंग और नेलांग जाने के लिए इनर लाइन की बाध्यताओं को कम किया जाना चाहिए. साथ ही दोपहिया वाहनों की आवाजाही को भी सुगम बनाने की जरूरत है. इससे स्थानीय ग्रामीण पर्यटन, कृषि और अन्य गतिविधियों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे. हैं कि पर्यटन विकास के साथ आवाजाही से जुड़े नियमों में भी व्यावहारिक बदलाव किए जाएं. इनर लाइन के नियमों से जुड़ी बाध्यताओं को कम करने के संबंध में केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर विभिन्न बिंदुओं पर कार्य किया जा रहा है. सीमांत क्षेत्र के विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. जादुंग और नेलांग जाने के लिए इनर लाइन की बाध्यताओं को कम किया जाना चाहिए. साथ ही दोपहिया वाहनों की आवाजाही को भी सुगम बनाने की जरूरत है. इससे स्थानीय ग्रामीण पर्यटन, कृषि और अन्य गतिविधियों से जुड़कर रोजगार प्राप्त कर सकेंगे. वाइब्रेंट विलेज योजना में शामिल चीन सीमा से लगा उत्तरकाशी जिले का जादुंग गांव एक वर्ष के अंतराल में पर्यटकों की सैरगाह बन जाएगा. इसके साथ ही शीत मरूस्थल क्षेत्र में करीब 10 किमी का जनकताल ट्रेक भी प्रकृति के अभुद्ध नजारों के बीच रोमांच को और बढ़ाएगा. उत्तरकाशी जिला प्रशासन और गंगोत्री नेशनल पार्क जनकताल तक ट्रेकिंग की तैयारी कर रहा है. वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत जादुंग गांव में पहले चरण में छह होमस्टे बनाए जा रहे हैं.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











