• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

गंगा में खूब फल-फूल रहे हैं घड़ियाल

17/01/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
3
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter
https://uttarakhandsamachar.com/wp-content/uploads/2025/11/Video-60-sec-UKRajat-jayanti.mp4

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
गंगा और उसकी सहायक नदियों में रहने वाले अत्यंत संकटग्रस्त जलीय जीव घड़ियाल को लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है. भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा कराए गए व्यापक सर्वे में यह सामने आया है कि गंगा बेसिन की कई नदियों में आज भी घड़ियालों की मौजूदगी बनी हुई है. सर्वे के मुताबिक गंगा और उसकी सहायक कुल 22 नदियों में अध्ययन किया गया, जिनमें से 13 नदियों में 3 हजार से अधिक घड़ियाल पाए गए हैं. यह आंकड़ा जहां एक ओर उम्मीद जगाता है, वहीं दूसरी ओर संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत भी रेखांकित करता है.भारतीय वन्यजीव संस्थान ने घड़ियालों को लेकर यह सर्वे नवंबर 2020 में शुरू किया था, जो मार्च 2023 तक चला. करीब ढाई साल तक चले इस अध्ययन में न सिर्फ घड़ियालों की संख्या दर्ज की गई, बल्कि उनके आवास, प्रजनन क्षेत्रों, नदी के प्रवाह, मानव गतिविधियों के प्रभाव और भविष्य की संरक्षण संभावनाओं पर भी गहराई से काम किया गया. सर्वे के बाद मिले आंकड़ों के आधार पर संस्थान ने गंगा बेसिन में घड़ियालों की जनसंख्या स्थिति और संरक्षण कार्ययोजना पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की है.रिपोर्ट के अनुसार गंगा और उसकी सहायक नदियों में कुल 3037 घड़ियाल दर्ज किए गए हैं. हालांकि सर्वे 22 नदियों में किया गया था, लेकिन घड़ियालों की उपस्थिति केवल 13 नदियों में ही पाई गई. यह तथ्य अपने आप में चिंता का विषय है, क्योंकि इसका सीधा मतलब है कि कई नदियां अब घड़ियालों के लिए अनुकूल नहीं रह गई हैं. उत्तराखंड के लिहाज से रामगंगा नदी से एक सकारात्मक संकेत मिला है. सर्वे के दौरान रामगंगा नदी में कुल 48 घड़ियालों की मौजूदगी रिकॉर्ड की गई, जो राज्य के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है.वहीं सबसे उत्साहजनक नतीजे चंबल नदी से सामने आए हैं, जहां अकेले 2097 घड़ियाल पाए गए. चंबल नदी लंबे समय से घड़ियाल संरक्षण का प्रमुख केंद्र रही है और यह सर्वे उसके महत्व को एक बार फिर साबित करता है. भारतीय वन्यजीव संस्थान की इस रिपोर्ट को किताब के रूप में भी प्रकाशित किया गया है, जिसका विमोचन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री द्वारा किया गया. इस रिपोर्ट में घड़ियाल संरक्षण से जुड़े सभी प्रमुख तथ्यों, आंकड़ों और सिफारिशों को शामिल किया गया है. खास बात यह है कि रिपोर्ट केवल संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नदियों में घड़ियालों के लिए अनुकूल माहौल बनाए जाने पर विशेष जोर दिया गया है. रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि नदियों में बढ़ता प्रदूषण, मछली पकड़ने के लिए जालों का अंधाधुंध इस्तेमाल, रेत खनन और मानव गतिविधियों का दबाव घड़ियालों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन चुका है. मछली पकड़ने के जाल में फंसकर घड़ियालों की मौत के मामले भी सामने आते रहे हैं, जबकि रेत खनन से उनके प्रजनन स्थल प्रभावित हो रहे हैं. इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वन्यजीव संस्थान ने घड़ियाल संरक्षण के लिए एक विशेष टास्क फोर्स गठित किए जाने की भी सिफारिश की है. इसके तहत नदी प्रबंधन, मानव गतिविधियों के नियमन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के जरिए घड़ियालों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने की बात कही गई है.यह सर्वे घड़ियालों की मौजूदगी को लेकर राहत जरूर देता है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकटग्रस्त प्रजाति फिर से गंभीर खतरे में पड़ सकती है. अब जरूरत है कि रिपोर्ट में सुझाए गए संरक्षण उपायों को जमीन पर उतारा जाए, ताकि गंगा बेसिन की नदियों में घड़ियालों की यह उम्मीद आने वाले वर्षों में और मजबूत हो सके. यह जानकारी गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति एवं संरक्षण कार्ययोजना विषय पर जारी रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और पर्यावरणीय चुनौतियों के बावजूद कुछ नदियों में घड़ियालों की आबादी अभी भी बनी हुई है। देश के अन्य राज्यों की तरह जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में घड़ियाल को संरक्षित करने का प्रयास जोर-शोर से चल रहा है. कॉर्बेट प्रशासन अगर इनकी संख्या बढ़ाने की सोच रहा है. अंडों से कृत्रिम तरीके से बच्चे विकसित करने का कार्य लखनऊ में कुकरैल सेंटर एवं उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के कतरनिया घाट सेंचुरी में होता है. इस तकनीक में अंडों को आर्टिफिशियल इनक्यूबेटर मशीन में रखा जाता है. मादा के शरीर के अनुसार अंडों को तापमान दिया जाता है. अंड़ों से बच्चे निकलने के बाद उनके साढ़े तीन फीट तक होने का इंतजार किया जाता है, जिसके बाद उन्हें नदी में छोड़ दिया जाता है. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व घड़ियालों के लिए बहुत ही सुरक्षित और महत्वपूर्ण जगह है. लेकिन वाटर पॉल्यूशन और प्रकृतिक आपदा जैसे बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं के कारण घड़ियालों की संख्या लगातार घट रही है. कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में साल 2008 में की गई जलीय जीवों की गणना में घड़ियालों की संख्या 122 थी जो 2020 फरवरी में घटकर 75 रह गई. हालांकि, इसी साल दिसंबर में दोबारा हुई गणना में घड़ियालों की संख्या 96 हो गई. इसके विपरीत वर्ष 2008 की तुलना में वर्ष 2020 में ऊदबिलाव की संख्या में 26 की बढ़ोतरी हुई. मगरमच्छ की संख्या में भी 82 की वृद्धि हुई, जबकि घड़ियाल की संख्या में 26 घड़ियाल की कमी पाई गई है.वन्यजीव विशेषज्ञ कहते है कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व घड़ियालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण व सुरक्षित जगह है. लेकिन इनकी संख्या के लगातार कम होने के कई कारण हैं. बरसात के समय नदी में बाढ़ आने के कारण इनकी संख्या न बढ़ना भी मुख्य कारण है क्योंकि बरसात में ही घड़ियाल अंडे देते हैं और बाढ़ आने से इनके अंडे नदी में बह जाते हैं.वन्यजीव प्रेमी कहते हैं कि कॉर्बेट प्रशासन का घड़ियालों को संरक्षित करने का अच्छा प्रयास है, क्योंकि घड़ियाल एक संकटग्रस्त प्रजाति है. पहले भी कॉर्बेट पार्क की रामगंगा नदी में लाकर घड़ियाल छोड़े गए थे. रामगंगा नदी में रेतीले तट हैं. उन्होंने बताया कि राम गंगा नदी में बाड़ के समय उस पर काफी पानी आता है, ऐसे में इनके अंडे भी बाढ़ में बह जाते है ,जिन कारण इनकी संख्या बढ़ नहीं पा रही है. कॉर्बेट प्रशासन अब ब्रीडिंग के जरिये घड़ियालों के अंडे कलेक्ट करके आर्टिफिशियल ब्रीडिंग कर दोबारा से रामगंगा नदी में उनको छोड़ेगा. इससे निश्चित रूप से घड़ियालों की संख्या में वृद्धि होगी.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं

Share1SendTweet1
Previous Post

राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय विज्ञान क्विज प्रतियोगिता का आयोजन

Next Post

मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से संवाद, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

Related Posts

उत्तराखंड

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के तहत गुप्तकाशी में लगा बहुउद्देशीय शिविर

January 17, 2026
6
उत्तराखंड

राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में अध्यापकों को भारी भरकम टोटा है

January 17, 2026
3
उत्तराखंड

स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में उत्तराखण्ड को मिला ‘लीडर’ दर्जा

January 17, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी का शेफ समुदाय से संवाद, उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

January 17, 2026
5
उत्तराखंड

राष्ट्रीय आविष्कार अभियान के अंतर्गत ब्लॉक स्तरीय विज्ञान क्विज प्रतियोगिता का आयोजन

January 16, 2026
39
उत्तराखंड

किसान आत्महत्या मामले में कांग्रेस का पुलिस मुख्यालय कूच, डोईवाला से बड़ी संख्या में कांग्रेसी शामिल

January 16, 2026
16

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67583 shares
    Share 27033 Tweet 16896
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45769 shares
    Share 18308 Tweet 11442
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38040 shares
    Share 15216 Tweet 9510
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37430 shares
    Share 14972 Tweet 9358
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37312 shares
    Share 14925 Tweet 9328

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के तहत गुप्तकाशी में लगा बहुउद्देशीय शिविर

January 17, 2026

राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में अध्यापकों को भारी भरकम टोटा है

January 17, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.