फोटो-2013 की आपदा मे तबाह हुआ पुलना गाॅव, अब यहाॅ के ग्रामीणों पर घाॅधरिया से बेदखली की तलवार लटक रही है।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। हजारों लोगों की रोजी-रोटी के जरिये पर बेदखली की तलवार लटकने से परेशान भ्यूूॅडार वैली के ग्रामीणों ने अब डीएए व मुख्य सचिव से गुहार लगाई। हेमकुंड साहिब-लोकपाल व फूलों की घाटी के मुख्य पडाव घाॅघरिया में गुरूद्वारा सहित 49 लोगों पर वन महकमे ने बेदखली की कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वर्ष 1956 से पूर्व की छानियाॅ वर्ष 2019 आते-आते शहर में तब्दील हुए घाॅघरिया पर अब बेदखली की तलवार लटक गई है। इससे परेशान आपदा पीडित भ्यूूॅडार वैली के ग्रामीणों के साथ ही हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट ने भी घाॅधरियाॅ को बचाने की मुहिम शुरू कर दी है। वन विभाग द्वारा पूर्व मे दिए गए बेदखली के नोटिस के बाद इसी महीने अखबारों मे विज्ञप्ति प्रकाशित कर बेदखली का अंतिम ओदश जारी कर दिया। इससे परेशान भ्यॅूडार वैली व गुरूद्वारा प्रबंध कमेटी ने डीएम व सीएस को ज्ञापन भेजकर घाॅघरिया की वस्तुस्थिति से विस्तार से अवगत कराया।
सिखों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब व हिंदुओं के तीर्थ लोकपाल के साथ ही विश्व धरोहर फूलों की घाटी के मुख्य पडाव घाॅघरिया मे बने होटल, रेस्टोरेंट व गुरूद्वारा परिसर आदि पर बेदखली की तलवार लटक रही हैं। दरसअल बीते वर्षो मे किसी संस्था द्वारा उच्च न्यायालय मे याचिका दायर कर वन उत्तराखंड मे वन भूमियों पर अतिक्रमण कर निर्माण किए जाने पर कार्यवाही की मांग पर उच्च न्यायालय ने विभिन्न स्थानों पर हुए अतिक्रमणो को हटाने का आदेश जारी किया था। उसमे घाॅधरियाॅ भी प्रमुख है। यहाॅ वन विभाग ने पूर्व खाली करने का नोटिस थमाया था, और अब वन विभाग ने अखबारो मे वकायदा विज्ञिप्त जारी कर गुरूद्वारा प्रबंध कमेटी सहित सभी 49लोगो के नाम उजागर करते हुए अवैध अतिक्रमण को हटाने का आदेश जारी कर दिया है। इससे परेशान ग्रामीणों तथा गुरूद्वारा प्रबंध कमेटी ने डीएम का सीएस को ज्ञापन भेजकर कहा है कि पुलना/भ्यूॅडार के ग्रामीण पूर्वकाल से ही ग्रीष्मकाल मे घाॅघरियाॅ मे अपने मवेशियों के साथ प्रवास करते थे। और अनादिकाल से ही घाॅघरिया से 6किमी की दूरी पर स्थित लोकपाल तीर्थ-लक्ष्मण मंदिर मे पूजा अर्चना करते आ रहे है । और अनादिकाल से ही यहाॅ पूजा पंरपरा का निर्बाध जारी रखने के लिए श्री बदरीनाथ मंदिर से दस्तूर भी दिया जाता रहा है। तब भी गाॅव से नियुक्त पूजा बारीदार व अन्य लोग घाॅधरियां मे ही प्रवास कर नित्य पूजाआंेें के लिए लोकपाल जाते थें और सायंकाल को वापस घाॅधरिया पंहुचते थे।
ज्ञापन मे कहा गया है कि बाद के वर्षो मे जब विश्व धरोहर फूलों की घाटी व हेमकुंड साहिब का प्रगटीकरण हुआ और दोनो स्थानो पर यात्रियों व पर्यटकों का आवागमन शुरू हुआ तो ग्रामीणों ने भी धीरे-धीरे अपनी छानियों को तीर्थयात्रियों व पर्यटकों की सुविधानुसार पक्के निर्माण मे तब्दील किया। और गुरूद्वारा प्रबध कमेटी ने भी विस्तार किया। और इस दौरान किसी भी स्तर से निर्माण को रोकने के आदेश नही हुए। ज्ञापन के माध्यम से यह भी जानकारी दी गई है कि घाॅधरिया को वर्ष 1956मे सिविल भूमि मानते हुए ही गाॅव के तारा सिंह, वर्ष 1957मे किसन सिंह व वर्ष 1962मे नीती-माणा धर्मशाला के लिए बाला सिंह पाल के नाम से भी नजूल भूमि स्वीकृत हुई है।, इनके अलावा काली कमली ट्रस्ट, गुरूद्वारा श्री हेमकुंड ट्रस्ट, गढवाल मंडल विकास निगम आदि को भी लीज पर भूमि आवंटित हुई है।
घाॅघरिया मे ग्रामीणों की संख्या बढने व यात्रियों व पर्यटकों की आवाजाही मे आशातीत बृद्धि होने के कारण बाद के वर्षे मे वहाॅ पुलिस चैकी, जलागम को बहुदेश्यीय भवगन, उरेडा का विद्युत गृह, पर्यटन विभाग का पर्यटन सूचना केंन्द्र भवन, घोडा पडाव, व शौचालयों के निर्माण कराए गए है। स्वयं वन विभाग द्वारा भी विश्राम गृह के साथ इंटरेपेटेशन संेटर आदि का भी निर्माण किया है। यह भी उल्लेखनीय है कि वन महकमे ने ही पुष्कर सिंह चैहान व हरेन्द्र सिंह को भूमि लीज पर दी है। और घाॅघरिया मे सभी लोगो ने उक्त भूमि पर पक्के निर्माण कराए है। अब अचानक बेदखली का आदेश होने से पूरे क्षेत्र मे भारी आक्रोष है।
वर्ष 2013 की आपदा मे ग्रीष्मकालीन गाॅव भ्यॅूडार व शीतकालीन गाॅव पुलना दोनो का गॅवा चुके ग्रामीणो के पास रोजी-रोटी व परिवार के भरण-पोषण का एक मात्र साधन घाॅघरिया ही बचा है। जहाॅ अब बेदखली की तलवार लटक रही है। ऐंसे मे सरकार के सामने गुहार लगाने के अलावा इन ग्रामीणों के पास और कोई मार्ग भी नही है। हाॅलाकि वन विभाग द्वारा पहला नोटिस आने के बाद ही भ्यूॅडार के ग्रामीण मुख्य मंत्री , क्षेत्रीय विधायक, मुख्य सचिव, वन मंत्री से भेंट कर घाॅघरियां मे निर्मित भवनो व भूमि का नियमितीकरण कराने का आग्रह कर चुके थे। और नियमतिकरण की पत्रावली भी गतिमान है। लेकिन अचानक वन महकमे ने बेदखली की विज्ञप्ति प्रकाशित कर ग्रामीणों को पशोपेश मे डाल दिया है।
अब देखना होगा कि आपदा पीडित भ्यूॅडार के ग्रामीणों की सरकार किस स्तर तक मदद कर सकती है, इस पर न केवल भ्यूॅडार वैली ब्लकि हेमकुंड साहिब मैनेेजमेंट ट्रस्ट व पूरे सीमांत वासियों की नजरे रहेगी।











