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पुरस्कार राशि का इससे बेहतर सदुपयोग कुछ और नहीं हो सकता

27/04/25
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
मूलत पिथौरागढ़ के रहने वाले गोविंद सिंह ने अपने करियर की शुरुआत देहरादून के ‘इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च’ (आईसीएआर) में बतौर अनुवादक की थी।  नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, हिंदुस्तान आदि में उच्च पदों पर गरिमामयी सेवाएं दे चुके और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय परिसर में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. गोविंद सिंह ने पुरस्कार में मिली एक लाख की ईनामी राशि अपने गांव (सौगांव) पिथौरागढ़ के हाईस्कूल में छात्रवृत्ति के लिए दान की है. यह राशि उन्हें हाल में राष्ट्रपति के हाथों मिले गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार के तहत मिली थी. पुरस्कार राशि का इससे बेहतर सदुपयोग कुछ और नहीं हो सकता.मैं ये सोच रहा हूँ कि यदि ऐसा और भी लोग करें तो कितना अच्छा लगेगा. हर स्कूल से कोई न कोई प्रतिभा तो निकलती ही है या हर आदमी का कहीं न कहीं तो गाँव होता ही है. स्कूलों को सरकार की सदबुद्धि का इंतजार तो है ही, समाज से भी सहयोग की जरूरत है गोविंद सिंह जी न्यूज और आजतक जैसे चैनलों में काम कर चुके हैं और आजकल के कई नामचीन पत्रकारों के शिक्षक भी रह चुके हैंज्ञात हो कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिन्दी भाषा के प्रसार और विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए पिछले दिनों पांच पत्रकारों और दो वैज्ञानिकों सहित 28 लोगों को ‘हिन्दी सेवा सम्मान’ से नवाज़ा हिंदी पत्रकारिता और रचनात्मक साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने के लिए 2011 का गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार प्रो. गोविंद सिंह और डॉ. शिवनारायण को दिया गया. वहीं 2010 का गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार और दिलीप कुमार चौबे को दिया गया.  उसी समय प्रो.गोविंद सिंह ने कहा कि वे पुरस्कार में मिली धनराशि से अपने गांव के राजकीय हाई स्कूल सौगाँव, पिथोरागढ़ के गरीब व होनहार बच्चों को छात्रवृत्ति देंगे. उन्होंने यह छात्रवृत्ति अपनी मां के नाम पर शुरू की है. यह हर वर्ष दी जाएगी.गोविंद सिंह का जन्म 28 जून, 1959 को हुआ. पत्रकारीय स्वतंत्र लेखन 1978 से शुरू किया. 1982 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप में प्रशिक्षार्थी पत्रकार के रूप में शुरुआत की. धर्मयुग और नवभारत टाइम्स में प्रशिक्षण के बाद नवभारत टाइम्स, मुंबई में उप संपादक बने. 1990 से 1999 तक नवभारत टाइम्स दिल्ली में सहायक संपादक रहे.1999 से 2002 तक जी न्यूज और आजतक चैनलों में क्रमशः डिप्टी एडिटर और सीनियर प्रोड्यूसर रहे और उनके अनुसंधान विभागों के प्रभारी के तौर पर कार्य किया. 2002 में ‘आउटलुक’ साप्ताहिक शुरू होने पर वहां बतौर असोसिएट एडिटर जुड़े. 2003 में अमेरिकी दूतावास से प्रकाशित पत्रिका स्पैन के हिन्दी संस्करण के संपादक बने. 2005 से दैनिक अमर उजाला और बाद में हिन्दुस्तान और कादम्बिनी में कार्यकारी संपादक का दायित्व संभाला. दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैम्पस में पिछले 15 वर्षों से विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर पत्रकारिता अध्यापन का कार्य भी कर रहे हैं. अगस्त 2011 से उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष के तौर पर कार्यरत प्रो. गोविंद सिंह देश के वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया प्राध्यापक रहे हैं। उन्हें प्रिंट मीडिया, टेलीविजन एवं मीडिया शिक्षण का लगभग 40 वर्षों का अनुभव है। वे ‘नवभारत टाइम्स’, ‘अमर उजाला’ और ‘हिन्दुस्तान’ जैसे देश के प्रमुख अखबारों के संपादक रहे हैं। पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर रहे. जम्मू कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष रहने के बाद आईआईएमसी दिल्ली में डीन रहकर रिटायर हुए. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के मीडिया (समिति) सालाहकार. ऐसे वरिष्ठ और दशकों तक टेलीविजन, प्रिंट, न्यू मीडिया और अकादमिक क्षेत्र में उनके अनुभव का फायदा सरकार के मुखिया और शासन के साथ राज्य को सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक ही मिलेगा ।केवल सरकार ही नहीं लोगों को भी इस दिशा में आगे कदम बढ़ाना होगा.” *लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं।लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*

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