डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
जाने-माने शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। इस दौरान उनका 9 किलो से ज्यादा वजन घट चुका है। वो बस नमक-पानी पीकर ही वो जीवित हैं। उनके डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय से भूख हड़ताल के कारण वह गंभीर स्थिति में पहुंच गए हैं और इससे उनके अंगों पर असर पड़ना शुरू हो सकता है। सोनम वांगचुक के तेजी से बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।देशभर की 1800 से ज्यादा दिग्गज हस्तियों ने वांगचुक को सपोर्ट किया है, साथ ही उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की भी अपील की है। लगातार राजनीतिक दिग्गज, फिल्मी हस्तियां और अलग-अलग वर्ग के लोग वांगचुक को सपोर्ट करने जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि देश की राजधानी के ‘दिल’ में चल रहे इस आंदोलन की वजह क्या है? सोनम वांगचुक 20 दिनों से भूख हड़ताल पर क्यों हैं देशभर में पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है. सरकार पर आरोप है कि वह जवाबदेही नहीं ले रही. सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. सोनम इसलिए भूख हड़ताल कर रहे हैं ताकि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें और सिस्टम साफ-सुथरा बने. अब उनकी तबीयत बिगड़ रही है, इसलिए कई लोग उन्हें हड़ताल खत्म करने की अपील कर रहे हैं. सोनम वांगचुक एक प्रसिद्ध लद्दाखी जलवायु कार्यकर्ता, शिक्षाविद और सामाजिक आंदोलनकारी हैं. दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार से कहा कि सोनम वांगचुक की सेहत पर नजर रखी जाए. रोज़ाना सरकारी डॉक्टरो की ओर से उनके स्वास्थ्य की जांच की जाए. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि देश के हर इंसान की ज़िंदगी क़ीमती है. सरकार द्वारा उसे बचाने की पूरी कोशिश की जानी चाहिए. हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी 19 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की.सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि रोजाना सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की विशेषज्ञों और डॉक्टरों द्वारा जांच की जा रही है. डॉक्टरों की राय के आधार पर उनके जीवन रक्षा के लिए भी जो करना जरूरी होगी, वो सरकार करेगी.याचिका वकील राकेश कुमार सैनी ने दायर किया था. 15 जुलाई को सुनवाई के दौरान सैनी ने कहा था कि एक मानवाधिकार कार्यकर्ता विरोध के अपने अधिकार का उपयोग करते हुए पूरे देश के सामने अपनी जान देने को तैयार है.याचिका में मांग की गई थी कि केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए कि वो सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाएं और उन्हें जबरन खाना खिलाएं. याचिका में कहा गया था कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता जा रहा है. अनशन के 19वें दिन सोनम वांगचुक का वजन साढ़े आठ किलो घट गया. अगर वो और ज्यादा दिनों तक अनशन करते हैं तो उनकी एक-दो दिनों में मौत हो सकती है. याचिका में कहा गया था कि अगर सोनम वांगचुक की मौत होती है तो ये पूरे देश औऱ दुनिया के लिए शर्म की बात होगी.बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं. उन्होंने जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे औऱ उसके बाद से लगातार अनशन पर हैं. इस विरोध के जरिये नीट पेपर लीक समेत दूसरे पेपर लीक और अनियमितताओं के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा जा रहा है. पिछले 20 दिनों से सोनम वांगचुक ने अन्न का एक दाना नहीं खाया है, जिससे हर कोई उनकी सेहत के लिए चिंतित है. 3 इडियट्स की कहानी सोनम वांगचुक पर है या नहीं, इसपर आमिर ने कहा- नहीं, ये सच नहीं है. दरअसल, ये एक गलतफहमी है. जब हम ये फिल्म बना रहे थे, सोनम वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम तक घट चुका है, उनके ब्लड शुगर का स्तर कई बार बेहद नीचे चला गया है। साथ ही उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इसके बावजूद अब तक कोई केंद्रीय मंत्री उनसे मिलने नहीं पहुंचा और न ही सरकार की ओर से औपचारिक बातचीत का कोई निमंत्रण दिया गया है। पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि यह केवल चुप्पी नहीं, बल्कि एक गंभीर मुद्दे की अनदेखी करने की प्रशासनिक रणनीति है। उन्होंने कहा, सरकार को उम्मीद है कि लोग अपनी रोजमर्रा की परेशानियों में इतने उलझे होंगे कि इस आंदोलन पर ध्यान नहीं देंगे। मीडिया पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, मुख्यधारा का मीडिया भी अन्य राजनीतिक और मनोरंजन से जुड़े मुद्दों पर अधिक फोकस कर रहा है। स्वच्छ और निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग करना कब अपराध बन गया? उन्होंने कहा, आखिर सरकार भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के प्रति संवेदनशील क्यों नहीं है। पूर्व सांसद ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा, युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह मामला केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संवाद, जवाबदेही और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का भी है। सोनम वांगचुक अभी भी हड़ताल जारी रखने पर अड़े हैं. उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की आवाज सुने और राजनीति से ऊपर उठकर बात करे. उन्होंने प्रधानमंत्री से भी अपील की है. CJP ने 20 जुलाई को संसद मार्च का ऐलान किया है, जब संसद का मानसून सत्र भी शुरू होगा. अभिनेता ओमी वैद्य जैसे लोग समर्थन में हैं. विपक्षी नेता भी आवाज उठा रहे हैं. कुछ लोग आंदोलन की संगठन क्षमता पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई. कई बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं. छात्रों में गुस्सा है क्योंकि मेहनत करने वाले युवाओं का भविष्य अंधेरे में जा रहा है. सोनम वांगचुक पहले लद्दाख के पर्यावरण संरक्षण के लिए आंदोलन कर चुके हैं. उन्होंने शिक्षा सुधार पर भी काम किया है. सोनम वांगचुक की उम्र 59 साल है. लंबी भूख हड़ताल से उनका स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है. समर्थक कहते हैं कि उनका संदेश पहुंच चुका है, अब वे अपनी जान बचाएं ताकि आगे लड़ाई जारी रख सकें. सोनम ने खुद लोगों से एक दिन की भूख हड़ताल करने की अपील की थी, लेकिन अब उनकी अपनी हड़ताल को खत्म करने की मांग बढ़ रही है.यह आंदोलन सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है. इसमें परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और युवाओं के भविष्य की लड़ाई शामिल है. सरकार अगर जल्दी छात्रों और आंदोलनकारियों से बात करती है तो स्थिति सुधर सकती है सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर खींचा है. उनकी हिम्मत सराहनीय है, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर चिंता भी बढ़ रही है. हजारों अपीलें उन्हें हड़ताल खत्म करने के लिए हो रही हैं, ताकि वे स्वस्थ रहकर आगे की लड़ाई लड़ सकें. युवाओं की आवाज को सरकार को सुनना चाहिए, क्योंकि देश का भविष्य उनके हाथों में है.सोनम वांगचुक को अनशन पर बैठे हुए 15 जुलाई को 18वां दिन है. अब उनके जीवन की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई है. वकील राकेश सैनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लंबे समय से भूख हड़ताल ओर रहने के चलते उनकी तबियत लगातार बिगड़ रही है. उनके जीवन को गंभीर खतरा है. सरकार ने अब तक कोई कदम नहीं उठाए है. याचिका में मांग गई है कि कोर्ट केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दे कि वे तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं. जरूरत पड़ने पर उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए. ज़रूरत हो तो उन्हें जबरन लिक्विड डाइट उपलब्ध कराई जाए. अपने स्वास्थ्य को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए वांगचुक ने कहा कि अब तक की गई चिकित्सा जांच में किसी भी तरह के तत्काल खतरे का संकेत नहीं मिला है।उन्होंने कहा, “मेरी हालत ऐसी नहीं है कि मैं दो-चार दिनों में मर जाऊँगा। कई स्वास्थ्य परीक्षण किए गए हैं और 18 दिनों के उपवास के हिसाब से परिणाम बिल्कुल सामान्य हैं। ईसीजी भी किया गया है और रिपोर्ट भी ठीक है। मैं कई और दिनों तक उपवास जारी रख सकता हूँ।”उन्होंने आगे कहा, “हां, कमजोरी तो है और मेरी मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं, लेकिन मेरा दिल और शरीर की मांसपेशियां अभी भी ठीक हैं।” पुलिस ने कहा कि बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था भीड़ और कानून व्यवस्था के आकलन के आधार पर नियमित सुरक्षा उपायों का हिस्सा है। पुलिस सूत्र ने कहा, “यह तैनाती एक नियमित प्रक्रिया है। भीड़ और कानून व्यवस्था के आकलन के आधार पर सुरक्षा की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है और उसे मजबूत किया जाता है।” भगवद गीता हमें परिणाम की चिंता न करने बल्कि अपना कर्तव्य निभाने पर ध्यान केंद्रित करने की शिक्षा देती है और हम ठीक यही कर रहे हैं. परिणाम की परवाह किए बिना हम वह करते रहेंगे जो करने की जरूरत है. इसलिए मैं हमेशा कहता हूं, अगर मैं इस संघर्ष में अपनी जान भी गंवा देता हूं, तो यह सबसे सस्ता सौदा होगा. एक जान उन हजारों लोगों की तुलना में कुछ भी नहीं है जो भविष्य में प्रभावित हो सकते हैं. जब विश्वास की कमी होती है और लोग अनसुना और दुखी महसूस करते हैं, तो चीजें बदसूरत मोड़ ले सकती हैं. हम ईमानदारी से उम्मीद करते हैं कि हमारे नेता इससे पहले कि ऐसा हो जाए, कार्रवाई करेंगे.”सरकार के लिए अपने संदेश में सोनम वांगचुक कहते हैं, “2014 में लोगों में सत्ताधारी पार्टी के प्रति जो सम्मान था, उसे बरकरार रखा जाना चाहिए. लेकिन लद्दाख और शायद देश के दूसरे हिस्सों में हो रही घटनाओं के कारण लोगों में विश्वास की कमी बढ़ती जा रही है. नागरिकों का अपने नेताओं पर से विश्वास उठना शुरू हो गया है. इस विश्वास को फिर से स्थापित किया जाना चाहिए, क्योंकि इसी आधार पर कोई राष्ट्र आगे बढ़ता है, फलता-फूलता है और वैश्विक नेता, विश्व गुरु बनने की आकांक्षा रखता है ।.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.











