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स्वास्थ्य के लिए औषधीय गुणों से भरपूर जामुन

03/02/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
जामुन एक सदाबहार वृक्ष है जिसके फल बैंगनी रंग के होते हैं। यह वृक्ष भारत एवं दक्षिण एशिया के अन्य देशों एवं इण्डोनेशिया आदि में पाया जाता है। इसे विभिन्न घरेलू नामों जैसे जामुन, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि के नाम से जाना जाता है। प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है और स्वाद में मीठा होता है। जामुन एक मौसमी फल है। खाने में स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी हैं। जामुन अम्लीय प्रकृति का फल है पर यह स्वाद में मीठा होता है। जामुन में भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज पाया जाता है। जामुन में लगभग वे सभी जरूरी लवण पाए जाते हैं जिनकी शरीर को आवश्यकता होती है। जामुन खाने में तो स्वादिष्ट होता ही है, साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं। जामुन को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, राजमन, काला जामुन, जमाली, ब्लैकबेरी आदि।
इसकी प्रकृति अम्लीय और कसैली होती है, लेकिन इसका स्वाद खाने में मीठा होता है। अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रेक्टोज पाया जाता है। जामुन में खनिजों की मात्रा अधिक होती है। इसके बीज में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। जामुन में आयरन, विटामिन और फाइबर पाया जाता है। आइए जानते हैं कि जामुन आपके स्वास्थ्य के लिए कितना फायदेमंद है। जामुन शरीर की पाचनशक्ति को मजबूत करता है। जामुन खाने से पेट संबंधित विकार कम होते हैं। मधुमेह के उपचार के लिए जामुन बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। मधुमेह के रोगी जामुन की गुठलियों को सुखाकर, पीसकर उनका सेवन करें। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है। जामुन में एंटी कैंसर के गुण भी पाए जाते हैं। कीमोथैरेपी और रेडिएशन में भी जामुन फायदेमंद होता है। जामुन का पका हुआ फल खाने से पथरी में फायदा होता है। जामुन की गुठली के चूर्ण को दही के साथ मिलाकर खाने से पथरी से राहत मिलती है। लिवर के लिए जामुन का प्रयोग बहुत कारगर होता है। कब्ज और पेट के रोगों के लिए जामुन बहुत लाभदायी होता है। मुंह में छाले होने पर जामुन के रस का प्रयोग करने से छाले समाप्त हो जाते हैं। जामुन एक सदाबहार वृक्ष है जिसके फल बैंगनी रंग के होते हैं लगभग एक से दो सेमी. व्यास के द्य यह वृक्ष भारत एवं दक्षिण एशिया के अन्य देशों एवं इण्डोनेशिया आदि में पाया जाता है। प्रकृति में यह अम्लीय और कसैला होता है और स्वाद में मीठा होता है। अम्लीय प्रकृति के कारण सामान्यतः इसे नमक के साथ खाया जाता है। जामुन का फल 70 प्रतिशत खाने योग्य होता है। इसमें ग्लूकोज और फ्रक्टोज दो मुख्य स्रोत होते हैं। फल में खनिजों की संख्या अधिक होती है। अन्य फलों की तुलना में यह कम कैलोरी प्रदान करता है।
एक मध्यम आकार का जामुन 3.4 कैलोरी देता है। इस फल के बीज में काबरेहाइड्रेट, प्रोटीन और कैल्शियम की अधिकता होती है। यह लोह का बड़ा स्रोत है। प्रति 100 ग्राम में एक से दो मिग्रा आयरन होता है। इसमें विटामिन बीए कैरोटिनए मैग्नीशियम और फाइबर होते हैं।काले काले स्वादिष्ट और मीठे जामुन खाने का आनंद शायद सभी ने लिया है। इसका एक अलग हल्का तोरा स्वाद सभी को पसंद आता है। इसको खाने के बाद जीभ के रंग बैंगनी हो जाता है। जून के महीने में और बारिश का मौसम शुरू होने पर ये खूब मिलते है। जामुन पूरे भारत में बड़े चाव से खाया जाता है। और अब तो विदेशी भी इसके कायल हो गए है। जामुन के जूस का चलन विश्व भर में बढ़ता जा रहा है। ये लीवर के रोगों में बहुत फायदेमंद होता है। अपने स्वाद और औषधीय गुणों के कारण जामुन का एक अलग ही महत्त्व है। सेंधा नमक के साथ इसका सेवन भूख बढ़ाता है और पाचन क्रिया को तेज करता है बरसात के दिनों में हमारी पाचन संस्था कमजोर पड़ जाती है कारण हमारा मानना है कि बरसात यानि बस तली चीजें खाना कचौडी, पकोडे, समोसे इत्यादि जिसके कारण शुगर और बढ़ जाता है तथा पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है।
आयुर्वेद के अनुसार जामुन की गुठली का चूर्ण मधुमेह में हितकर माना गया है, एक बार में 200 ग्राम से अधिक मात्रा में इस फल का सेवन नहीं करना चाहिए। खाली पेट जामुन खाने से पेट में दर्द और गैस बनने की शिकायतें संभव हैं, जामुन ही नहीं जामुन के पत्ते खाने से भी मधुमेह रोगियों को लाभ मिलता है। यहां तक की इसकी गुठली का चूर्ण बनाकर खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। पाचन शक्ति मजबूत करता है। इसलिए अगर आप इस मौसम में मौसम की मार से बचना चाहते हैं तो रोज जामुन खाएं। जामुन के मौसम में जामुन अवश्य खायें, कारण साल के बाकी के दिनों में आसानी से उपलब्ध नहीं होता, यदि होता भी है तो जो बात मौसमी फलों में होती है वह बेमौसम में नहीं होती सो जहां तक हो सके हर मौसम के फलों का लुत्फ मज़ा उसके मौसम में ही उठाएं तो ज्यादा अच्छा रहता है।
जामुन सामान्यतया अप्रैल से जुलाई माह तक सर्वत्र उपलब्ध रहते हैं। इसका न केवल फल, इसके वृक्ष की छाल, पत्ते और जामुन की गुठली अपने औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व रखते हैं। यह शीतल, एंटीबायोटिक, रुचिकर, पाचक, पित्त.कफ तथा रक्त विकारनाशक भी है। इसमें आयरन लौह तत्व, विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होने से यह हृदय रोग, लीवर, अल्सर, मधुमेह, वीर्य दोष, खाँसी, कफ दमा, रक्त विकार, वमन, पीलिया, कब्ज, उदररोग, पित्त, वायु विकार, अतिसार, दाँत और मसूढ़ों के रोगों में विशेष लाभकारी है। जामुन खाने के तत्काल बाद दूध नहीं पीना चाहिए। पका जामुन खाने से पथरी रोग में आराम मिलता है। पेट भरकर नित्य जामुन खाये तो इससे यकृत के रोगों में लाभ होगा। मौसम जाने के बाद इसकी गुठली को सुखाकर पीसकर रख लें इसका पावडर इस्तेमाल करें वही फल वाला फायदा देगा। जामुन के औषधीय उपयोगपथरी जामुन का पका हुआ फल पथरी के रोगियों के लिए एक अच्छी रोग निवारक दवा है। यदि पथरी बन भी गई तो इसकी गुठली के चूर्ण का प्रयोग दही के साथ करने से लाभ मिलता है। लीवर जामुन का लगातार सेवन करने से यकृत लीवर की क्रिया में काफी सुधार होता कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें मुँह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएँ वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक भूखे पेट जामुन का सेवन करें मुँहासे जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर में थोड़ा.सा गाय का दूध मिलाकर मुँहासों पर रात को लगा लें, सुबह ठंडे पानी से मुँह धो लें। कुछ ही दिनों में मुँहासे मिट जाएँगे मधुमेह मधुमेह के रोगियों के लिए भी जामुन अत्यधिक गुणकारी फल है, मधुमेह के रोगियों को नित्य जामुन खाना चाहियें जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें। इस पावडर को फाँकने से मधुमेह में लाभ होता है। दस्त लगने पर जामुन के रस में सेंधा नमक मिलाकर इसका शर्बत बना कर पीना चाहियें। इसमें दस्त बाँधने की विशेष शक्ति है, खूनी दस्त बन्द हो जाते हैं। २० ग्राम जामुन की गुठली पानी में पीसकर आधा कप पानी में घोलकर सुबह.शाम दो बार पिलाने से खूनी दस्त बन्द हो जाते हैं मंदाग्नि एसिडिटी से बचने के लिए जामुन को काला नमक तथा भूने हुए जीरे के चूर्ण को लगाकर खाना चाहिए।
जामुन के वृक्ष की छाल को घिसकर कम से कम दिन में तीन बार पानी के साथ मिलाकर पीने से अपच दूर हो जाता है जामुन के वृक्ष की छाल को घिसकर एवं पानी के साथ मिश्रित कर प्रतिदिन सेवन करने से रक्त साफ होताहै। जामुन के वृक्ष की छाल को पीसकर एवं बकरी के दूध के साथ मिलाकर देने से डायरिया;दस्त का भयंकर रूप के रोगी को तुरंत आराम मिलता है। पेचिश में जामुन की गुठली के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दिन में दो से तीन बार लेने से काफी लाभ होता है अच्छी आवाज बरकरार रखने के लिए जामुन की गुठली के काढ़े से कुल्ला करना चाहिए जामुन की गुठली का चूर्ण आधा.आधा चम्मच दो बार पानी के साथ लगातार कुछ दिनों तक देने से बच्चों द्वारा बिस्तर गीला करने की आदत छूट जाती है। अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसर गुण होता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन मेंजामुनलाभकारीहोताहै। हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना और अर्थराइटिस में जामुन का उपयोग फायदेमंद होता है। जामुन का फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं। जामुन भारत में काफी लोकप्रिय फल माना जाता है। जामुन खाने में स्वादिष्ट होता ही है साथ ही इसके कई औषधीय गुण भी होते हैं।
अम्लीय होने के कारण जामुन को नमक के साथ खाया जाता है। जामुन में ग्लूकोज और फ्रक्टोज पाया जाता हैं। जामुन के बहुत सरे स्वास्थ्य लाभ हैं। जामुन में विटामिन बी और आयरन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता। बीस साल के अथक प्रयास के बाद वैज्ञानिकों ने जामुन की जामवंत किस्म विकसित की है जो मधुमेह की रोकथाम में कारगर तथा एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से सम्बद्ध केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने करीब दो दशक के अनुसंधान के बाद जामवंत को तैयार किया है। इसमें कसैलापन नहीं है और 90 से 92 प्रतिशत तक गूदा होता है। इसकी गुठली बहुत छोटी है। जामुन के विशाल पेड़ की जगह इसके पेड़ को बौना और सघन शाखाओं वाला बनाया गया है। गुच्छों में फलने वाले इसके फल पकने पर गहरे बैगनी रंग के हो जाते हैं। इस किस्म को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जारी कर दिया गया है।
जामवंत ताजे फल और प्रसंस्करण दोनों के लिए उपयुक्त है। इसका अधिक गूदा प्रतिशत एवं छोटी गुठली उपभोक्ताओं को आकर्षित करती है और इसका बेहतर मूल्य मिलता है। संस्थान ने किसानों को जामुन के व्यावसायिक उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया है।
इसके पेड़ को छोटा रखने की तकनीक संस्थान में विकसित की गई है, जो इन ग्राफ्टेड पौधों को वांछनीय ऊंचाई पर बनाए रखने में मदद करता है। फल सामान्य ऊंचाई पर तोड़ने के लिए सामान्य व्यक्ति की पहुंच में होते हैं। ज्यादातर जामुन के पेड़ विशाल होते हैं। शाखाओं को हिलाकर या गिराए गए फलों की तुड़ाई करना मौजूदा प्रथा है लेकिन जामवंत के छोटे पेड़ों से कोई भी आसानी से फल तोड़ सकता है और जमीन पर गिरने के कारण फलों की बर्बादी नहीं होती है। लोगों की भागीदारी से गंगा नदी के किनारे बड़े पैमाने पर पौधा रोपण किया गया। अभियान के उपलक्ष्य में 100 से ज्यादा स्थानों पर औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश में इसे गंगा हरितिमा अभियान के साथ जोड़ा गया। इस दौरान मुख्यक रूप से कांजी, शीशम, फार्मेस, जामुन, अर्जुन, गुड़हल, सिरस, चितवन, आम, नीम, सेमल, जंगल जलेबी, गुलमोहर, कदम, सागवान, साल, माहोगनी, बड़, बांस, करोंदा, अश्वगंधा, करी पत्तार, जटरोफा, बेहेदा, धतुरा और सर्पगंधा जैसे पेड़ों के पौधे लगाए गए।

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