• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

कमल विहीन हुआ पौराणिक कमल ताल

17/04/21
in उत्तराखंड, नैनीताल
Reading Time: 1min read
590
SHARES
737
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
पर्वतीय क्षेत्रों में भू.जल के स्रोत भूगर्भ स्थिति के अनुसार बहते हैं। कहीं ये मौसमी होते हैं तो कहीं लगातार बहने वाले होते हैं। झील या ताल ऐसे ही स्रोतों में से एक है। ये भूमि से घिरे विशाल जलाशय होते हैं। उत्तराखंड अपनी झीलों या तालों के लिए प्रसिद्ध है। यहां कदम.कदम पर ताल मिलते हैं, जो अपने सौंदर्य से हमें प्रभावित करते हैं। लेकिन हर ताल का अपना एक इतिहास है और उसके साथ न जाने कितनी किंवदंतियां और किस्से जुड़े हैं। यहां शायद ही कोई इलाका हो जहां कोई झील अपने खास परिचय के साथ मौजूद न हो।

उत्तराखंड को देव भूमि भी कहा जाता है। उत्तराखंड प्राकृतिक सौंदर्य के साथ.साथ देव भूमि होने कारण पाप मुक्ति का भी बोध कराता है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ की झीलों में स्नान करने से इंसान पाप से मुक्ति पा जाता है। नैनीताल जनपद अपने नैसर्गिक सौंदर्य और झीलों के कारण देश.दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां घूमने के लिए हर वर्ष पर्यटक बड़ी तादात में पहुंचते हैं। हालांकि नैनीताल और भीमताल के अलावा जो झीले हैं, वे अधिक प्रचारित.प्रसारित न होने के कारण वहां पहुंचने वाले पर्यटकों की तादात काफी सीमित होती है। नैनीताल जिला अपने नैसर्गिक सौंदर्य और झीलों के कारण देश.दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां घूमने के लिए हर वर्ष पर्यटक बड़ी तादात में पहुंचते हैं। नौकुचियाताल नौ कोने वाली झील के किनारे में स्थित कमल ताल नाम के अनुरूप ही अपने वहां खिलने वाले कमल के नाम से प्रसिद्ध है। गर्मियों में पूरी झील कमल से भरी रहती है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। नौकुचियाताल को सनद सरोवर के नाम से भी की थी और प्रभु का ध्यान जाना जाता है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी के सनक, सनातन, सनंदन, सनत कुमार चार पुत्रों ने यहां तपस्या लगाया था। वहीं दूसरी धार्मिक मान्यता के अनुसार स्कंद पुराण में कमल ताल और नौकुचियाताल का उल्लेख मिलता है। नौ कोने में नौ ऋषियों के द्वारा तपस्या करने का उल्लेख है तो वहीं मान्यता है कि इस झील के नौ कोनों को कोई भी एक साथ नहीं देख सकता है।

कमल ताल के बारे में मान्यता है कि इसका जल हरिद्वार में हर की पैड़ी के समान है। इसके जल में स्नान करके लोग अपने कर्मों का प्रायश्चित करते हैं। जिन लोंगों पर गौ हत्या का पाप लगा होता है वह भी यहां स्नान करके गौ हत्या के पाप से मुक्त होने की मान्यता है। कमल ताल के किनारे छोटा सा मंदिर है जिसमें शादी, यज्ञोपवीत संस्कार आदि सभी धार्मिक आयोजन करने के लिये लोग दूर दूर से आते हैं। कमल ताल का पानी आस पास के क्षेत्रों में सिंचाई के लिये भी प्रयोग होता है। कभी कमलताल में खिले कमल को देखने के लिए पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ता था, वहीं अब हजारों की संख्या में पर्यटकों के वाहन यहां से गुजरने के बावजूद कमलताल वीरान रहता है। रखरखाव के अभाव में कमलताल झील अब वीरान हो गई है।

कमल ताल से लगे नौकुचिया ताल में तीन साल पहले पानी भरने के कारण यहां से ग्रास काॅर्प कमल ताल पहुंच गई और उसने धीरे धीरे कमल पौधों को नुकसान पहुंचाया। ग्रास कार्प अपने वजन से तीन गुना अधिक ग्रास को खाती है। इसी प्रवृत्ति के कारण उसने कमल ताल के अधिकांश कमल के पौधों को नीचे से काट दिया है। कमल ताल में खिले कमल का धार्मिक महत्व भी बहुत है। पिछले दशक में नौकुचियाताल झील में काई इत्यादि जलीय पौधों को खाने के लिए ग्राम कॉर्प मछलियां डाली गईं। इनकी वजह से कमल ताल में कमल के पौधों पर बुरा प्रभाव पड़ा। संभवतया वे पानी के साथ यहां पहुंचकर कमल के पौधों को नुकसान पहुंचाती हो। इस समस्या के समाधान के लिए नाले में जाली लगाई गई, जो कि अब टूट चुकी है। इस कारण ही पिछले करीब तीन वर्षों से कमल ताल में कमल के फूलों का खिलना लगातार कम हो रहा है। और इस वर्ष तो कमल के फूल खिले ही नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष जब प्रकृति कोरोना व लॉक डाउन के दौर में आत्म परिष्कार कर रही हैए और प्रकृति कई मायनों में अपने पुराने स्वरूप में लौट रही हैए फिर भी इस वर्ष कमल ताल में कमल नहीं खिल पाये हैं। यह पहला मौका है जब दशकों बाद कमल ताल में कमल नहीं खिले हैं। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार करीब एक किमी व्यास का कमल ताल पौराणिक तालाब है पर्यटन अधिकारी ने 2019.20 की योजना में बजट स्वीकृत होने पर झील पर कार्य करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब तक कोई कार्य नहीं हुआ। इस पर उन्होंने पुनः मुख्यमंत्री के समाधान पोर्टेल में इस बारे में शिकायत दर्ज कराई है। इस बारे में जिला पर्यटन अधिकारी ने कहा कि अवस्थापना संबंधी कार्य उनके स्तर पर नहीं होते हैं। कभी कमलताल में खिले कमल को देखने के लिए पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ता था, वहीं अब हजारों की संख्या में पर्यटकों के वाहन यहां से गुजरने के बावजूद कमलताल वीरान रहता है। रखरखाव के अभाव में कमलताल झील अब वीरान हो गई है कमलताल के अस्तित्व में एक बार खतरा मंडराने लगा है।

उपेक्षा का शिकार हुए कमल ताल के किनारे हरिद्वार की भांति और उसी की मान्यता के समान हर की पैड़ी नाम का धार्मिक स्थल है। गौ हत्या का प्रायश्चित इसी धार्मिक स्थल में किया जाता है। कमल ताल में खिलने वाले कमल की तुलना मानसरोवर में खिलने वाले कमल के समान है। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले दो साल से क्षेत्र में सफाई को लेकर बनाई गई समिति द्वारा झील की सफाई आदि की व्यवस्था की जाती रही है। लेकिन इसमें सीमित दायरे में ही झील की सफाई हो पाती है। कमलताल की व्यापक स्तर पर सफाई की जरूरत है। समिति के संयोजक ने सिचाई विभाग और नलकूप खंड हल्द्वानी को झील की वर्तमान स्थिति के लिये उत्तरदायी ठहराया है। ग्रामीणों ने बताया झील के पानी का प्रयोग खेती के लिए भी होता था। झील प्रदूषित होने के कारण खेती के लिए भी इसका पानी नुकसानदेह हो गया है। सरकारी विभाग की उदासीनता के चलते यह झील अस्तित्व खतरे में है।

Share236SendTweet148
Previous Post

ब्रेकिंग: संशोधित गाइडलाइन में नाईट कर्फ्यू का समय बढ़ा, देहरादून में रविवार को रहेगा कर्फ्यू

Next Post

औली, बदरीनाथ, हेमकुंड में हुआ ताजा हिमपात

Related Posts

उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने किया ढकरानी विद्युत गृह के आर.एम.यू. कार्यों का निरीक्षण

April 23, 2026
54
उत्तराखंड

जोशीमठ में 80 मीटर गहराई तक भी नहीं ठोस चट्टान!

April 23, 2026
31
उत्तराखंड

बेशकीमती कीड़ा जड़ी के लिए चीन की नजर उत्तराखंड पर

April 23, 2026
17
उत्तराखंड

वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का साहस हमें अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है : सुरेंद्र सिंह नेगी

April 23, 2026
23
उत्तराखंड

जनजागरूकता रैली के माध्यम से गूंजा मानव एकता का संदेश

April 23, 2026
29
उत्तराखंड

उपराष्ट्रपति ने बुनियादी ढांचे और सेवाओं को मजबूत करने में मुख्यमंत्री नेतृत्व की प्रशंसा की

April 23, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67674 shares
    Share 27070 Tweet 16919
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

यूजेवीएन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अजय कुमार सिंह ने किया ढकरानी विद्युत गृह के आर.एम.यू. कार्यों का निरीक्षण

April 23, 2026

जोशीमठ में 80 मीटर गहराई तक भी नहीं ठोस चट्टान!

April 23, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.