गृह वाटिका के जरिये डेंगू नियंत्रण संभव

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डा. हरीश चंद्र अंडोला
डेंगू एक ऐसी बीमारी हैं जो एडीज इजिप्टी मच्छरों के काटने से होता है। इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर पर चकत्ते बनने शुरू हो जाते हैं। जहां यह महामारी के रूप मे फैलता है वहां एक समय में अनेक प्रकार के विषाणु सक्रिय हो सकते हैं। डेंगू बुखार बहुत ही दर्दनाक और अक्षम कर देने वाली बीमारी है। इसमें मरीज के शरीर में दर्द बहुत ज्यादा होता है, इसलिए इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है। बरसात के मौसम में यह बीमारी आम हो जाती है, क्यों कि इस मौसम गंदगी की वजह से महामारी फैलने की समस्या ज्यादा रहती है। विषाणु जनित इस रोग को एंटीबायोटिक दवाइयों से ठीक नहीं किया जा सकता है। डेंगू से होने वाली अन्य बीमारियां डेंगू में कई तरह की जटिलताएं भी हैं। यह कई बार रक्तश्रावी डेंगू और डेंगू शॉक सिंड्रोम जैसे कई खतरनाक रूप धारण कर सकता है। डेंगू की वजह से कई बार शरीर में पानी की कमी, लगातार शरीर से खून निकलना, प्लेटलेट्स घटना, रक्तचाप कम होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, लीवर को क्षति पहुंचना इत्यादि प्रकार की बीमारियां होने लगती हैं। मच्छरों से छुटकारा पाने के लिए आप घर में रोजमेरी सिट्रोनेला ग्रास, गेंदा, तुलसी, नीम पौधे लगा सकते हैं। पीपरमिंट की मिंटी सुगंध उस हानिकारक केमिकल युक्त खुश्बू से लाख गुना अच्छी है जिसका प्रयोग आप मच्छर को भगाने के लिए करते हैं।
मलेरिया जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च में बताया गया है कि यह किस प्रकार से मच्छर भगाने में प्रभावशाली है। वैज्ञानिकों द्वारा किए गए रिसर्च के मुताबिक, अगर पीपरमेंट ऑयल को शरीर के खुले हुए हिस्से पर लगाया जाए तो मच्छर नजदीक नहीं आते। यहां तक कि यह मच्छर के लार्वा को भी मारते हैं। पीपरमिंट ऑयल और पानी के मिश्रण के छिड़काव से मच्छर और उसके लार्वा 24 घंटे के अंदर खत्म हो जाते हैं। तो अगर आपके यार्ड में मच्छर पनप रहे हैं तो पीपरमिंट का पौधा लगाकर उनसे छुटकारा पा सकते हैं। इसकी खुशबू भी बहुत असरदायक होती है। पौधा घर के आंगन और बालकनी में लगाने से उसकी महक से ही मच्छर भागते हैं। इतना ही नहीं इस पौधे से शरीर का कोई अंग छू जाए तो मच्छरों के काटने का असर नहीं होता है। प्राकृतिक होने के कारण इससे शरीर को कोई नुकसान नहीं होता है। हानिकारक केमिकल युक्त खुश्बू से लाख गुना अच्छी है उनकी खुशबू को बिल्कुल भी पंसद ना हो। नीम पौधे पत्तियों को आयुर्वेदिक और औषधीय गुणों से युक्त नीम के पौधे में मौजूद तत्व मच्छरों और कई कीड़े.मकोड़ों को दूर रखने में सहायक होते हैं। इनकी पत्तियों को चबाने से मच्छर नहीं काटते। इसके अलावा पत्तियों को अपने घर में कर सकते हैं। प्रदेश में 165 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें सर्वाधिक 161 मरीज जनपद देहरादून के हैं। वहीं ऊधमसिंह नगर में चार मरीजों की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। अब तक प्रदेशभर में 4243 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। जबकि आठ मरीजों की मौत हो चुकी है। अब तक के आंकड़ों के अनुसार डेंगू के सर्वाधिक 2768 मामले जनपद देहरादून में सामने आए हैं। यहां छह लोगों की मौत भी डेंगू से हो चुकी है। इसके अलावा नैनीताल में 1189, हरिद्वार में 146, ऊधमसिंह नगर में 90, टिहरी गढ़वाल में 15, पौड़ी गढ़वाल में 12, अल्मोड़ा में 9, रुद्रप्रयाग में छह, बागेश्वर व चमोली में तीन.तीन और चंपावत में दो लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। डेंगू जैसी अन्य बीमारियों के भी वाहक होते हैं।
उत्तराखंड को औषधि प्रदेश, यानी हर्बल स्टेट भी कहा जाता है। ऐसे में हमें पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए ताकि वक्त रहते हम बीमारियों से खुद को सुरक्षित रख सके। घर के आस पास मच्छर भगाने वाले पौधे लगाकर इनसे बच सक्ते ह

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