• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

बदहाल मजदूर, पैकेज और जर्जर अर्थव्यवस्था?

15/05/20
in उत्तराखंड, जॉब, दुनिया
Reading Time: 1min read
62
SHARES
78
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

शंकर सिंह भाटिया
कोरोनाकाल में देश के सामने अभूतपूर्व संकट खड़ा है। देश की अर्थव्यवस्था ध्वस्त होने के कगार पर पहुंच गई है। अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजदूर सड़क पर आ गए हैं। इन बद से बदतर हालात को संभालने के लिए प्रधानमंत्री ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। इतना बड़ा आर्थिक पैकेज संभवतः देश के इतिहास में पहली बार जारी किया गया है। इसके बावजूद दो विरोधाभाष सामने आ रहे हैं। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मजदूर सड़क पर आ गए हैं, वे बदहाल हैं और जिस करोना पर नियंत्रण का दावा सरकारें कर रही हैं, वह अब अचानक बहुत तेज गति से बढ़ने लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समय पर लाॅकडाउन का निर्णय लिया, इसलिए देश में चीन, यूरोप तथा अमेरिका जैसे हालात पैदा नहीं हो पाए। केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी, खुद प्रधानमंत्री और तमाम राज्य सरकारें देश में कोरोना नियंत्रण को लेकर ये बातें कहकर खुद अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। यदि यूरोप-अमेरिका से भारत की तुलना करेंगे तो पाएंगे कि हालात जरूर बेहतर हैं। लेकिन अचानक अब कोरोना संक्रमण में आई तेजी के लिए जिम्मेदार कौन है? विशेषज्ञ कहते आ रहे हैं कि जून-जुलाई में हालात और खराब होने वाले हैं, तब समय से पहले खुश होना अपने पैरों में कुल्हाड़ी मारने जैसा नहीं होगा?
यहां बीस लाख करोड़ के पैकेज को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सत्तारूढ़ पार्टी इसे आज तक का सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज बताते हुए खुश हो रही है। लेकिन विपक्ष की समझ में नहीं आ रहा है कि यह पैकेज किस तरह का है। विपक्ष का कहना है कि यह तो ऋण है, पैकेज कहां है? यदि हम मान लें कि सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा पैकेज दिया है तो आज की स्थिति में सबसे बड़े संकट में करोड़ों मजदूर पर है। जो लाॅकडाउन के तुरंत बाद सड़कों पर आ गए थे, लेकिन विभिन्न राज्यों की पुलिस ने डंडे के बल पर उन्हें जहां थे, वहीं रोक दिया था। उसके बाद लाॅकडान-3 में कुछ छूट के साथ लोगों को घरों तक जाने की छूट मिली तो करोड़ों मजदूर सड़कों पर आ गए। इसके दो कारण हो सकते हैं, पहला जहां मजदूर काम के लिए गए थे, अब कोरोनाकाल में उन्हें वहां अपना भविष्य सुरक्षित नहीं लग रहा है। दूसरा जिन राज्यों में दूसरे राज्यों के मजदूर रह रहे थे, वहां उन्हें खान पान तक की समुचित व्यवस्था नहीं मिल पा रही थी।
करोड़ों मजदूरों का सड़क पर आ जाना और लगातार हो रही दुर्घटनाओं में उनकी जान जाना आज देश का सबसे बड़ा तात्कालिक संकट है। यदि सरकार वास्तव में गंभीर है तो 20 लाख करोड़ के पैकेज में से सिर्फ एक लाख करोड़ इन मजदूरों को अपने घर पहुंचाने पर खर्च करे। देश में आवागमन के जितने भी संसाधन हैं, रेल, वाहन, बसें तथा दूसरे निजी वाहन जिनका उपयोग इन मजदूरों को ले जाने में सहायक हो सकता है, उन सभी का उपयोग उन्हें घर पहुंचाने के लिए किया जाए। अब यदि मजदूरों को घरों के लिए जाने को कह दिया गया है तो उन्हें इस तरह सड़कों, रेल की पटरियों पर अपने हालात में छोड़ देना सबसे बड़ा अपराध होगा।
कोराना संकट में सबसे बेहतर यही होता कि लाॅकडाउन का कड़ाई से पालन किया जाता। जो जहां है, वहीं रहता तो कोरोना की चेन आसानी से तोड़ी जा सकती थी, जैसा कि पहले चरण में देश करने में सफल हुआ भी है। लेकिन अब हालात हाथ से निकल चुके हैं। अब यदि सड़कों पर उतर आए मजदूरों को लाॅक करने की कोशिश की गई तो हालात ज्यादा खराब हो सकते हैं। अब इन करोड़ों मजदूरों को उनके घर पहुंचाना देश की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। क्योंकि विश्वास बहाली के लिए यह सबसे जरूरी हो गया है। लोग एक बार अपने घर पहुंच जाएंगे, आर्थिक पैकेज से उद्योग पटरी पर आ जाएंगे तो घरों में बेरोजगार मजदूर इनकी जरूरत के मुताबिक फिर से काम पर आ सकते हैं। लेकिन अब इन मजदूरों को रास्ते में रोकना संभव नहीं है। अब उन्हें उनके घरों तक पहुंचाना सबसे बड़ी जरूरत बन गई है। हालांकि इससे एक बार कोरोना की रफ्तार बढ़ेगी, अब इसे कोई रोक नहीं सकता है। इसलिए पैकेज की प्राथमिकता सड़कों, पटरियों पर उतर आए लोगों को घरों तक पहुंचाने की होनी चाहिए। सरकार को पैकेज का सबसे पहला यही उपयोग करना चाहिए। अन्यथा इस पैकेज का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। जिन मजदूरों के दम पर देश की अर्थव्यवस्था खड़ी होने की बात खुद प्रधानमंत्री कह रहे हों, उनके बदहालत से कोई अर्थव्यवस्था फिर से कैसे खड़ी हो सकती है? इससे तो मजदूरों की कमर ही टूट जाएगी, तब वे अर्थव्यवस्था को खड़ी करने में कैसे सहायक हो सकेंगे?

Share25SendTweet16
Previous Post

ब्रह्म मुहूर्त 4.30 बजे खुले विश्व प्रसिद्ध श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट

Next Post

भविष्य बदरी के भी कपाट खुले

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी ने सिख समाज के राष्ट्र निर्माण और तराई के विकास में योगदान को सराहा

September 10, 2026
5
उत्तराखंड

हिमालयी क्षेत्र में तेजी से हो रहे पर्यावरणीय और पारिस्थितिक बदलावों  त्रासदी का कारण!

September 10, 2026
6
उत्तराखंड

यूजेवीएन लिमिटेड में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती मनाई गई

September 10, 2026
6
उत्तराखंड

लोकगायक किशन महिपाल को डायट गौचर ने किया सम्मानित

September 10, 2026
3
उत्तराखंड

राजकीय महाविद्यालय तलवाड़ी में भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह उत्साह पूर्वक मनाया

September 10, 2026
5
उत्तराखंड

बधाण की राजराजेश्वरी नंदा देवी की यात्रा अपने छ्ठे़ पड़ाव सूना गांव पहुंची

September 10, 2026
5

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67734 shares
    Share 27094 Tweet 16934
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45793 shares
    Share 18317 Tweet 11448
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38077 shares
    Share 15231 Tweet 9519
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37456 shares
    Share 14982 Tweet 9364
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37380 shares
    Share 14952 Tweet 9345

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री धामी ने सिख समाज के राष्ट्र निर्माण और तराई के विकास में योगदान को सराहा

September 10, 2026

हिमालयी क्षेत्र में तेजी से हो रहे पर्यावरणीय और पारिस्थितिक बदलावों  त्रासदी का कारण!

September 10, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.