• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड भूस्खलन मानवीय हस्तक्षेप बना असली खतरा?

27/08/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
25
SHARES
31
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में उपचार के बाद अब उनकी निरंतर
निगरानी भी की जाएगी। इसके लिए उपचारित क्षेत्र में सेंसर लगाए
जाएंगे, जिससे वहां भूमि में होने वाली हलचल की पहले ही जानकारी
मिल सकेगी। नैनीताल की नैना पीक से यह शुरुआत होने जा रही है।
इसके लिए उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र ने कसरत
प्रारंभ कर दी है।यह किसी से छिपा नहीं है कि संपूर्ण उत्तराखंड आपदा
की दृष्टि से संवेदनशील है। हर वर्षाकाल में अतिवृष्टि के चलते भूस्खलन
से बड़े पैमाने पर जान-माल की क्षति राज्य को झेलनी पड़ रही है।
यद्यपि, सवेदनशील भूस्खलन क्षेत्रों का उपचार भी हो रहा है, लेकिन
कुछ समय ठीक रहने के बाद ये फिर से सक्रिय हो जाते हैं। इस सबको
देखते हुए सरकार अब भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के उपचार के बाद
उनकी निरंतरता में निगरानी पर विशेष जोर दे रही है। इसमें आधुनिक
तकनीकी का समावेश किया जाएगा। उत्तराखंड में लैंडस्लाइड जोन की
संख्या लगातार बढ़ रही है. स्थिति ये है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी
लैंडस्लाइड को लेकर उत्तराखंड शुरुआती 3 राज्यों में शामिल हैं. खास
बात ये है कि इसमें संवेदनशील लैंडस्लाइड जोन की भी अच्छी खासी

संख्या है, जो प्रदेश के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है.उत्तराखंड के ऐसे
कई क्षेत्र हैं, जो हर साल मानसून में सरकार के लिए चिंता बने रहते हैं.
हालांकि यहां प्राकृतिक आपदाओं का एक लंबा इतिहास मौजूद है,
लेकिन परेशानी इस बात की है कि हर मानसून एक नया क्षेत्र
लैंडस्लाइड के रूप में पहचान बना लेता है. भारतीय भूवैज्ञानिक
सर्वेक्षण ने भी राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे लैंडस्लाइड जोन चिन्हित किए हैं.
खास बात यह है कि सर्वेक्षण के बाद भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने जो
आंकड़ा सार्वजनिक किया है, वो देश के कई राज्यों के साथ ही उत्तराखंड
के लिए भी चिंता पैदा करने वाला है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण देश
में लैंडस्लाइड का पूर्वानुमान भी देता है. आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड
में 14,780 लैंडस्लाइड क्षेत्र मौजूद हैं. लैंडस्लाइड क्षेत्र के हिसाब से
उत्तराखंड देश में तीसरे नंबर पर आता है. इसके अलावा अरुणाचल
प्रदेश में 26,213 लैंडस्लाइड जोन मौजूद हैं, जो पहले नंबर है. इसी
तरह दूसरे नंबर पर हिमाचल प्रदेश है, यहां 17,102 लैंडस्लाइड जोन
हैं. उत्तराखंड की बात करें तो भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने उत्तराखंड
में कुल 39,009 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण किया.
इसमें 14,780 लैंडस्लाइड क्षेत्र मिले हैं. उत्तराखंड आपदा प्रबंधन
विभाग के सचिव ने बताया कि राज्य भी अपने स्तर पर लगातार
भूस्खलन क्षेत्र चिह्नित करता रहा है. राज्य में इस समय 53
लैंडस्लाइड क्षेत्र चिन्हित हैं, जिनका पूरा डाटा आपदा प्रबंधन के पास

मौजूद है. इन सभी लैंडस्लाइड क्षेत्रों पर सरकार की तरफ से काम
किया जा रहा है, ताकि उनकी संवेदनशीलता को कम किया जा सके.
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने भूस्खलन के खतरों और इसके लिए
पूर्वानुमान देने को लेकर एक सिस्टम तैयार किया है. भारतीय
भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट बताती है कि देश में 19 राज्य और केंद्र
शासित प्रदेशों का 4.2 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भूस्खलन के खतरों के
लिए संवेदनशील है. राष्ट्रीय स्तर पर 179 जिलों के हिस्सों में इस तरह
के भूस्खलन क्षेत्र मौजूद हैं. इसके लिए बाकायदा भूस्खलन क्षेत्र का
संवेदनशीलता के आधार पर मानचित्र भी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने तैयार
किया है. खास बात यह है कि देश में 87,474 सक्रिय भूस्खलन क्षेत्रों
की सूची भी भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने तैयार की है. उत्तराखंड के
लिए सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि हर मानसून में करीब 80 से
100 नए लैंडस्लाइड क्षेत्र तैयार हो रहे हैं. हालांकि कुछ पुराने
लैंडस्लाइड क्षेत्र इस दौरान कम प्रभावित हो जाते हैं, लेकिन इनके कभी
भी बढ़ने का खतरा बना रहता है. उत्तराखंड के मुख्य रूप से चार जिले
लैंडस्लाइड को लेकर सबसे ज्यादा प्रभावित दिखते हैं. इसमें रुद्रप्रयाग,
चमोली, उत्तरकाशी और टिहरी जिले शामिल हैं. हालांकि भूस्खलन को
लेकर राज्य के 9 जिलों में कहीं ना कहीं संवेदनशील भूस्खलन क्षेत्र
मौजूद हैं. भूस्खलन के क्षेत्र में कई संस्थाएं काम कर रही हैं. यहां बात
केवल उत्तराखंड की नहीं है बल्कि पूरे हिमालय रीजन में यदि किसी भी

तरह की छेड़छाड़ या बदलाव होता है तो भूस्खलन की आशंका बहुत
ज्यादा बन जाती है. इसके अलावा फॉरेस्ट फैलिंग के चलते भी पर्वतीय
क्षेत्रों में भूस्खलन के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि लगातार हो रहे विकास
कार्यों के कारण पहाड़ों में हो रही छेड़छाड़ ने ऐसी घटनाओं को और
बढ़ा दिया है.जियोलॉजिस्ट कहते हैं कि ये बात पूर्व में भी कही जाती
रही है कि जिन क्षेत्रों में जितना ज्यादा विकास कार्य हो रहे हैं, उन्हीं
क्षेत्रों में लैंडस्लाइड जोन भी बढ़ रहे हैं. इस दौरान कई जगह पर बड़े
लैंडस्लाइड क्षेत्र भी रिकॉर्ड हुए हैं, जो अक्सर राष्ट्रीय राजमार्गों के बंद
होने की भी वजह बने हैं.उत्तराखंड में पिछले एक दशक के भीतर कई
बड़ी योजनाएं संचालित की गई हैं. इन क्षेत्रों में भी लैंडस्लाइड रिकॉर्ड
किया जा रहे हैं. जानकार यह भी बताते हैं कि हिमालय क्षेत्र में बारिश
की मात्रा बढ़ रही है और यह पर्वतीय क्षेत्र के लिए भूस्खलन को लेकर
अच्छी बात नहीं है. जाहिर है कि इन स्थितियों के कारण भूस्खलन की
घटनाओं को बल मिला है और इस तरह के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है.
देश इस समय बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों से
जूझ रहा है. इनमें भूस्खलन एक गंभीर समस्या बन चुकी
है, हिमालयी राज्यों और पहाड़ी इलाकों में. लगातार हो रही भारी
बारिश, अंधाधुंध सड़क निर्माण और जंगलों की कटाई के कारण पहाड़
कमजोर होते जा रहे हैं. राज्य 15 पहाड़ी शहरों में उनकी वहन
क्षमता (जो किसी पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा धारण की जा सकने

वाली अधिकतम जनसंख्या है) को समझने के लिए नए सिरे से
मूल्यांकन शुरू करने वाला है। मसूरी और नैनीताल जैसे लोकप्रिय
पर्यटन स्थल इन 15 शहरों में शामिल हैं। अन्य शहरों में उत्तरकाशी,
पौड़ी, लैंसडाउन, कर्णप्रयाग, गोपेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़,
भोवाली, रानीखेत, कपकोट, चंपावत और धारचूला शामिल हैं।इस
कवायद की निरर्थकता पर संदेह जताते हुए, कुछ लोग कहते हैं कि
राज्य सरकार के पास अपनी क्षमता से ज़्यादा आबादी वाले शहरों में
भीड़भाड़ कम करने के संसाधन नहीं हैं। फिर भी, एक शुरुआत तो
हुई है और उम्मीद है कि उत्तराखंड अपनी गलतियों को दोहराने के
बजाय अपने अतीत से सीख लेगा।ऐसे बुनियादी ढाँचे के निर्माण का
कोई मतलब नहीं है जिसे टिकाऊ नहीं बनाया जा सकता। पहाड़ी
शहरों और कस्बों को बर्बादी की कगार पर धकेलने का कोई मतलब
नहीं है। मानव जीवन की कीमत पर बिना सोचे-समझे विकास का
वादा करने का कोई मतलब नहीं है। समय आ गया है कि सरकारें
ठोस शोध और सत्यापित आँकड़ों के आधार पर नीतियाँ बनाएँ,
इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। हालाँकि भूस्खलन पर नज़र रखने के
तरीके बेहतर हुए हैं, लेकिन इस तथ्य से कोई इंकार नहीं कर सकता कि
पहाड़ों का हमारा दोहन हमें ही नुकसान पहुँचा रहा है।
। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में*
*कार्यरत हैं।*

Share10SendTweet6
Previous Post

भूस्खलन रोकेंगे वृक्ष 130 ईको टीए (कुमाऊँ) की सराहनीय पहल

Next Post

आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड” का सपना हो रहा साकार” – सीएम धामी

Related Posts

उत्तराखंड

उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन की दर्दभरी तस्वीर और अपनों के इंतजार में गुजरती बुजुर्गों की जिंदगी को फिल्म ‘पायरे

November 3, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री ने खटीमा में 14.97 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण परियोजना का किया भूमि पूजन

November 3, 2026
8
उत्तराखंड

भुली (BHULI) कार्यक्रम के अंतर्गत 33 उद्यमियों का भौतिक सत्यापन संपन्न, 26 के दस्तावेज पूर्ण पाए गए

November 3, 2026
66
उत्तराखंड

डोईवाला: सिंचाई गूल की भूमि पर अतिक्रमण से किसान परेशान

November 3, 2026
9
उत्तराखंड

कनालीछीना में श्रमिक जागरूकता अभियान संपन्न

November 3, 2026
5
उत्तराखंड

मोहित बिष्ट को मिला ‘राष्ट्र का युवा पथप्रदर्शक सम्मान’

November 3, 2026
8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67760 shares
    Share 27104 Tweet 16940
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45794 shares
    Share 18318 Tweet 11449
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38082 shares
    Share 15233 Tweet 9521
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37462 shares
    Share 14985 Tweet 9366
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37388 shares
    Share 14955 Tweet 9347

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

उत्तराखंड के पहाड़ों से पलायन की दर्दभरी तस्वीर और अपनों के इंतजार में गुजरती बुजुर्गों की जिंदगी को फिल्म ‘पायरे

November 3, 2026

मुख्यमंत्री ने खटीमा में 14.97 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण परियोजना का किया भूमि पूजन

November 3, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.