डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
नीम करौली बाबा (नीब करौरी बाबा) का असली नाम ‘लक्ष्मी नारायण शर्मा’ है। उनका नाम आते ही देश-दुनिया में सबसे पहले उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम की तस्वीर सामने आती है। बाबा के भक्तों के लिए यह स्थान आज दुनिया के सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्रों में से एक है। लेकिन बाबा की पहचान और नाम की कहानी को पीछे ले जाएं तो रास्ता उत्तराखंड से निकलकर उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद तक पहुंचता है।भोपाल में रहने वाले नीब करौरी बाबा के पौत्र धनंजय शर्मा के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। श्री शर्मा के अनुसार बाबा के जीवन का अधिकांश समय यूपी के फर्रुखाबाद जिले के ‘नीब करौरी’ स्थान पर बीता है। यही स्थान बाबा की तपोस्थली रहा है। यहां प्राचीन हनुमान मंदिर और गुफा बाबा की साधना से जुड़े प्रमुख स्थल माने जाते हैं। इसी जगह के कारण बाबा का नाम ‘नीब करौरी बाबा’ हो गया था, बाद में अपभ्रंश के चलते वर्तमान में ‘नीम करौली बाबा’ कहकर बुलाते हैं।भोपाल में रहने वाले नीब करौरी बाबा के पौत्र धनंजय शर्मा के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। श्री शर्मा के अनुसार बाबा के जीवन का अधिकांश समय यूपी के फर्रुखाबाद जिले के ‘नीब करौरी’ स्थान पर बीता है। यही स्थान बाबा की तपोस्थली रहा है। यहां प्राचीन हनुमान मंदिर और गुफा बाबा की साधना से जुड़े प्रमुख स्थल माने जाते हैं। इसी जगह के कारण बाबा का नाम ‘नीब करौरी बाबा’ हो गया था, बाद में अपभ्रंश के चलते वर्तमान में ‘नीम करौली बाबा’ कहकर बुलाते हैं।नीम करौली बाबा की लोकप्रियता भारत तक सीमित नहीं रही। उनके भक्तों और उनसे जुड़े साहित्य में अमेरिकी उद्यमी स्टीव जॉब्स और अन्य विदेशी श्रद्धालुओं के कैंची धाम आने का उल्लेख मिलता है। बाबा के निधन के बाद भी कैंची धाम की लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।इसलिए अगर सवाल पूछा जाए कि नीम करौली बाबा का असली स्थान कहां है, तो इसका जवाब किसी एक धाम तक सीमित नहीं है।1964 में नीम करोली बाबा ने नैनीताल जिले के भवाली के पास क्षिप्रा नदी के किनारे कैंची धाम की स्थापना की. हनुमान मंदिर बनवाया. बाबा के मंदिर में एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स, मेटा (फेसबुक) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली जैसी प्रसिद्ध हस्तियां पहुंच चुकी हैं. कहा जाता है कि बाबा ने अपने जीवन में 100 से ज्यादा मंदिरों का निर्माण कराया. हर साल 15 जून को कैंची धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है. देश-विदेश से बाबा के भक्त आते हैं. विशाल मेले का आयोजन होता है. विशेष प्रसाद मालपुआ बांटा जाता है. लेकिन उनके नाम की उत्पत्ति और प्रमुख तपस्या से जुड़ी फर्रुखाबाद की नीब करौरी धाम की कड़ी बेहद महत्वपूर्ण है। आज कैंची धाम उनकी सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक पहचान है, जबकि नीब करोरी वह स्थान है जिसने बाबा के नाम और साधना की कहानी को एक अलग आधार दिया।कैंची धाम के नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी अलौकिक महिमा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाल मचा रही है. किताब में वर्णित कहानी के अनुसार, एक बार युवा अवस्था में बाबा लक्ष्मण नारायण शर्मा यात्रा के दौरान बिना टिकट ट्रेन में सवार हो गए थे. हनुमानअंश फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाए हुए है. दो करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म अब तक वर्ल्डवाइड ₹72.32 करोड़ का कलेक्शन कर चुकी है. फिल्म ने भारत में ₹61.38 करोड़ कमाए हैं. विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म 7 अगस्त को रिलीज हुई थी. फिल्म की कहानी कलयुग के ‘हनुमान’ नीब करौरी बाबा (आम बोलचाल में नीम करौली बाबा प्रचलित) के जीवन और उनकी अलौकिक महिमा पर बेस्ड है. फिल्म में एक्टर शोभिनव सत्या ने नीम करौली बाबा का किरदार निभाया है. बाबा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने साधु बनने के लिए घर छोड़ दिया. हालांकि पिता के कहने पर कुछ समय बाद वैवाहिक जीवन में लौट आए थे. आज देश-विदेश में बाबा के आश्रम हैं. एक और बाबा की जिंदगी पर बनी फिल्म दहाड़ रही है, दूसरी ओर इनकी संपत्ति पर विवाद खड़ा हो गया है. बाबा के छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा की 6 बेटियों ने फिरोजाबाद डीएम को पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि परिवार का घर और मंदिर ट्रस्ट को दान नहीं किया गया था. इसके बावजूद ट्रस्ट की ओर से संपत्ति पर कब्जा किया जा रहा है. परिवार ने ट्रस्ट के संचालन अपने हाथ में लेने की भी मांग की है. डीएम ने पूरे मामले में जांच के आदेश दिए हैं. बाबा नीम करौरी के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने हाल के दिनों में उनके जीवन को नई पीढ़ी के बीच चर्चा में ला दिया है. शुरुआत में अपेक्षाकृत सीमित चर्चा के बाद फिल्म ने दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की. सितंबर 2026 की हालिया रिपोर्टों के अनुसार फिल्म 100 करोड़ रुपए के आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है. फिल्म के कारण बाबा के जीवन से जुड़े स्थानों को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ी है. गांव के बुजुर्ग और खुद को बाबा के वंशज बताने वाले ध्रुव शर्मा ने बताया कि बाबा परोपकारी थे. गांव में गरीबों की सहायता करते थे. लोगों की आंखों को बनवाना, किसी की दावत में मदद करना हो, यह उनके प्रमुख काम थे. बाबा 1952 से लेकर 1972 तक गांव के प्रधान भी रहे. वह अक्सर गांव से बाहर ही रहते थे. गांव में कभी-कभार ही आते थे.उन्होंने बताया कि बाबा के चमत्कार की कई कहानियां उन्होंने सुनी हैं. इनमें फर्रुखाबाद के गांव नीम करौरी की रेल घटना भी शामिल है. गांव की एक बुजुर्ग महिला स्वदेश देवी ने बताया कि उन्होंने बाबा को तो नहीं देखा लेकिन उनकी पत्नी रामबेटी से तो उनकी रोज मुलाकात होती थी. उन्होंने बताया कि बाबा उनके जेठ लगते थे. बाबा के चमत्कार के किस्से भी उन्होंने खूब सुने है. देश-दुनिया में नीब करौरी (नीम करोली) बाबा के हजारों भक्त हैं. उत्तराखंड के नैनीताल का कैंची धाम हो या फिर उत्तर प्रदेश के मथुरा का वृंदावन, देश के कई हिस्सों में उनके मंदिर और तपस्थली भी मौजूद हैं. कैंची धाम में बाबा नीब करौरी महाराज भगवान हनुमान के अवतार के रूप में विराजमान हैं. इस मामले में श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बाबा की संपत्ति पर कब्जा करने के आरोपों से इनकार किया है. उनके मुताबिक, बाबा के मकान, मंदिर और डाक बंगलिया ट्रस्ट को दान में दिया गया था. अगर यह संपत्ति ट्रस्ट को नहीं दी गई होती, तो इतने बरसों से ट्रस्ट इसकी देखरेख क्यों करता.लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं











