• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं, लेकिन ऑफिस पर सालाना खर्च हो रहे करोड़

11/11/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
18
SHARES
23
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

राज्य गठन के 25 साल पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अब भी उत्तराखंड को लोकायुक्त की नियुक्ति का इंतजार है. हैरानी की बात ये है कि राज्य में राजनीतिक दल भ्रष्टाचार विरोध के बल पर सत्तासीन हुए, लेकिन 2013 के बाद किसी सरकार ने इस मुद्दे को अंजाम तक नहीं पहुंचाया. खास बात ये है कि अब रजत जयंती वर्ष से ठीक पहले लोकायुक्त पर सरकार ने एक बार फिर से कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं. राज्य गठन के बाद साल 2002 में उत्तराखंड में लोकायुक्त की स्थापना हुई. पहले लोकायुक्त बने. 2008 में ने पदभार संभाला. 2013 तक सेवाएं दीं. तब से अब तक यह पद खाली है. हालांकि, इस अवधि में लोकायुक्त कार्यालय चलता रहा. इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए. लोकायुक्त को सशक्त बनाने के प्रयास कई बार हुए, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण हर बार यह मामला अटक गया. साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री की सरकार ने मजबूत लोकायुक्त विधेयक विधानसभा में पारित किया. जिसके तहत मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और अफसर तक को दायरे में लाने का प्रावधान था. इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई थी. लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद 2014 में सरकार ने कमजोर लोकायुक्त विधेयक पारित किया. जिसमें मुख्यमंत्री को दायरे से बाहर रखा गया. यह विधेयक भी लागू नहीं हो सका. इसके बाद 2017 में सरकार ने नया लोकायुक्त विधेयक लाने की कोशिश की, लेकिन यह आज तक विधानसभा में लंबित है. दिलचस्प बात यह है कि भाजपा ने 2017 में चुनाव के दौरान 100 दिन में लोकायुक्त नियुक्त करने का वादा किया था. आज आठ साल बीतने के बाद भी यह वादा अधूरा है. सरकार का तर्क है कि उसकी कार्यप्रणाली ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ है, इसलिए लोकायुक्त की जरूरत नहीं है.  भ्रष्टाचार उत्तराखंड की राजनीति का स्थायी मुद्दा रहा है. 2002 से अब तक हर चुनाव में यह मुद्दा उठता रहा, लेकिन सत्ता में आने के बाद कांग्रेस हो या भाजपा, किसी ने भी प्रभावी लोकायुक्त गठन नहीं किया. मजेदार बात यह है कि चुनाव से ठीक पहले विपक्षी दल चुनावी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाकर सत्ताधारी दल को घेरने की कोशिश करता है. कभी छप्पन घोटाले तो कभी 100 से ज्यादा घोटाले की बात कह कर जनता के सामने सत्ताधारी दल पर जमकर प्रहार किए जाते हैं. इसी बल पर कई बार राजनीतिक दलों ने सत्ता भी हासिल की. मामला लोकायुक्त कार्यालय में कर्मचारियों की तनख्वाह और कार्यालय के दूसरे खर्चों से जुड़ा है. 2013 के बाद से लोकायुक्त की नियुक्ति ही नहीं की गई है. बिना लोकायुक्त की नियुक्ति के यह कार्यालय बिना काम सफेद हाथी बनकर रह गया है. सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार सरकार इस कार्यालय पर बिना काम के ही करोडों रुपए बहा रही है. आरटीआई एक्टिविस्ट और एडवोकेट ने कहा लोकायुक्त कार्यालय में खर्च हो रही बड़ी रकम की सुध लेने वाला कोई नहीं है. उत्तराखंड में भ्रष्टाचार हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है. साल 2002 के पहले चुनाव से लेकर 2022 तक के चुनाव में भ्रष्टाचार को राजनीतिक दलों की तरफ से मुद्दा बनाया जाता रहा है. हैरानी इस बात की है कि सरकार आने पर ना तो कांग्रेस और ना ही भाजपा मजबूत लोकायुक्त का गठन कर पाई है. इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री कहते हैं कि उन्होंने अपनी सरकार के दौरान लोकायुक्त पारित होने के बाद राजभवन तक पहुंचाया, लेकिन जनप्रतिनिधियों के दबाव में राज्यपाल ने इस पर मुहर नहीं लगाई. उधर जनता ने भी ऐसी ही पार्टी को सत्ता देकर इस पर कुछ भी कहने का हक खो दिया है.  उत्तराखंड उच्च न्यायालय में आज उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति न होने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन में एक हलफनामा प्रस्तुत किया। हलफनामे में कहा गया है कि सरकार ने लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए एक सर्च कमेटी का गठन किया है और पिछले महीने 22 फरवरी को इस कमेटी की एक बैठक भी हुई थी।मुख्य सचिव ने अदालत को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों का पूरी तरह पालन कर रही है। हालाँकि, मुख्य और न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने सरकार को चार हफ़्ते बाद होने वाली अगली सुनवाई में स्थिति की जानकारी देने का निर्देश दिया।गौरतलब है कि गौलापार, हल्द्वानी निवासी ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि लोकायुक्त की अनुपस्थिति के बावजूद, राज्य सरकार लोकायुक्त कार्यालय चलाने के लिए सालाना 2 से 3 करोड़ रुपये खर्च करती रही है, जबकि लंबे समय से लोकायुक्त नहीं है।जनहित याचिका में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि जहां कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाले सक्रिय लोकायुक्त हैं, वहीं उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के छोटे-मोटे मामले भी उच्च न्यायालय पहुंच जाते हैं, क्योंकि वहां लंबे समय से लोकायुक्त नहीं है।याचिका में यह भी चिंता जताई गई है कि सभी राज्य जाँच एजेंसियाँ सरकारी नियंत्रण में काम करती हैं, जिससे किसी भी स्वतंत्र संस्था को बिना सरकारी अनुमति के राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज करने का अधिकार नहीं है। सतर्कता विभाग, जिसे एक स्वतंत्र जाँच संस्था के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, पुलिस मुख्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन भी काम करता है, जिससे निष्पक्षता पर और भी सवाल उठते हैं।गौरतलब है कि इस संबंध में उच्च न्यायालय के कड़े निर्देश के बावजूद, सरकार ने न तो लोकायुक्त की नियुक्ति की है और न ही न्यायालय के आदेश का पूरी तरह पालन किया है। इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की गई है।यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में लोकायुक्त की स्थापना 2002 में एनडी तिवारी के नेतृत्व वाली राज्य की पहली निर्वाचित सरकार के कार्यकाल में हुई थी। तब से, केवल दो लोकायुक्त ही पद पर आसीन हुए हैं। वे हैं हालाँकि, 2013 के बाद से उत्तराखंड में किसी लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है। एक सशक्त लोकायुक्त की स्थापना के प्रयासों के बावजूद, यह प्रक्रिया विभिन्न बहानों के तहत 12 वर्षों से अधिक समय से रुकी हुई है। भ्रष्ट सरकार, अधिकारियों और नेताओं पर लगाम लगाने के लिए पहली बार 1969 में लोकसभा में लोकपाल बिल पेश किया गया था. जिसे 1971 से लेकर 2008 तक कई संशोधन के बाद इसे देश के लिए लोकपाल और राज्यों के लिए लोकायुक्त के रूप में लागू किया गया, लेकिन उत्तराखंड में लोकायुक्त का गठन न हो इसको लेकर सरकारों ने खूब मेहनत की. सरकारों की नाकामियों का ही नतीजा है कि राज्य गठन के 25 सालों बाद भी प्रदेश में लोकायुक्त का गठन नहीं हो पाया है.  देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को लगाम लगाने के लिए न्यायपालिका और चुनाव आयोग के बाद लोकपाल को तीसरी ऐसी स्वतंत्र संस्था के रूप में स्थापित किया गया था, जिसमें सरकार का कोई दखल ना हो और इसका कामकाज पूरी तरह से स्वतंत्र होकर सरकार, भ्रष्ट नेताओं और कर्मचारियों पर नजर रखा जा सके, लेकिन सरकारों को इस तरह की व्यवस्था बिल्कुल भी रास नहीं आई. उत्तराखंड में सरकारें बिना काम के भी करोड़ों खर्च कर देती हैं. यह बात सुनने में जरूर अजीब लग रही होगी, लेकिन लोकायुक्त कार्यालय के मामले में ये बात बिल्कुल सच है. खुद सरकारी दस्तावेज और आंकड़े भी इस तस्दीक कर रहे हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस राज्य में सालों से लोकायुक्त ही नहीं वहां एक साल में 2 करोड़ से ज्यादा का खर्चा लोकायुक्त कार्यालय पर हो रहा है राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है, जबकि संस्थान के नाम पर दो से तीन करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं। उत्तराखंड में कोई भी ऐसी स्वत्रंत जांच एजेंसी नहीं है जिसे यह अधिकार हो कि वह बिना शासन की पूर्वानुमति और दबाव के किसी भी राजपत्रित अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजिकृत कर सके। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है जिसका सम्पूर्ण नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास है। राजनीतिक रूप से भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा होने के बावजूद भी लोकायुक्त पर जनता का बेवकूफ राजनीतिक दल बनाते रहे। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*

Share7SendTweet5
Previous Post

मुख्यमंत्री धामी ने जनता मिलन कार्यक्रम में सुनी जन समस्याएं

Next Post

तंदुरुस्त शरीर और ऊर्जावान मन के मंत्र

Related Posts

उत्तराखंड

जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : गैरोला

July 23, 2026
12
उत्तराखंड

डोईवाला: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका, इस्तीफे की मांग

July 23, 2026
12
उत्तराखंड

अमानत में खयानत: जब रक्षक ही भक्षक बने

July 23, 2026
7
उत्तराखंड

प्रकृति संरक्षण की जिम्मेदारी मात्र सरकारी योजनाओं की ही नहीं अपितु समाज की भी हो – पद्मश्री डॉ. कल्याण सिंह रावत ‘मैती’

July 23, 2026
6
उत्तराखंड

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले- श्रमिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है सरकार

July 23, 2026
4
उत्तराखंड

डोईवाला: पेपर लीक के विरोध में कांग्रेस सेवा दल का मौन व्रत

July 23, 2026
19

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67713 shares
    Share 27085 Tweet 16928
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38069 shares
    Share 15228 Tweet 9517
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : गैरोला

July 23, 2026

डोईवाला: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका, इस्तीफे की मांग

July 23, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.