डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
मदरसा शिक्षा परिषद के अंतर्गत राज्य में लगभग 450 मदरसे पंजीकृत हैं, जो अपने सभी दस्तावेजों के साथ ही आय-व्यय का ब्योरा शासन को देते हैं। यही नहीं, राज्य में 500 से अधिक मदरसे बिना किसी मान्यता के चल रहे हैं। इन अवैध मदरसों पर पिछले एक माह से कार्रवाई चल रही है और अभी तक 159 मदरसे सील किए जा चुके हैं। यही नहीं, सरकार ने अवैध मदरसों को मिलने वाली फंडिंग की जांच के आदेश भी दिए हैं।इसी क्रम में अब मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था को सख्त किया जा रहा है। इसके लिए नियमावली में बदलाव किया जाएगा। मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से इसका प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। इसमें मदरसों की मान्यता के लिए जिला प्रशासन की भूमिका तय करने पर जोर दिया गया है। उत्तराखंड में संचालित अवैध मदरसों पर सख्त रुख अपनाने के बाद सरकार अब मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। मान्यता के लिए जिलाधिकारी की अनुमति जरूरी होगी। इसके साथ ही कुछ नए प्रविधान भी किए जाएंगे।उत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से इस सिलसिले में भेजे गए प्रस्ताव पर शासन मंथन में जुटा है। इसे वित्त, न्याय व कार्मिक विभाग को भेजा गया है। त्तराखंड में अवैध रूप से संचालित मदरसों के खिलाफ सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है. इसी क्रम में गुरुवार को उधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले में 18 मदरसों को सील किया गया है. जिसमें से उधमसिंह नगर में 16 और हरिद्वार जिले में 2 मदरसों पर सीलिंग की कार्यवाही की गई है. मुख्यमंत्री पहले ही इस बात पर जोर दे चुके हैं कि प्रदेश के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ और धर्म की आड़ में अवैध रूप से धंधा चलाने वाले लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. जिसके तहत उत्तराखंड में अभी तक 110 मदरसों को सील किया जा चुका है.प्रदेश में पिछले एक महीने से ही प्रशासन की ओर से अवैध मदरसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है. जिन मदरसों को सील किया जा रहा है वह मदद से बिना सरकार की अनुमति के ही संचालित किया जा रहे थे. शुरुआती दौर में राज्य सरकार की ओर से इन मदरसों को पहले चेतावनी भी दी गई थी लेकिन अब उत्तराखंड सरकार ने अवैध रूप से संचालित मदरसों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. साथ ही इन मदरसों पर कार्रवाई किए जाने को लेकर प्रशासन को खुली छूट दे दी. जिसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है. प्रदेश में पिछले एक महीने से अवैध मदरसों के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. प्रशासन ने इस बात की भी जांच शुरू कर दी है कि इतने बड़े पैमाने पर संचालित हो रहे इन अवैध मदरसों के पीछे किसका हाथ है. यहां पर छात्रों को किस प्रकार की तालीम दी जा रही थी रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर तीन, जसपुर एक और हरिद्वार में दो मदरसों को सील किया गया है. इससे पहले देहरादून, पौड़ी में भी बड़े स्तर पर अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 92 मदरसों को सील किया जा चुका है. अभी तक राज्य के विभिन्न जिलों में 160 से ज्यादा मदरसे सील किए जा चुके हैं। साथ ही, सरकार ने इन मदरसों को होने वाली फंडिंग की जांच कराने के आदेश जिलाधिकारियों को दिए है। यही नहीं, मदरसों को मान्यता देने की व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है।इसके साथ ही सरकार अब अवैध मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों की चिंता भी कर रही है। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के अनुसार बिना पंजीकरण व मान्यता के चल रहे अवैध मदरसों पर कार्रवाई की जा रही है। इसमें किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सील किए गए मदरसों में पढ़ रहे बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूलों अथवा मान्यता प्राप्त मदरसों में दाखिला दिलाने का निश्चय किया गया है। इस सिलसिले में जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर अनुरोध किया जाएगा। उत्तराखंड सरकार अब प्रदेशभर में अवैध मदरसों की फंडिंग की जांच कर रही है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी संदिग्ध मदरसों की आर्थिक गतिविधियों का ब्योरा इकट्ठा करें राज्य में किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. अब सरकार इन मदरसों की आर्थिक फंडिंग की गहन जांच कर रही है ताकि हवाला या विदेशी फंडिंग का पर्दाफाश हो सके.सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी मदरसे में गड़बड़ी पाई गई तो उसे तत्काल सील किया जाएगा और उसके संचालकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि प्रदेश में अवैध गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उत्तराखंड में 500 से अधिक अवैध मदरसे संचालित हो रहे हैं, जिनके बारे में प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन मदरसों का संचालन कैसे हो रहा है और शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन कहां से आ रहा है? सरकार को आशंका है कि इन मदरसों को धर्म की आड़ में हवाला या विदेशी फंडिंग के जरिए आर्थिक मदद दी जा रही है. जहां सरकार अपनी कार्रवाई को न्यायसंगत बता रही है, वहीं विपक्ष ने इस पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि यह कार्रवाई बच्चों की परीक्षा के समय की जा रही है, जिससे सरकार की मंशा पर संदेह होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ एक विशेष समुदाय को परेशान करने और वोट बैंक की राजनीति करने की कोशिश है.सरकार ने साफ किया है कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की जा रही है और इसका किसी धर्म या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है. अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर राजनीति कब तक गर्म रहती है और सरकार की आगे की रणनीति क्या होगी..लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं। *लेखक वर्तमान में दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।*