
देहरादून। कांग्रेस-भाजपा ने सल्ट विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। कांग्रेस ने गंगा पंचोली और भाजपा ने महेश जीना को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
गौरतलब है कि भाजपा ने मरहूम सुरेंद्र सिंह जीना के बड़े भाई महेश जीना को अपना प्रत्याशी घोषित कर सहानुभूति वोट लेने की कोशिश की है। पहले ही माना जा रहा था कि निवर्तमान विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के परिवार में से ही किसी को टिकट दिया जाएगा। महेश जीना पहले से ही पार्टी में सक्रिय रहे हैं। इसलिए पार्टी के साथ उनके एडजस्टमेंट में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। भाजपा में उनके सामने कोई दूसरा चेहरा इस उपचुनाव में नहीं था। आशा के अनुसार उन्हें भाजपा ने टिकट दिया है।
वहीं कांग्रेस ने गंगा पंचोली को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। गंगा पंचोली 2017 में सुरेंद्र सिंह जीना के खिलाफ चुनाव मैदान में खड़ी थी और उन्होंने सुरेंद्र सिंह जीना का कड़ा मुकाबला किया था। जबकि उन्हें अंतिम समय में पार्टी ने प्रत्याशी घोषित किया था, तैयारी के लिए उन्हें अधिक समय नहीं मिला था। लेकिन कांग्रेस के सामने पूर्व विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के औद्योगिक सलाहकार रहे रणजीत सिंह रावत के ब्लाक प्रमुख पुत्र भी टिकट पाने की दौड़ में एक कड़े प्रत्याशी के रूप में मौजूद थे। माना जा रहा है कि हरीश रावत गंगा पंचोली के समर्थन में थे, इसलिए भी गंगा पंचोली का पलड़ा भारी हो गया।
सल्ट विधानसभा चुनाव इस बार रोमांचक होने की संभावना दिखाई दे रही है। सुरेंद्र सिंह जीना को 2017 में कड़ी टक्कर देने वाली गंगा पंचोली पर दांव लगाकर कांग्रेस की नजर 2022 के चुनाव पर है, जब वह भाजपा को सत्ता से उखाड़ फैंकने की जुगत में है। जबकि भाजपा सुरेंद्र सिंह जीना की विरासत को बरकार रखना चाहेगी। ताकि पार्टी के प्रभाव को बरकरार रखते हुए प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन से पैदा हुई उहापोह में उसे एक मजबूत आधार मिल सके। देखना है किसे सफलता मिलती हैं। हालांकि इस दौर में अब तक इससे पहले दो उपचुनाव हो चुके हैं, दोनों चुनाव भाजपा प्रत्याशियों की मौत की वजह से हुए। थराली से मगन लाल, और पिथौरागढ़ से प्रकाश पंत की मौत हुई थी। दोनों मामलों में दिवंगत विधायकों की पत्नियों को भाजपा ने टिकट दिया था और दोनों सीटों पर उनकी पत्नियों ने जीत हासिल की थी। सल्ट में भी भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह जीना की मौत हुई है। इससे पहले उनकी पत्नी की मौत हो चुकी थी। इसलिए परिवार में उनके बड़े भाई ही चुनाव लड़ने की स्थिति में थे। हालांकि उनका बेटा में भी बालिग है, लेकिन बेटे से अधिक सशक्त प्रत्याशी भाई को माना गया, इसलिए पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है।











