• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

दून पुस्तकालय में मराठी नाट्य परंपरा पर व्याख्यान

12/03/26
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
10
SHARES
13
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

 

देहरादून,12 मार्च, 2026। दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं केन्द्र के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मराठी रंगभूमि पर एक व्याख्यान आयोजित किया गया. यह व्याख्यान युवा सामाजिक अध्येता अम्मार यासिर नक़वी द्वारा दिया गया। यह व्याख्यानशोध के साथ ‘क्षेत्रीय साहित्य का अंग्रेजी अनुवाद’ श्रृंखला का 9वां सत्र था। व्याख्यान में मराठी नाट्य परंपराओं के विकास की झलक प्रस्तुत करने के साथ वहां के भाषाई और सामाजिक इतिहास पर भी व्यापक प्रकाश डाला

अम्मार यासिर नक़वी ने इस व्याख्यान में मराठी रंगमंच की सामाजिक-राजनीतिक, लोक और विविधतापूर्ण उत्पत्ति का समग्र दृष्टिकोण तथा अन्य साहित्यिक अभिव्यक्तियों के साथ इसका अंतर्संबंध। आयातित परंपराओं व भौगोलिक क्षेत्रों से लेकर तमाशा, नाट्य संगीत, पारसी और आधुनिक रंगमंच जैसे रूपों तक इसके विकास की गहन पड़ताल सभागार में उपस्थित श्रोताओं के समक्ष रखी।

ऑडियो-विजुअल माध्यम से मराठी रंगमंच पर इस संवादात्मक सत्र में अम्मार ने इस व्याख्यान सत्र को नाटक के प्रारूप पर आधारित तीन भागों में विभाजित कर अपनी बात रखी।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने शास्त्रीय मराठी भाषा और संत तुकाराम तथा बाद में पेशवा शासन के दौरान विकसित हुई विद्रोही प्रकृति का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने दैनिक जीवन में नाटक के महत्व, नौटंकी, पर्दा और संवाद जैसे शब्दों और नाट्य परंपराओं में उनकी उत्पत्ति पर भी सम्यक प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भरत मुनि का नाट्यशास्त्र और अभिनवगुप्त की अभिनवभारती आधुनिक यूरोपीय रंगमंच से पहले के प्रेरणा के स्रोत रहे हैं और अब तमाशा, लैत और दशावला जैसी लोक परंपराओं ने आधुनिक नाटक की नींव रखी है।

व्याख्यान में नाट्य परंपराओं के मूल सिद्धांतों पर भी चर्चा की गई। विभिन्न क्षेत्रों और उनके अग्रदूतों, जैसे बंगाल में बाकल सरकार, हिंदी भाषी क्षेत्र में मोहन राकेश, कर्नाटक में करनाड और मराठी नाट्य जगत की विविधता का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। अम्मार ने आत्मनिरीक्षण और ब्रिटिश शासन के विरुद्ध प्रारंभिक विरोध के रूप में नाटकों के विकास के ऐतिहासिक कारणों पर भी प्रकाश डालने की कोशिस की ब्रिटिश शासकों द्वारा 1876 के नाट्य प्रदर्शन अधिनियम के माध्यम से नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास को भी रेखांकित किया गया। विकास की दो धाराओं पर बल देते हुए 1830 के दशक से वर्तमान तक के नाटकों का कालानुक्रमिक क्रम, प्रारंभिक यक्षगान-प्रेरित नाटक, पौराणिक नाटक, ‘किताबी नाटकों’ का उदय, शेक्सपियर के नाटक, बाल गंधर्व जैसे शास्त्रीय संगीतकारों के समावेश वाले संगीत नाटक और आधुनिक नाटक को भी रेखाकिंत किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मराठी नाटक जगत को जो चीज खास बनाती है, वह है समानांतर परंपराओं का अस्तित्व, जो फुले और अंबेडकर से प्रेरित नाटकों से लेकर तिलक के राजनीतिक नाटकों, पारसी थिएटर, मुंबई के औद्योगिक केंद्र में श्रमिकों के नाटकों और आधुनिक प्रयोगात्मक नाटकों तक फैली हुई हैं।

अंतिम सत्र में उन्होंने दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से दिखाया कि कैसे विष्णुदास भावे और उनकी ‘सीता स्वयंवर अख़्यार’ से लेकर अन्ना साहब किर्लोस्कर और उनके नाटक मंडली राम गणेश गडकन तक, और आधुनिक तिकड़ी विजय तेंदुलकर, मनीष एलकुंचवार और सतीश अलेकर तक, प्रत्येक लेखक अपने प्रभाव से साहित्य को आकार देने का प्रयास किया।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में चन्द्रशेखर तिवारी, कार्यक्रम अधिकारी ने अतिथि कक्ता साहित सभागार में उपस्थित लोगों का स्वागत किया और अम्मार नकवीं द्वारा प्रस्तुत दक्षिण व पूर्वोत्तर भारतीय भाषा – साहित्य श्रृखंला के नवें एपिसोड के लिए उन्हें शुभकामना दी और कहा अन्य भारतीय साहित्य,भाषा के सामाजिक इतिहास पर जानकारी प्रदत्त करने का उनका यह प्रयास महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान साहब नकवी, पुस्तकालय अध्यक्ष डाॅ. डी. के. पाण्डे, सुंदर सिंह बिष्ट, जगदीश महर, रंगकर्मी,पंकज पाण्डे,नवल किशोर शर्मा, के बी नैथानी, देवेन्द्र काण्डपाल, विजय भट्ट, योगेन्द्र सिंह नेगी, जगदीश बादला,राकेश कुमार सहित पाठकगण, लेखक व साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे ।

Share4SendTweet3
Previous Post

बोर्ड परीक्षा केंद्रों का अधिकारियों ने किया निरीक्षण धारचूला में अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई

Next Post

उत्तराखंड में पलायन बनी समस्या

Related Posts

उत्तराखंड

मुख्यमंत्री धामी की घोषणा, मिली मंजूरी महाबगढ़ मंदिर का होगा सौंदर्यीकरण

August 4, 2026
8
उत्तराखंड

डोईवाला: पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को दी श्रद्धांजलि

August 4, 2026
20
उत्तराखंड

डोईवाला: सौंग नदी का अस्थायी सिंचाई बांध टूटा, 15 हजार से अधिक किसान प्रभावित

August 4, 2026
73
उत्तराखंड

ई-कचरे को रोज़गार के बेहतर अवसरों में बदलने पर ज़ोर

August 4, 2026
10
उत्तराखंड

स्वर्गीय सोबन सिंह जीना कुशल वक्ता, कूटनीतिज्ञ के अलावा पर्वतीय विकास के पैरोकार भी रहे

August 4, 2026
7
उत्तराखंड

पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन के साथ देवभूमि ने किया शिवभक्त कांवड़ियों का अभिनंदन

August 4, 2026
6

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67716 shares
    Share 27086 Tweet 16929
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45786 shares
    Share 18314 Tweet 11447
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38072 shares
    Share 15229 Tweet 9518
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37453 shares
    Share 14981 Tweet 9363
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37370 shares
    Share 14948 Tweet 9343

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

मुख्यमंत्री धामी की घोषणा, मिली मंजूरी महाबगढ़ मंदिर का होगा सौंदर्यीकरण

August 4, 2026

डोईवाला: पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को दी श्रद्धांजलि

August 4, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.