• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

मायके में गंगा-यमुना का बुरा हाल: डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला

26/06/24
in उत्तराखंड
Reading Time: 1min read
73
SHARES
91
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

ब्यूरो रिपोर्ट। गंगा मैया में जब तक पानी रहे, मेरे सजना तेरी जिदगानी रहे.. उत्तराखंड की बड़ी त्रासदी यह मानी जाती है कि यहां का पानी और यहां की जवानी यहीं के काम नहीं आते. राज्य और केंद्र में सत्ता रही  दोनों दावे करते रही है कि यह स्थिति बदलेगी, लेकिन एक हज़ार से ज़्यादा छोटी-बड़ी नदियों वाले इस पहाड़ी राज्य में गर्मियां आते ही लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता है. हालत यह है कि प्रशासनिक लापरवाही और दीर्घकालिक योजनाओं के अभाव में गर्मियां आते ही उत्तराखंड में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है. हर साल तस्वीर एक जैसी ही होती है और इस बार भी कोई हालत में कोई बदलाव आता नहीं दिख रहा है.गंगा, यमुना जैसी सदाबहार नदियों वाले उत्तराखंड में प्राकृतिक जलस्रोतों के संव‌र्द्धन के प्रति सरकारी तंत्र की उदासीनता पेयजल संकट को बेकाबू करती दिख रही है। एक ओर जहां भूजल का स्तर तेजी से नीचे की ओर लुढ़क रहा है, वहीं रेन वाटर हार्वेस्टिंग की दिशा में नाकाफी प्रयास भी इस समस्या को विकराल रूप देते जा रहे हैं। प्रदेश के तीन मैदानी जिलों में राष्ट्रीय भूजल बोर्ड के एक अध्ययन में यह चिंताजनक तस्वीर सामने आ चुकी है। तीन जिलों के 18 में से सात ब्लॉकों में भूजल की उपलब्धता व दोहन के बीच सिमटता फासला खतरे के निशान के करीब जा पहुंचा है। हिमालयी ग्लेशियर से निकलने वाली गंगा व यमुना जैसी कई सदाबहार नदियां होने के बावजूद उत्तराखंड के कई इलाके प्यासे हैं। वजह यह है कि बढ़ती आबादी के साथ पेयजल की मांग बेतहाशा ढंग से बढ़ रही है, मगर प्राकृतिक जलस्रोत सूखते जा रहे हैं। जलस्रोतों के संव‌र्द्धन व रिचार्ज की तमाम सरकारी कोशिशें धरातल पर सुखद नतीजों में तब्दील नहीं हो पा रहीं। राज्यमें प्रतिवर्ष औसतन 1100 मिली मीटर बारिश होती है, मगर बारिश के इस पानी का राज्य में समुचित उपयोग करने की ठोस प्रणाली अब तक विकसित नहीं हो पाई। राष्ट्रीय भूजल बोर्ड भी मानता है कि यदि उत्तराखंड में बारिश के पानी का 20 फीसद हिस्सा इस्तेमाल कर लिया जाए तो राज्य में पेयजल संकट जैसी कोई स्थिति ही पैदा न हो, मगर रेन वाटर हार्वेटिंग की दिशा में राज्य में अब तक के प्रयास नगण्य ही हैं। इसके नतीजे अब राष्ट्रीय भूजल बोर्ड द्वारा तीन जिलों किए गए अध्ययन की रिपोर्ट में साफ परिलक्षित भी हो रहे हैं। देहरादून, ऊधमसिंहनगर व हरिद्वार जिलों के 18 ब्लॉकों में हुए इस अध्ययन में सात ब्लॉक में भूजल की उपलब्धता व दोहन के बीच का फासला दो हजार हेक्टेयर मीटर से भी कम रह गया है। राष्ट्रीय भूजल बोर्ड का मानना है कि इस संकट से निपटने के लिए नियोजित विकास व केंद्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा तैयार वाटर रेगुलेशन को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। नए-पुराने उद्योगों के साथ ही होटल,आवासीय कालोनियों व वाटर पार्क जैसी अवस्थापनाओं में पेयजल का दोहन तय मानकों के अनुसार सुनिश्चित कराना होगा। दूसरी ओर, प्राकृतिक जल स्रोतों के संव‌र्द्धन के लिए उनके कैचमेंट एरिया के ट्रीटमेंट और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की दिशा में भी कारगर कदम उठाने होंगे। दरअसल, इस बार कमजोर मानसून के कारण भी यह हालत बने हैं। नदियों में जलस्तर घटा है तो प्राकृतिक नाले व पंदेरे भी अपेक्षाकृत कम पानी दे रहे हैं। इसके अलावा योजनाओं की समय से मरम्मत न होने के कारण इनसे भी पानी मिलने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। स्थिति यह भी है कि आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई कई पेयजल योजनाएं अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हो पाई हैं। इससे भी पेयजल की समस्या बढ़ रही है। यही कारण है कि पर्वतीय जिलों में अभी भी लोगों को पानी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रदेश में पारा लगातार उछाल मार रहा है, जंगल सुलग रहे हैं, इससे पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल संकट की आशंका लगातार गहरा रही है।.लेखकके व्यक्तिगत विचार हैं दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं।

Share29SendTweet18
Previous Post

जखोली बीडीसी की बैठक में जन प्रतिनिधियों द्वारा विद्युत,बिजली, पानी,सड़क से जुड़े 62 प्रस्ताव सदन में रखे गए जिन्हें संबंधित विभागों को किया गया प्रेषित

Next Post

मुख्यमंत्री ने लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला से भेंट कर उन्हें दूसरे कार्यकाल की दी बधाई

Related Posts

उत्तराखंड

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में योगाभ्यास एवं योगा मैट वितरण कार्यक्रम आयोजित

June 18, 2026
5
उत्तराखंड

डोईवाला: पेट्रोनेट एलएनजी के सहयोग से सिपेट में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम

June 18, 2026
27
उत्तराखंड

डोईवाला: नव निर्मित मंदिर में मूर्ति स्थापना एवं प्राण प्रतिष्ठा संपन्न

June 18, 2026
56
उत्तराखंड

दिव्यांगजनों को व्हील चेयर व सहायक उपकरण किए वितरित

June 18, 2026
6
उत्तराखंड

कोटद्वार-गोपेश्वर एवं कोटद्वार-ऋषिकेश एम्स हेतु 2 रोडवेज बस सेवा का शुभारंभ, विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खण्डूडी भूषण ने दिखाई हरी झंडी

June 18, 2026
18
उत्तराखंड

उत्तराखंड कैबिनेट में लिये गये तेरह अहम निर्णय’

June 18, 2026
9

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67700 shares
    Share 27080 Tweet 16925
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45782 shares
    Share 18313 Tweet 11446
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38060 shares
    Share 15224 Tweet 9515
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37448 shares
    Share 14979 Tweet 9362
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37338 shares
    Share 14935 Tweet 9335

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में योगाभ्यास एवं योगा मैट वितरण कार्यक्रम आयोजित

June 18, 2026

डोईवाला: पेट्रोनेट एलएनजी के सहयोग से सिपेट में रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम

June 18, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.