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कांवड़ यात्री गंगा घाटों पर छोड़ गए लाखों मीट्रिक टन कचरा

12/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून, हरिद्वार
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों शिव भक्त कांवड़िए पवित्र गंगा जल लेने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार पहुंचे, अब सालाना कांवड़ यात्रा खत्म होने के बाद शहर उस हजारों मीट्रिक टन कचरे से जूझ रहा है जो कांवड़िए छोड़ गए हैं। शहर के लोग और हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं की शिकायत है कि गंगा के तट, सड़कें और यहां तक कि शहर की ओर जाने वाले हाईवे पर हर तरफ गंदगी दिख रही है, कई लोगों का कहना है कि पूजा के पवित्र स्थलों को बेहतर रखरखाव की जरूरत है।जिला प्रशासन का कहना है कि वह पहले से ही कचरा हटाने के काम में लगा हुआ है, साथ ही वो भरोसा दिला रहा है कि जल्द ही पूरा कचरा हटा लिया जाएगा और हरिद्वार फिर से साफ-सुथरा नजर आएगा। कांवड़ यात्रा के दौरान देश भर से लाखों कांवड़िए और श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे, कांवड़िए पवित्र गंगा जल कलशों में इकट्ठा कर उसे अपने गृहनगर ले जाते हैं और शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।श्रद्धालुओं का कहना है कि “थोड़ा सा प्रशासन को देखना चाहिए इसके बारे में ना, थोड़ा साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए और जितनी भी यहां गंदगी है और लोग यहां पान-बीड़ी-गुटखे खा रहे हैं, जो मान-मर्यादा भंग कर रहे हैं उनके बारे में थोड़ा सा सोचना चाहिए क्योंकि ये देखो एक सामाजिक स्थल है और इसके बारे में अगर थोड़ा सा जागरुक किया जाए तो अच्छा होगा क्योंकि ये यहां एक स्थल है जहां स्नान और जो भी पूजा-पाठ करनी होती है, उसके बारे में मैं ये बोलूंगा कि थोड़ी साफ-सफाई का बहुत ज्यादा ध्यान रखना चाहिए।”“गंदगी तो बिल्कुल होना नहीं चाहिए क्योंकि गंदगी से आदमी का ये फैलता है इसलिए थोड़ा साफ-सफाई यहां के प्रशासन का कर्तव्य है कि गंगा नदी में साफ-सफाई होना चाहिए क्योंकि शरीर के लिए भी बहुत खराब है। गंदगी मेन आदमी लोग ही करता है मतलब सफाई जो कल हो रहा था, हमने देखा कि सफाई अच्छे से हुआ, गंदगी ज्यादा हो गया इसलिए थोड़ा दिक्कत लगता है। यही बस है, बाकी अच्छा लगा बहुत अच्छा लगा आकर यहां पर।”नगर आयुक्त, हरिद्वार “में जो कूड़ा बचा है वो हम सफाई करा रहे हैं। कल एक्चुअली कल रात में ही हमारे सारे घाट क्लियर हो गए थे। एक विष्णु घाट और बिरला घाट में थोड़ा कूड़ा पड़ा है अदरवाइज ऑलमोस्ट सारे घाट क्लियर हैं। आज का जो हमारा लक्ष्य है वो यही है कि जो हमारे मेन पार्किंग एरिया जहां पर शॉप्स लगती हैं, जहां पर एक्सेसेबल भी नहीं होता है कई बार, वहां पर आज पूरा दिन लगके हम साफ करेंगें।”इस बार कांवड़ मेले में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरे मेला क्षेत्र में हर ओर शिवभक्तों की भीड़ नजर आई। गंगा से जल भरकर अपने गंतव्य की ओर रवाना होने वाले कांवड़ियों की संख्या 4 करोड़ 80 लाख 40 हजार तक पहुंच गई। अंतिम दिन मंगलवार को ही 36 लाख 62 हजार कांवड़िये हरिद्वार से जल लेकर रवाना हुए।पुलिस-प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, 30 जुलाई से शुरू हुए कांवड़ मेले के दौरान हरिद्वार, कनखल, ज्वालापुर, सप्तऋषि, हरकी पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार शिवभक्तों का दबाव बना रहा। भगवा रंग में रंगी धर्मनगरी में बम-बम भोले और हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।कांवड़ मेला संपन्न होने के बाद हरिद्वार में करीब सात हजार मीट्रिक टन कूड़ा निकला। शहर को छोड़कर समूचे जिले में फैले कचरे को साफ करने के लिए प्रशासन ने 12 से 18 अगस्त तक विशेष सफाई अभियान चलाने का निर्णय लिया है। वहीं, नगर आयुक्त ने शिवरात्रि की देर शाम आरती के बाद खाली हुए घाट पर सफाई कर्मियों के विशाल समूह को उतार दिया।मंगलवार की पूरी रात और बुधवार की सुबह तक घाटों की सफाई का अभियान चलेगा। वहीं दिन में शहर के गलियों और वार्डों में टीम रवाना की जाएगी। 12 दिन की कांवड़ यात्रा के दौरान देशभर से आए कांवड़ यात्रियों ने भारी मात्रा में कूड़ा छोड़ा है। नगर आयुक्त के अनुसार, डाक कांवड़ के दो दिनों में ही पूरे शहर में 1700 मीट्रिक टन कूड़ा फैला। नगर निगम दिन-रात अभियान चलाकर सफाई में जुटा है। सफाई कर्मियों का समूह सबसे पहले घाटों पर उतरा। शिवरात्रि की संध्या बेला में आरती के बाद जब घाट खाली हुए, तब कचरे की वास्तविक स्थिति सामने आई।इस वर्ष श्रद्धालुओं की ओर से छोड़े गए करीब दो हजार मीट्रिक टन से अधिक कपड़ों को रिसाइकल कर कपास तैयार किया जाएगा। कचरा एकत्र करने के साथ ही सूखा, गीला कूड़ा, प्लास्टिक और कपड़ों को अलग-अलग कर निस्तारण के लिए भेजा जा रहा है।कांवड़ यात्री गंगा घाटों पर छोड़ गए लाखों मीट्रिक टन कचरा। नगर निगम के सामने चुनौती अंतिम तीन दिन की कावड़ यात्रा ने छोड़ा लाखों मीट्रिक टन कचरा। इस बार नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ‘लाइनर बैग प्लस ड्रोन निगरानी मॉडल’ लागू किया, जो देशभर में चर्चा का विषय बना है। हर 6 घंटे में हर की पौड़ी और आसपास के क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण किया गया था। ड्रोन और सीसीटीवी के माध्यम से मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही थी ताकि सफाई कार्य सुचारु रूप से चल सके। इस पहल की स्थानीय व्यापारियों और श्रद्धालुओं ने सराहना की है।  प्लास्टिक की थैलियों और खाली बोतलों के साथ-साथ कांवड़िया समुदाय के लोग कपड़े और जूते भी छोड़ गए हैं। उन्होंने कहा, “अब से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को शहर की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही पॉलिथीन की थैलियां बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”ऐसा ही एक अभियान शनिवार को हरिद्वार में चलाया जाएगा, जिसमें हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण भी शामिल होगा। हरिद्वार के आम नागरिकों के साथ-साथ कई सामाजिक सेवा संगठन भी इसमें भाग लेंगे। स्वच्छताग्राहियो का सबसे अहम काम गंगा नदी की सफाई है। वे घाट पर नदी में फूल माला और कचरा डालने वालों को रोक रहे हैं। इसके साथ ही नदी में नाव के जरिए लगातार जाल डाल कर उसे साफ कर रहे हैं।अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य का कहना है कि शाही स्नान के दौरान मेला परिसर को साफ रखना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ। ऑन लाइन मॉनिटरिंग टीम और सफाईकर्मियों की मेहनत से हमें सफलता मिली है। यह अब का सबसे स्वच्छ कुंभ आयोजन है। कांवड़ मेले के दौरान किसी भी जगह साफ-सफाई करने की जगह ही नहीं बची थी. लेकिन कांवड़ मेला समाप्त होते ही निगम द्वारा युद्धस्तर पर सफाई का काम शुरू कर दिया गया है. पूरे नगर निगम क्षेत्र को 15 जोन में बांट दिया गया है, जिसमें प्रत्येक जोन पर एक सेनेटरी इस्पेक्टर सुपरवाइजर के साथ 50 कर्मचारियों को तैनात कर दिया गया है.सफाई का यह काम दिन ही नहीं बल्कि रात में भी तब तक लगातार किया जाएगा, जब तक क्षेत्र में फैले कूड़े को पूरी तरह से साफ न कर दिया जाए. क्योंकि अभी भी घाटों पर कांवड़ियों की थोड़ी भीड़ है, जिस कारण कई जगह ऐसी है. जहां पर कूड़ा उठाने के लिए वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं. दिन में फैले हुए कूड़े को एक जगह एकत्र कराया जा रहा है, जिसे रात में वाहनों द्वारा उठा लिया जाएगा. सफाई का यह काम दिन ही नहीं बल्कि रात में भी तब तक लगातार किया जाएगा, जब तक क्षेत्र में फैले कूड़े को पूरी तरह से साफ न कर दिया जाए. क्योंकि अभी भी घाटों पर कांवड़ियों की थोड़ी भीड़ है, जिस कारण कई जगह ऐसी है. जहां पर कूड़ा उठाने के लिए वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं. दिन में फैले हुए कूड़े को एक जगह एकत्र कराया जा रहा है, जिसे रात में वाहनों द्वारा उठा लिया जाएगा..लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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