हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली। थाना पुलिस थराली ने ऑपरेशन सकुशल घर वापसी के तहत कड़ी मेहनत के बाद दो नाबालिगों को हरिद्वार से बरामद कर सकुशल परिजनों को सौंप दिया हैं। परिजनों ने नाबालिगों की सकुशल बरामदगी पर उत्तराखंड पुलिस का आभार व्यक्त किया हैं। मिली जानकारी के अनुसार पढ़ाई के दबाव और परिजनों की नाराजगी के डर से घर छोड़कर हरिद्वार भागे दो नाबालिगों को थराली पुलिस ने एक सटीक और संवेदनशील ऑपरेशन के जरिए सकुशल ढूंढ निकाला। करीब आठ दिन तक चले इस सघन अभियान में पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और 150 से ज्यादा होटलों, धर्मशालाओं में तलाशी अभियान चलाया। बताया गया कि 24 अप्रैल को दो अलग-अलग परिवारों ने थाना थराली में सूचना दी कि मोहन सिंह पुत्र गौर सिंह एवं देव सिंह पुत्र भुवन बिष्ट दो 14 वर्षीय ग्राम निवासी चौण्ड़ा 23 अप्रैल को स्कूल ड्रेस में घर से निकले थे, लेकिन वें वापस नहीं लौटे। परिजनों ने रिश्तेदारों और आसपास खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। सहपाठियों से पूछताछ में सामने आया कि दोनों बच्चे स्कूल से नाम कटने और डांट के डर से मानसिक तनाव में थे और घर न लौटने की बात कह रहे थे।मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना थराली में बीएनएस की धारा 137(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए बच्चों की बरामदगी के लिए विशेष टीम का गठन किया। पुलिस उपाधीक्षक कर्णप्रयाग त्रिवेन्द्र सिंह राणा के पर्यवेक्षण और थानाध्यक्ष विनोद चौरसिया के नेतृत्व में टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। जांच के दौरान पुलिस ने ग्वालदम से अल्मोड़ा तक करीब 30 सीसीटीवी कैमरे खंगाले, जिसमें बच्चों के बस से अल्मोड़ा जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने हल्द्वानी और देहरादून तक बस चालकों व परिचालकों से पूछताछ की। देहरादून में पता चला कि बच्चे रास्ते में हरिद्वार उतर गए थे। इसके बाद पुलिस टीम परिजनों को साथ लेकर हरिद्वार पहुंची और श्रवणनाथ नगर, शांतिकुंज व भूपतवाला क्षेत्र में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। 1 मई को भूपतवाला क्षेत्र के एक ढाबे में भोजन करते समय दोनों बच्चों की पहचान हुई। परिजनों द्वारा पुष्टि के बाद दोनों को सकुशल बरामद कर लिया गया। बच्चों ने बताया कि वे अपनी पॉकेट मनी के सहारे हरिद्वार में छिपकर रह रहे थे। इस ऑपरेशन के बाद पुलिस ने दोनों बच्चों को सुरक्षित उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया। अपनों को वापस पाकर परिवार भावुक हो उठा और पुलिस टीम का आभार जताया। चमोली पुलिस ने अभिभावकों से अपील की कि वें बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार रखें। पढ़ाई का दबाव बनाने के बजाय उनकी भावनाओं को समझें, क्योंकि मानसिक तनाव में बच्चे गलत कदम उठा सकते हैं।











