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रोपवे तय कर सकेंगे 9 घंटे की दूरी को मात्र 36 मिनट में!

26/12/25
in उत्तराखंड, देहरादून
Reading Time: 1min read
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
रोपवे परियोजना से सुरक्षित और सहज होने जा रही पवित्र धाम केदारनाथ व हेमकुंड साहिब यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। इन परियोजनाओं में देश में पहली बार सबसे सुरक्षित व उन्नत ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला रोपवे तकनीक (3एस) का प्रयोग होगा।अभी इस तकनीक का प्रयोग विश्व के चुनिंदा देशों में ही किया जा रहा है। इस तकनीक में सौ किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भी तेज हवा में रोपवे का सुरक्षित संचालन किया जा सकेगा।इस तकनीक में दो स्थिर ट्रैक रोप पर गोंडोला केबिन पूरी तरह संतुलित रहते हैं। इससे केबिन के हवा में डगमगाने की संभावना नहीं रहती।उत्तराखंड में महत्वाकांक्षी सोनप्रयाग-केदारनाथ व गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं में सबसे पहले प्रयोग होने जा रही ट्राई-केबल डिटैचेबल गोंडोला रोपवे तकनीक (3एस) तकनीक की सबसे बड़ी खासियत तेज हवा व विषम मौसम में गोंडोला केबिन की स्थिरता है।इस तकनीक में रोपवे संचालन के लिए तीन अलग-अलग स्टील के तारों का उपयोग किया जाता है। इनमें से दो स्थिर केबल (ट्रैक रोप) केबिन के पूरे भार को संभालते हैं, जबकि एक चलायमान केबल (हाल रोप) केबिन को आगे-पीछे खींचता है। यह तकनीक सामान्य रोपवे प्रणालियों से अलग है। सामान्य रोपवे में एक या दो केबल पर ही पूरा भार और गति निर्भर होती है, 3-एस सिस्टम में भार और गति अलग-अलग केबलों पर होने से सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।यह विश्वस्तरीय तकनीक अभी तक स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा और चीन में उपयोग में लाई जा रही है। एस तकनीक में एआइ आधारित स्मार्ट तकनीक काम करती है। सेंसर और कैमरों से मिलने वाले रीयल-टाइम डेटा का एआइ विश्लेषण कर केबल, ब्रेक और ड्राइव सिस्टम में संभावित खराबी का पूर्वानुमान लगा लेता है। इससे दुर्घटनाओं की आशंका कम होती है। प्रत्येक केबिन बंद, वातानुकूलित व मौसम-रोधी होगा, इससे हर मौसम में सुरक्षित व आरामदायक यात्रा संभव होगी।वजन संतुलन के लिए सेंसर और मल्टी-लेयर ब्रेक सिस्टम से रोपवे का संचालन और अधिक सुरक्षित रहेगा।इस प्रणाली में कम टावर प्रयोग होंगे, एक टावर से दूसरे टावर के बीच लंबी दूरी होगी, जिससे निर्माण कम होगा और पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचेगा।डिटैचेबल ग्रिप सिस्टम से स्टेशन पर गति कम और लाइन पर तेज रहेगी, इससे यात्रा समय में कमी आएगी।आधुनिक केबिन डिजाइन में 16 से 20 या उससे अधिक यात्रियों का एक साथ सुरक्षित परिवहन संभव होगा।उत्तराखंड केदारनाथ रोपवे के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करने वाला देश का पहला राज्य होगा। यह रोपवे 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं में भी संचालित हो सकेगा, जिससे केदारनाथ यात्रा सुगम होगी।इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित बनाना है। यह परियोजना उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मददगार साबित होगी। तीर्थ यात्री पैदल, घोड़े, खच्चर, पालकी-पिट्ठू या हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम तक पहुंचते हैं। लेकिन दावा किया जा रहा है कि रोपवे परियोजना के पूरा होने के बाद तीर्थ यात्रियों को इस चढ़ाई को पूरा करने में महज 36 मिनट का समय लगेगा। जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज, आरामदायक और पर्यावरणमित्र साधन होगा। बताया जाता है कि इस रोपवे परियोजना को प्रति घंटे 1800 यात्रियों को लेकर गंतव्य तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। वहीं हर रोज इससे होकर 18000 यात्री आवाजाही कर सकेंगे। यह परियोजना न सिर्फ तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाजनक होने वाली है, बल्कि दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना की वजह से रोपवे के निर्माण के दौरान और जब परिचालन शुरू हो जाएगा, तब भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह रोपवे परियोजना पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यह परियोजना केदारनाथ धाम तक पहुंचने में तीर्थ यात्रियों का समय काफी ज्यादा घटा देगा। इसके साथ ही तीर्थ यात्रियों का सफर भी पहले की तुलना में काफी ज्यादा आसान बनने वाली हैकेदारनाथ धाम को लेकर तगड़ा प्‍लान बनाया है. इस प्‍लान पर काम भी शुरू हो गया है और जल्‍द ही इसे पूरा करने की कोशिश है. यह प्रोजेक्‍ट पूरा होता है तो केदारनाथ धाम जाने वाले लाखों शृद्धालुओं को अब बाबा के दर्शन करने के लिए घंटों मेहनत नहीं करनी पड़ेगी, बल्कि मेहनत ही नहीं करनी पड़ेगी. बिना किसी परिश्रम के ही लोग केदारनाथ धाम जाकर दर्शन कर सकेंगे. अभी शृद्धालुओं को 9 घंटे से ज्‍यादा की मेहनत करके कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है. केदारनाथ धाम के लिए बनने वाला यह रोपवे प्रोजेक्‍ट पर्वतमाला परियोजना के तहत बनाया जा रहा है. इस प्रोजेक्‍ट की ऊंचाई करीब 12,000 फीट है, जिसकी वजह से इसे बनाने में काफी समय लग सकता है. अनुमान है कि यह प्रोजेक्‍ट साल 2032 तक बनकर तैयार होगा. इस रोपवे से प्रति घंटे एक तरफ से करीब 1,800 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी. रोपवे तैयार होने के बाद केदारनाथ धाम हर साल आने वाले 20 लाख से ज्‍यादा शृद्धालुओं को इसका फायदा मिलेगा इस रोपवे पर 50 गैंडोला यानी ट्रॉलियां लगाई जाएंगी, जो प्रतिदिन 11 घंटे तक सेवाएं देंगी. हर ट्रॉली में करीब 36 सीटें होगी ओर एक बार में 1,800 यात्रियों को ले जाने की क्षमता रहेगी. हरिद्वार से सोनप्रयाग तक की दूरी 288 किलोमीटर की है, जिसे पूरा करने में अभी 3 दिन लग जाते हैं. रोपवे बनने के बाद यह दूरी महज 2 दिन में पूरी हो जाएगी. रोपवे के पूरे रूट पर 22 टॉवर लगाए जाएंगे और 5 जगहों पर स्‍टेशन बनेंगे. यह स्‍टेशन सोनप्रयाग, गौरीकुंड, चिरबासा, लिनचोली और केदारनाथ धाम में बनेंगे. इसमें से चिरबासा और लिनचोली स्‍टेशनों को सिर्फ इमरजेंसी में इस्‍तेमाल किया जाएगा. रोपवे बनाने का काम अप्रैल 2026 से शुरू होगा. । हालांकि इस रोपवे परियोजना की शुरुआत कब होगी या इसे कब तक पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया है, इस बाबत अभी तक कोई जानकारीनहींमिलसकीहै।।लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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