डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला.
प्रतिभाएँ किसी जगह की मोहताज नहीं हुआ करती हैं।
आज तक विज्ञान बड़ी बड़ी लैब का हिस्सा होता था। मगर प्रो० दुर्गेश पंत ने विज्ञान और अनुसंधान की कई पद्धतियों को आसान बना दिया है। यह तब हुआ जब विज्ञान की सहज प्रक्रिया को कॉलेज की लैब तक पहुंचा दिया गया है। जबकि कई वर्षों से विज्ञान के माध्यमिक छात्र मेंढक के चीरफाड़ से आगे नहीं बढ़े। जी हां, यह कार्य किए गए है विज्ञान संस्थान यूकॉस्ट के माध्यम से। उत्तराखंड के कई इंटरमीडिट कॉलेज में अब विज्ञान के कई प्रयोग किए जा रहे हैं। कह सकते है कि विज्ञान अब लैब से निकलकर कॉलेजों और गांवों तक पहुंच रही है। यानि विकास और अनुसंधान पर बुनियादी स्तर पर कार्य किया जाएगा।
ज्ञात हो कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में संसाधनों को सही जगह जोड़ने की कवायद जो आरम्भ हुई है, उसके परिणाम सामने आने लग गए है। दरअसल उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (UCOST) ने जिस पैमाने पर कार्य किया है, उसने देहरादून से लेकर सीमांत के स्कूल-कॉलेजों तक विकास और अनुसंधान की एक नई संस्कृति कायम हुई है। जिसे क्रियान्वयन करवाने में यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने जी तोड़ मेहनत की है। विज्ञान के क्षेत्र में इसे ओपेन ट्रांसफॉर्मेशन केंद्र भी कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
खास बात यह है कि पिछले 35 सालों से अकादमिक अनुभव प्राप्त प्रो० पंत ने उत्तराखंड में पहला कंप्यूटर साइंस विभाग स्थापित करने से लेकर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की नींव रखने तक, हमेशा ज्ञान और विज्ञान को आम पहुंच बनाने पर काम किया है। परिणाम स्वरूप इसके उन्होंने UCOST को एक फंडिंग एजेंसी से बाहर निकालकर उत्तराखंड के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और स्कूलों के लिए अनुसंधान एवं विकास का केंद्र बनाया है
यही नहीं बकायदा रिसर्च ग्रांट्स के माध्यम से बायोटेक, नैनोटेक, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, हिमालयी कृषि और पारंपरिक ज्ञान पर आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए यूनिवर्सिटीज़ आदि को सहयोग किया जाता है। जबकि कई विश्वविद्यालयों में ये ग्रांट्स अब PhD छात्रों के लिए लाइफलाइन बन गई हैं।
इसके अलावा प्रो० पंत की दीर्घकालीन सोच के साथ साथ राज्य के 60 कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में पेटेंट इन्फॉर्मेशन सेंटर (PIC) की स्थापना गई है। इसके मार्फत अमुक छात्र का कोई नया आइडिया हो अथवा अनुसंधान हो को वहीं पेटेंट दिया जाएगा। जिसके लिए पूर्व में ऐसे छात्रों को दिल्ली या अहमदाबाद जाना पड़ता था। यह कार्य भी प्रो० पंत ने EDII अहमदाबाद के साथ एक MoU के तहत करवाया है। जिसके कारण शोध छात्र को पेटेंट से स्टार्टअप तक की पूरी मदद UCOST देता है।
प्रो० पंत के दूरगामी सोच के कारण ट्रैवल सपोर्ट और Young Scientist Scheme के तहत 40 साल से कम उम्र के युवा वैज्ञानिकों को नेशनल / इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस में पेपर प्रेजेंट करने के लिए 50% हवाई किराया (अधिकतम 25,000 रु) तक की सहायता दी जाती है। यही कारण है कि 21वें राज्य विज्ञान सम्मेलन में 261 शोध पत्र आए, जिनमें सबसे ज्यादा देहरादून की यूनिवर्सिटीज़ के थे। प्रो० पंत के लगातार अकादमिक कार्यों को छात्रों के साथ संपादित करने की वजह से अब One Nation One Subscription, भारत सरकार की इस पहल को राज्य में लागू करवाने में UCOST नोडल संस्था बन गई है, ताकि पब्लिक फंडेड रिसर्च और जर्नल्स तक हर कॉलेज के छात्र की पहुंच हो सके।
प्रोफेसर पंत का मानना है कि R&D यूनिवर्सिटी में नहीं, स्कूल में ही शुरू होना चाहिए जो उन्होंने कर दिया है। परिणामस्वरूप अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग जैसे जिलों में जहां डिग्री कॉलेजों में कभी प्रैक्टिकल की सुविधा नहीं थी, वहां अब वैन में ही छात्र प्रयोग कर रहे हैं। यही नहीं बल्कि राज्य के स्कूलों और इंटर कॉलेजों में STEM Labs की स्थापना के साथ साथ उन्हें AI से जोड़ने की पहल आरम्भ की गई है।
गौरतलब हो कि 2022 में चंपावत से शुरू हुआ यह फ्लैगशिप प्रोग्राम आज 6 सीमांत जिलों के 33 ब्लॉकों तक पहुंच गया है। 9 -10 अक्टूबर 2026 को बागेश्वर में हुए महोत्सव में 240 से अधिक बाल वैज्ञानिकों ने भाग लिया है।इधर प्रोफेसर पंत के कार्यकाल को जिस प्रोजेक्ट के लिए विशेष याद किया जाएगा, वह देहरादून के विज्ञान धाम, झाझरा में बन रही उत्तराखंड की पहली साइंस सिटी होगी। जो देश की 5वीं साइंस सिटी कही जाएगी। यह सिर्फ एक म्यूजियम नहीं, बल्कि उत्तराखंड के R&D का शोकेस होगी। इसमें आपदा प्रबंधन, हिमालयी जैव विविधता, जलवायु, एग्रीकल्चर गैलरी और तारामंडल होंगे। यह Dehradun की यूनिवर्सिटीज़ के लिए एक लाइव लेबोरेटरी बनेगी और पूरे राज्य के छात्रों के लिए प्रेरणादायक केंद्र होगा। प्रो० पंत ने अपने कार्यकाल में चंपावत में 55.52 करोड़ का सब-रीजनल साइंस सेंटर और रुद्रप्रयाग GIS डैशबोर्ड जैसे प्रोजेक्ट भी संपन्न करवाए है
खास बात यह है कि प्रो० पंत ने विज्ञान को किताब से निकालकर जन-जन तक पहुंचाने के लिए कई नए प्रयोग किए है। इसके लिए उन्होंने विज्ञान वाणी 88.8 FM और विज्ञान सेतु: UCOST परिसर से शुरू किया है जो देश का पहला कम्युनिटी साइंस रेडियो है। जिसकी सराहना भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने भी की है
प्रो० पंत की सक्रियता ही कही जाएगी कि उत्तराखंड की पहली विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति का नोडल UCOST को बनाया गया है। यह नीति AI, ड्रोन, सेमीकंडक्टर, बायोटेक और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से जोड़ती है। ब्लॉक स्तर पर विज्ञान की प्रतियोगिता कराने की पहल की गई है जिसे साइंस टेक्नोलॉजी प्रीमियर लीग कहा गया है जो बेटियों को विज्ञान में बनाए रखने की विशेष पहल है। यूकॉस्ट ने पिछले सालों से विज्ञान के कई आयाम स्थापित किए है।लेखक दून विश्वविद्यालय कार्यरत हैं












