हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली/देवाल।
श्री नंदादेवी बड़ी जात यात्रा 2026 अपने कठिनतम यात्रा मार्ग को पार कर यात्रा के 16वें एवं तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंच गई हैं। काफी कठिन यात्रा मार्ग होने के बावजूद उच्च हिमालयी क्षेत्र के प्राकृतिक दृश्यों को देख यात्री बेहद खुश होते हुए माता नंदा, भगवती के जयकारों के साथ लगातार आगे बढ़ते रहे। बधाण की नंदादेवी की डोली अपने वापसी के दूसरे पड़ाव ल्वाणी गांव पहुंच गई हैं।
शनिवार को बड़ी जात यात्रा में सामिल दशोली,बण्ड़ एवं ज्वाल्पा के देव डोलियों के साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों, गांवों से चल रही देव छंतोलियों, चौसिंगा खंडुओं के साथ ही हजारों की संख्या में नंदा भक्त शनिवार को प्रातः काल अपने 15 वें पड़ाव पातरनचौनियां से रवाना हो कर कैलवाविनायक, रूपकुंड, ज्यूरागली के कठिनतम यात्रा मार्ग को पार करते हुए यात्रा ग्लेशियर के ऊपर बसें 16 वें एवं तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंच गई हैं। यहां पर पूरी रात देवी जागरण के साथ ही ध्योसिंह,लाटू देवता की पूजा अर्चना की जाएगी। रविवार को यात्रा शीला समुद्र से त्रिशूली एवं नंदा घुघटी हिमपर्वत श्रंखलाओं की तलहटी में बसे पंचगंगा होमकुंड़ में विधिविधान के साथ बड़ी जात (नंदादेवी की विशेष पूजा) आयोजित की जाएगी। पूजा-अर्चना के बाद यही से भेंट पवाड़ा, माता की श्रृंगार को चढ़ाते हुए पिछले 16 दिनों से यात्रा में चल रहे चौसिंगा खंडुओं को कैलाश की ओर विदा कर दिया जाएगा। इसके बाद यात्रा नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ के लिए वापस लौट पड़ेगी, रविवार को वापस के तहत यात्रा 17 वें एवं अपने चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंचेगी।इधर बधाण की डोली सिद्धपीठ देवराड़ा आने के तहत वापसी के दूसरे पड़ाव ल्वाणी गांव पहुंच गई हैं। शनिवार को प्रातः डोली बांक गांव से विदा हो कर लोहाजंग होते हुए दोपहर के भोजन के लिए बगड़ीगाड़ पहुंची यहां पर देव डोली के साथ ही छतोली की पूजा अर्चना की गई।इस मौके पर हरनी की प्रधान रीता पांडे, क्षेपंस पारी देवी, पूर्व प्रधान गंगा सिंह सुयाल,हरि कृष्ण पांडे,बादल सिंह,मदन सिंह,कलम सिंह,पदम सिंह खत्री आदि के नेतृत्व में यात्रा का स्वागत एवं विदाई की गई।देर सांय यात्रा ल्वाणी गांव पहुंच गई हैं।
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रूपकुंड से ज्यूरागली एवं ज्यूरागली से शीला समुद्र की ओर पिछले दिनों हुए हल्के हिमपात से यात्री विचलित होने के बजाय और अधिक प्रसन्नचित होते रहें,इस हल्की बर्फबारी को भी नंदा भक्त देवी की कृपा मान कर चल रहें थे। राज्य के बहार के ऐसे यात्री जिन्होंने बर्फ नही देखी थी वें तों और भी अधिक रोमांचित हो कर यात्रा में चल रहे थें। देवी की भक्ति के साथ प्राकृतिक के खुबसूरत नजारों को देख यात्रा में सम्मिलित यात्री अपने आप को धन्य मान रहे हैं।











