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स्ट्रॉबेरी स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी

01/02/20
in उत्तराखंड, हेल्थ
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
स्ट्रॉबेरी फ़्रागार्या जाति का एक पेड़ होता है, जिसके फल के लिये इसकी विश्वव्यापी खेती की जाती है। इसके फल को भी इसी नाम से जाना जाता है। स्ट्रॉबेरी की विशेष गन्ध इसकी पहचान बन गयी है। ये चटक लाल रंग की होती है। इसके फल को भी इसी नाम से जाना जाता है। स्ट्रॉबेरी की विशेष गन्ध इसकी पहचान बन गयी है। ये चटक लाल रंग की होती है। इसे ताजा भी फल के रूप में खाया जाता है, साथ ही इसे संरक्षित कर जैम, रस, पाइ, आइसक्रीम, मिल्क.शेक आदि के रूप में भी इसका सेवन किया जाता है। बगीचा स्ट्रॉबेरी, फ़्रागार्या आनानास्सा, एक संकर प्रजाति है, जिसकी अपने फल सामान्य स्ट्रॉबेरी के लिए दुनिया भर में खेती की जाती है।
यह बड़ी मात्रा में सेवन किया जाता हैए ताजा अथवा संरक्षित करके फलों के रस, आइसक्रीम और मिल्क शेक के रूप में तैयार खाद्य पदार्थों में इसका उपयोग बहुतायत में होता है। कृत्रिम स्ट्रॉबेरी खुशबू भी व्यापक रूप से कई औद्योगिक खाद्य उत्पादों में इस्तेमाल की जाती है। स्ट्रॉबेरी ऐसा रसीला फल है जो खाने में जितनी स्वादिष्ट होती है, सेहत के लिए भी उतनी ही फायदेमंद होती है। प्रोटीन, कैलोरी, फाइबर, आयोडीन, फोलेट, ओमेगा 3, पौटाशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, विटीमिन बी और सी के गुणों से भरपूर स्ट्रॉबेरी का सेवन आपके शरीर को कई बीमारीयों से लड़ने की ताकत देता है। सपरफूड माना जाने वाला स्ट्रॉबेरी का रोजाना सेवन डायबिटीज, कैंसर और दिल की बीमारियों के साथ.साथ कई छोटी.मोटी परेशानियों को भी दूर करने में मदद करता है। रोजाना स्ट्रॉबेरी खाने से आपको क्या.क्या फायदे हो सकते हैं।
भारत में स्ट्राबेरी की खेती सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में 1960 के दशक से शुरू हुई, परन्तु उपयुक्त किस्मों की अनुउपब्धता तथा तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण इसकी खेती में अब तक कोई विशेष सफलता नहीं मिल सकी। आज अधिक उपज देने वाली विभिन्न किस्में, तकनीकी ज्ञान, परिवहन शीत भण्डार और प्रसंस्कण व परिरक्षण की जानकारी होने से स्ट्राबेरी की खेती लाभप्रद व्यवसाय बनती जा रही है। बहुद्देशीय कम्पनियों के आ जाने से स्ट्राबेरी के विशेष संसाधित पदार्थ जैसे जैम, पेय, कैंडी इत्यादि बनाए जाने के लिये प्रोत्साहन मिल रहा है। पहाड़ों में जंगलों की सेहत के लिए नुक्सानदेह माने जाने वाले चीड़ की पत्तियों का इस्तेमाल विदेशी फल स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए हो सकेगा। उत्तराखंड काउंसिल फॉर बायो टैक्नॉलाजी यूसीबी के वैज्ञानिकों ने स्ट्रॉबेरी की मृदारहित खेती करने में कामयाबी हासिल की है।
रुड़की के मंगलौर में स्ट्राबेरी का लाल रंग किसानों की ज़िंदगी में रंग भर रहा है। पिछले चार.पांच साल से क्षेत्र के कई किसान स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं और अब दूसरी फ़सलें उगाने वाले किसानों की दिलचस्पी भी इसमें बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि इसमें मेहनत तो होती है लेकिन कमाई इससे अच्छी हो जाती है। स्ट्रॉबेरी की खेती से स्थानीय लोगों को रोज़गार भी मिल रहा है हरिद्वार.रुड़की में ज़्यादातर किसान गन्ने की खेती करते हैं लेकिन इसमें मेहनत का फल समय पर नहीं मिल पाता। इसके विपरीत स्ट्राबेरी बेचकर तुरंत अपनी मेहनत की कमाई हासिल की जा सकती है। स्ट्राबेरी की खेती ऐसे लोग भी कर रहे हैं जो पहले मज़दूरी या छोटा.मोटा व्यवसाय किया करते थे। इनका कहना है कि इससे वह आत्मनिर्भर हुए हैं और अब कम से कम पैसे के लिए परेशान नहीं होना पड़ता स्ट्रॉबेरी फल बागेश्वर में लहलहाने लगा है। आलोक साह गंगोला की मेहनत रंग लाई है। दस किसानों को वह इस खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अलबत्ता हिमांचल जैसे ठंडे इलाके में होने वाला फल गरम इलाके में पैदा होने से इस बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बागेश्वर नगर का तापमान गर्मियों में 40 डिग्री तक पहुंच जाता है। यह फल यहां पैदा कर साह परिवार ने अनूठा प्रयास किया है। इसका उपयोग फलो के जूस, पाई, आइस क्रीम, मिल्कशेक और चॉकलेट बनाने में करते हैं। इसका सेवन सीधे भी किया जा सकता है।बाजार में उपलब्ध स्ट्रॉबेरी का जैम, जैली, केके आदि बाजार में भी उपलब्ध है। इसमें मौजूद न्यूट्रेशन शरीर के लिए लाभदायक होता है। पौष्टिक गुणों से भरपूर होता है। फल खाना अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। फलों में बीमारियों से लड़ने की अनोखी ताकत होती है। इन्हीं में से एक है स्ट्रॉबेरी का फल जो कई बीमारियों के लिए काल के समान है। इसके खाने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है। मैग्नीशियम और विटामिन पाया जाता है। जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है। साथ ही हमें स्वस्थ भी रखता है। स्ट्रॉबेरी में पाया जाने वाला फ्लेवोनॉइड हार्ट संबंधी परेशानियों को दूर करता है स्ट्रॉबेरी में पाया जाने वाला फ्लेवोनॉइड हार्ट संबंधी परेशानियों को दूर करता है
स्ट्रॉबेरी के पाए गए पोषक तत्व

पानी 90.95 ग्राम
प्रोटीन 0.67 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट 7.68 ग्राम
फाइबर 2 ग्राम
चीनी 4.89 ग्राम
विटामिन ए 0.036 मिलीग्राम
विटामिन बी6 0.047 मिलीग्राम
विटामिन सी 58.8 मिलीग्राम
विटामिन के 2.2 माइक्रोग्राम
विटामिन ई 0.29 मिलीग्राम
कैल्शियम 28 मिलीग्राम
फास्फोरस 27 मिलीग्राम
पोटैशियम 220 मिलीग्राम
मैगनीशियम 13 मिलीग्राम
फोलेट 24 माइक्रोग्राम
ऊपर दिए हुए पोषण मान से पता चलता है कि स्ट्रॉबेरी सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं होती है बल्कि पोषण का एक सर्वोत्तम स्रोत भी है। यह फल विटामिन और पोषक तत्वों से परिपूर्ण है जो इसे अत्यधिक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। यदि आपके बच्चे को स्ट्रॉबेरी से किसी भी प्रकार की एलर्जी नहीं है तो यह फल उसके लिए एक स्वादिष्ट व पोषण से भरपूर विकल्प है। इसके पौधे हिमाचल से लाए जाते हैं। वैरायटी के अनुसार प्रति पौधा 10 रुपए से लेकर 30 रुपए तक के बीच पड़ता है।स्ट्रॉबेरी में स्वीट चार्ली और विंटर डाउन कीमती वैरायटी में गिनी जाती है। जबकि काडलर, रानिया, मोखरा समेत कई वैरायटियां स्ट्रॉबेरी की होती हैं।महेन्द्रगढ़ के अलावा हिसार जिला धीरे.धीरे स्ट्रॉबेरी का हब बनता जा रहा है। यहां के कई गाँवों में स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। यहां के किसानों के लिए दूसरी फसलों के मुकाबले यह फायदे की फसल साबित हो रही है। खेती में ज्यादा मुनाफा देख दूसरे जिलों के किसान भी यहां पर जमीन ठेके पर लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। अनिल स्ट्रॉबेरी के साथ ही मिर्च के पौधे भी लगा देते हैं। अनिल बताते हैं, हम पहले स्ट्रॉबेरी के पौधे लगा देते हैं, जब पौधे पूरी तरह से तैयार हो जाते हैं तो उसी के साथ ही मिर्च के पौधे लगा देते हैं। स्ट्राबेरी आठ महीने की फसल होती है और मिर्च दस महीने की होती है। डेढ़ एकड़ स्ट्रॉबेरी की फसल में चार.पांच लाख की लागत आती है। पैदावार होने के बाद खर्च निकालकर सात.आठ लाख का फायदा हो जाता है। वहीं मिर्च से भी दो.तीन लाख की आमदनी हो जाती है। ऐसे में मिर्च और स्ट्राबेरी दोनों को बेचकर दस लाख तक आमदनी हो जाती है। स्ट्रॉबेरी की फसल खत्म होते होते मिर्च में फल लगने लगते हैं।बड़े शहर में रहते है तो खुद भी पैकेट बना कर सेल कर सकते है जिस से आप का मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है ।अनिल बताते हैंए श्स्ट्रॉबेरी पचास रुपए किलो से लेकर छह सौ रुपए किलो तक बिक जाती है। डेढ़ एकड़ में दो किलो वजन की पचास हजार ट्रे पैदा हो जाती है उत्पादन कर देश.दुनिया में स्थान बनाने के साथ राज्य की आर्थिकी तथा पहाड़ी क्षेत्रों में पलायान को रोकने का अच्छा विकल्प बनाया जा सकता है। अगर ढांचागत अवस्थापना के साथ बेरोजगारी उन्मूलन की नीति बनती है तो यह पलायन रोकने में कारगर होगी उत्तराखण्ड हिमालय राज्य होने के कारण बहुत सारे बहुमूल्य उत्पाद जिनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक मांग रहत है। जलवायु की दृष्टि से उनका इलाका भी हिमाचल जैसा उत्तराखंड है।

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