हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट।
थराली।
लगता हैं कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली का विवादों से दूर होने का कोई मन नहीं हैं,तभी तों पिछले दो महीनों से एक के बाद एक विवाद खड़ा होता जा रहा है। ताजा विवाद एक प्रसव को लेकर उठ खड़ा हुए हैं।थराली विकासखंड के ही गोठिंडा में बारिश के दौरान हुए एक प्रसव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने एक सरकारी विज्ञप्ति सूचना विभाग के माध्यम से 2 जुलाई को जारी की हैं आधिकारिक विज्ञप्ति में दावा किया गया कि लगातार बारिश से मोटर सड़क के बंद होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर मौके पर पहुंची और रास्ते में ही गर्भवती महिला का सुरक्षित प्रसव कराया। गया और जच्चा-बच्चा सुरक्षित है।हालांकि घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के दावे विभाग के एक दम उलट है।
दरसअल पिछले दो महीनों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली सुर्खियों में बना हुआ हैं,
पहले आवारा कुत्ते के फर्स्ट फ्लोर में घुमाने और लेटे रहने का मामला सुर्खियों में रहा, उसके बाद एक्सपायरी दवाओं का मामला सुर्खियों में रहा, फिर सीएचसी की लापरवाही के कारण थराली ब्लाक के ही कुराड़ गांव की एक महिला एवं उसके पेट में ही बच्चे की मौत का मामला सुर्खियों में रहा अभी मौत का मामला ठंडा भी नही हुआ था कि स्वास्थ्य विभाग की एक सरकारी विज्ञप्ति को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विवादों में घिरते नजर आ रहा है। चमोली के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अभाषेक गुप्ता ने सूचना विभाग के जरिए एक सरकारी विज्ञप्ति जारी करवाईं हैं, विज्ञप्ति के अनुसार बुधवार एवं गुरूवार की रात्रि भारी बारिश होने और गोठिंडा निवासी पुष्पा देवी को रात करीब दो बजे प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली ला रहे थे, लेकिन मोटर मार्ग अवरुद्ध होने से अस्पताल पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा था। सूचना मिलने पर सीएचसी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय गुप्ता के निर्देशन के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम आवश्यक चिकित्सा सामग्री के साथ गांव की ओर रवाना हुई और करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर प्रसूता तक पहुंची। विज्ञप्ति में दावा किया गया कि परिस्थितियों को देखते हुए टीम ने रास्ते में ही सुरक्षित प्रसव कराया। साथ ही जच्चा और नवजात दोनों के स्वस्थ होने की जानकारी दी गई।
उधर, प्रसूता को गांव से प्रसव स्थल तक लाने वाले टैक्सी चालक बिरेंद्र सोनी ने अपने फेसबुक लाइव में विभागीय दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रसव उनकी माता किशनी देवी ने कराया, जो पहले से ही घरेलू दाई का कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला का प्रसव सुबह 8:05 बजे हो चुका था, जबकि स्वास्थ्य विभाग की टीम करीब 10:30 बजे मौके पर पहुंची। उनके अनुसार टीम ने प्रसव के बाद जच्चा और नवजात को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई, लेकिन सुरक्षित प्रसव कराने का श्रेय सरकारी विज्ञप्ति में विभाग ने स्वयं ले लिया। जोकि गलत है। प्रसव स्थलपर मौजूद आशा कार्यकर्ता मीना देवी और ग्रामीण नरेंद्र कुमार ने भी कथित तौर पर यही कहा कि वे रात से प्रसूता के साथ थे तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही प्रसव हो चुका था।
इन विरोधाभासी दावों के बाद सरकारी विज्ञप्ति की सत्यता पर सवाल उठने लगे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अभिषेक गुप्ता ने कहा कि उनके कार्यालय को थराली से जो सूचना प्राप्त हुई थी, उसी के आधार पर प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई। उन्होंने कहा कि यदि तथ्यों में अंतर पाया जाता है तो पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी।अब यह मामला केवल एक प्रसव का नहीं, बल्कि सरकारी सूचना की विश्वसनीयता का भी बन गया है। जांच से ही स्पष्ट होगा कि विषम परिस्थितियों में सुरक्षित प्रसव का वास्तविक श्रेय किसे मिलना चाहिए और आधिकारिक विज्ञप्ति में दर्ज तथ्यों का आधार क्या था। यह सब जांच के बाद ही पता चल पाएगा।











