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महाराष्ट्र से लेकर उत्तराखंड तक, ‘नकली’ पनीर पर प्रतिबंध

17/08/26
in उत्तराखंड, देहरादून
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डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
भारत में बीते कुछ दिनों में ‘पनीर’ पर चर्चाओं का दौर जारी है। दरअसल, एक के बाद एक चार राज्यों ने अब दूध के इस्तेमाल के बिना बनने वाले पनीर, जिसे एनालॉग पनीर की संज्ञा भी दी जाती है, पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें सबसे ताजा नाम उत्तर प्रदेश का है, जहां मिलावटी डेयरी उत्पादों और एनालॉग पनीर को लेकर सख्त नियमों का एलान किया है। वहीं, इससे कुछ ही दिन पहले मध्य प्रदेश ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, इसके प्रचार-प्रसार और बिक्री पर भी पूरी तरह रोक लगा दी। तीन अन्य राज्य- गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ ने भी एनालॉग डेयरी उत्पाद पर कुछ इसी तरह की कार्रवाई की है।नियामकों का बीते कुछ ही महीनों में आया यह एक्शन अपने आप में चौंकाने वाला है, क्योंकि बिना दूध से बने पनीर यानी डेयरी के बाहर बनाए गए पनीर पर रोक या इसे गलत बताने का अब तक राष्ट्रीय स्तर पर नियम नहीं है। यानी इसकी बिक्री को केंद्र की तरफ से भी कानूनी तौर पर गलत नहीं माना जाता। नॉन-डेयरी पनीर यानी एनालॉग पनीर को भारत में कानूनन नकली या अवैध नहीं माना जाता है, क्योंकि खाद्य नियामक संस्थाओं की तरफ से इसे डेयरी विकल्प के रूप में एक वैध खाद्य उत्पाद की मान्यता दी गई है। कानून के मुताबिक, एनालॉग पनीर केवल तभी वैध है जब उसे पैकेट पर स्पष्ट रूप से नॉन-डेयरी या एनालॉग के रूप में लेबल किया गया हो। लेकिन असली समस्या यह है कि कई होटल, रेस्त्रां, कैटरर्स और क्लाउड किचन सस्ते मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को बिना बताए, असली पनीर की जगह खाने में एनालॉग पनीर का इस्तेमाल कर रहे हैं। एफएसएसएआई के नियमों के मुताबिक, किसी भी एनालॉग उत्पाद को सीधे पनीर के नाम से बेचना कानून का गंभीर उल्लंघन है।इसके अलावा असली डेयरी पनीर बनाने की लागत ज्यादा होती है और ब्रांडेड पनीर बाजार में लगभग 400 से 500 रुपये प्रति किलो मिलता है। इसके उलट पाम ऑयल, स्टार्च और एडिटिव्स से बनने वाला एनालॉग पनीर बाजार में लगभग 150 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध हो जाता है। रेस्त्रां मालिक असली पनीर के पैसे लेकर ग्राहकों को आधा सस्ता नकली विकल्प परोसते हैं। कई बार ग्राहकों को इसकी जानकारी मिल जाती है, ऐसे में इस पर बवाल बढ़ता जा रहा है। भारत में शाकाहारियों के लिए पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का एक बेहद अहम स्रोत है। असली पनीर के उलट एनालॉग पनीर में प्राकृतिक डेयरी प्रोटीन न के बराबर होता है। इसमें पाम ऑयल और हाइड्रोजनेटेड वसा (वनस्पति घी) का इस्तेमाल होता है, जिससे शरीर में हानिकारक ट्रांस फैट और कोलेस्ट्रॉल का खतरा बढ़ जाता है। नियमित रूप से इसे खाने से हृदय रोग, शरीर में सूजन और पेट की गंभीर बीमारियां (जैसे अपच, उल्टी, दस्त) हो सकती हैं।एनालॉग पनीर का एक बड़ा हिस्सा असंगठित और गैर-लाइसेंस वाली फैक्ट्रियों में गुपचुप तरीके से बनता है, जो इनके नकली होने का शक बढ़ाता है। इन असुरक्षित जगहों पर घटिया स्तर के तेलों-स्टार्च के इस्तेमाल का खतरा होता है, जिससे उत्पाद में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। देश भर में हाल ही में हुए छापों ने इस घोटाले की गंभीरता को उजागर किया है। उदाहरण के लिए, अहमदाबाद, नोएडा और पुणे में हजारों किलो संदिग्ध पनीर जब्त किया गया। असली डेयरी पनीर कैल्शियम और उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत है। भारत की एक बड़ी शाकाहारी आबादी के लिए यह दैनिक पोषण और प्रोटीन की आवश्यकताओं को पूरा करने का एक स्वस्थ व आवश्यक जरिया है। ताजे दूध से प्राकृतिक रूप से बने होने के कारण यह शरीर को ऊर्जा देता है और सामान्य स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।इसमें प्राकृतिक डेयरी प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्व न के बराबर या बेहद कम होते हैं, जिससे शरीर को कोई खास पोषण नहीं मिलता। इसे बनाने में पाम ऑयल और हाइड्रोजनेटेड वसा (वनस्पति घी) का भारी इस्तेमाल होता है। जिसकी वजह से शरीर में ट्रांस फैट और खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी ऊपर होता है। यानी जहां एक तरफ व्यक्ति को लग रहा है कि वह पनीर खाकर हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत कर रहा है तो वहीं असल में उसकी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल ऊपर दिखे। एनालॉग पनीर में मौजूद ट्रांस फैट शरीर में सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे लंबे समय में डायबिटीज, कैंसर और दिल की गंभीर बीमारियों के पैदा होने का खतरा रहता है। इसके ज्यादा सेवन से पेट फूलना, अपच, जी मिचलाना, दस्त और उल्टी जैसी पेट की समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा चूंकि एनालॉग पनीर का एक बड़ा हिस्सा बिना निरीक्षण वाली फैक्ट्रियों में बनता है और इसकी पैकेजिंग तक नहीं होती, अस्वच्छ प्रोसेसिंग से इसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है, जो फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।. लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं.

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