त्रेपन सिंह चाौहान की फेसबुक वाॅल से
मेरा मानना रहा है कि इंसान सिर्फ शरीर से ही नहीं बनता है। वह सपनो से ; रिश्तों ; उद्देश्य ; दोस्तों ; व्यवहार ; और कर्मों जैसे कई अन्य चीजों से इंसान बनता है। यह सच है कि अगर शरीर स्वस्थ हो तो सारी चीजों को गति मिलती है। शरीर अस्वस्थ होने के बावजूद भी कुछ चीजें रुकती नहीं है।
समानित राजीवदा (राजीव लोचन साह) ने फेसबुक पर मेरे स्वास्थ्य के बारे में पोस्ट लिखी काफी मित्रों को मेरे अस्वस्थ होने का पता चला है। उनके बाद बडे़ भाई अरुण कुकशाल और मित्र जगमोहन रौतेला ने फेसबुक पर पोस्ट लिखी और अभी युगवाणी पत्रिका के अगस्त के अंक में जगमोहन ने एक बड़ा लेख लिख कर मुझे ताकत दी है।
मित्र जगमोहन रौतेला का वह फोन मुझे याद है, जब हमारे सबसे करीबी साथियों में एक कमल जोशी अचानक हमें छोड़कर चले गए। तब जगमोहन ने बेचैन से भरी आवाज में कहा था ” यार मुझे चिंता हो रही है। हम सब की बड़ी समस्या यह है कि साथियों के साथ हम संकट के समय बैठ नहीं पाते हैं। तब सोचते हैं जब हमारे साथ वह नहीं रहता है। तब से जगमोहन लगातार फोन करता रहा है। राजीवदा फोन पर लगातार बात करते रहे हैं। लेकिन लंबे समय से न मिलने की बेचैनी उनमें मैंने खूब देखी है।
मेरा स्वास्थ्य ठीक न होने का मतलब यह नहीं है कि मैं कुछ करूं ना। यमुना के बाद हे ब्वारी उपन्यास में गांव के लोग जेल में बंद है। उससे आगे ललावेद के नाम से लिख रहा हूँ। वह भी हाथ काम न करने के बावजूद आई ट्रेक के व्दारा आंखों से लिख रहा हूँ। वक्त तो लगेगा लेकिन कोशिश कर रहा हूँ कि समय पर पूरा हो सके।











