• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

उत्तराखंड का खाकर बिजनौर, सहारनपुर, पीलीभीत के लिए चिंतित क्यों हैं राना?

08/09/19
in उत्तराखंड, नैनीताल
Reading Time: 1min read
142
SHARES
178
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

शंकर सिंह भाटिया
देहरादून। भाजपा अप्रत्याशित घोषणाएं करने के लिए जानी जाती है। सन् 2000 में वाजपेयी सरकार द्वारा उत्तराखंड समेत तीन राज्यों की घोषणा हो या फिर वर्तमान मोदी सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35ए समाप्त करने का मामला हो, यह इसी तरह की अप्रत्याशित घोषणाएं हैं। हालांकि ये दोनों मुद्दे भाजपा के घोषणा पत्र में शामिल थे। अब मीडिया के एक वर्ग में यह सूचना प्रसारित की जा रही है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाया जाएगा, पूर्वांचल और बुंदेलखंड भी अलग राज्य बनेंगे। दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर, सहारनपुर और पीलीभीत जिलों को उत्तराखंड में शामिल किया जाएगा। यूपी के इन तीन जिलों को उत्तराखंड में शामिल करने की मांग करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.केएस राना ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है।
बिजनौर और सहारनपुर में तो उत्तराखंड में शामिल होने के लिए एक लंबे समय तक आंदोलन भी होता रहा है। बिजनौर के 66 गांवों को उत्तराखंड में शामिल करने का एक संकल्प उत्तराखंड की विधानसभा में लंबित भी है। यह संकल्प तब कांग्रेसी और अब भाजपा में मंत्री हरक सिंह रावत ने पेश किया था। उत्तराखंड राज्य गठन के दौरान जब हरिद्वार को उत्तराखंड में शामिल करने का निर्णय हुआ तो कुछ नेताओं ने हरिद्वार को उत्तराखंड से अलग करने के लिए एक आंदोलन भी चलाया था। हरिद्वार को जिस तरह उत्तराखंड में शामिल होने का लाभ मिला, हरिद्वार की जनता ने इन आंदोलन करने वाले नेताओं को दूध में पड़ी मक्खी की तरह उठाकर दूर फैंक दिया। उत्तराखंड बनने का सबसे अधिक लाभ हरिद्वार को ही मिला है।
क्या भाजपा की केंद्र सरकार ऐसा करने जा रही है? या यह कुछ पहाड़ विरोधी नेताओं, चिंतकों, कथित बुद्धिजीवियों की उलटबासी है? जो पहाड़ के अस्थित्व को पूरी तरह से समाप्त करने के ख्वाब पाले हुए हैं?
इन कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति महाशय को उत्तराखंड की जमीनी हालातों के बारे में जानकारी है? सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2011 की जनगणना के बाद पहाड़ के 800 से अधिक गांव जनशून्य हुए हैं। यह क्रम साल दर साल बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में राज्य का 85 प्रतिशत भू भाग होने के बावजूद पहाड़ का प्रतिनिधित्व लोक सभा-विधानसभा में 50 प्रतिशत से कहीं नीचे आ गया है। जिस उत्तराखंड के आत्मनिर्भर होने और विकास की चिंता में यह महाशय राना चिंतित दिखाई दे रहे हैं, विभिन्न समय पर उत्तराखंड की सरकारों का दावा है कि यह राज्य देश के सबसे अधिक विकास करने वाले छह इलीट राज्यों में शामिल है। यहां प्रति व्यक्ति आय देश के औसत से ऊपर है। विकास के ये आंकड़े सिर्फ दो पूर्ण मैदानी जिलों हरिद्वार, उधमसिंह नगर दो अर्द्ध मैदानी जिलों देहरादून और नैनीताल की कृपा से छुए गए हैं। इन उन्नीस सालों का प्रत्यक्ष अनुभव है कि मैदान ने पहाड़ की कीमत पर अपना विकास किया है। सीडी रेशियो पहाड़ी जिलों में 28 से लेकर 35 प्रतिशत तक है। मैदान के चार जिलों में इससे कहीं ऊपर है। मतलब कि बैंकों में जमा पहाड़ करेगा, उपभोग मैदान करेगा। प्रति व्यक्ति आय से लेकर विकास दर तक मैदान लगातार छलांग लगाता जा रहा है। पहाड़ पिछड़ता जा रहा है। तीन और मैदानी जिलों को उत्तराखंड में शामिल कर राना साहब पहाड़ के बचे खुचे संसाधनों को उनके हवाले करना चाहते हैं और पहाड़ के ताबूत पर आखिरी कील ठोकना चाहते हैं?
कुमाऊं विश्वविद्यालय के एक कुलपति प्रो.डीडी पंत हुआ करते थे। जिन्होंने गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा, नारायण दत्त तिवारी के चंगुल से उत्तराखंडियों को बाहर झांकने की खिड़की दिखाई थी। उसके बाद ही 1994 का विशाल उत्तराखंड आंदोलन खड़ा हुआ था और उत्तराखंड राज्य बनने की राह तैयार हुई थी। एक यह इसी कुमाऊं विश्व विद्यालय के कुलपति केएस राना हैं, जो उत्तराखंड को, पहाड़ को पूरी तरह से मटियामेट करने के मंसूबे पाले हुए हैं।
यदि केएस राना बुद्धिजीवी हैं, उन्होंने उत्तराखंड जैसे विकट परिस्थितियों में घिरे हिमालयी राज्य के मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश की है, तो उन्हें हिमाचल के दिग्दर्शक वाईएस परमार के बारे में जानना चाहिए। सन् 1971 में जब हिमाचल प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश से पूर्ण राज्य बनने की ओर अग्रसर हो रहा था, वाईएस परमार ने अपनी पार्टी की केंद्र सरकार के सामने नाराजगी जताई कि केंद्र शासित प्रदेश तक तो ठीक था, लेकिन अलग राज्य बनने पर हिमाचल प्रदेश में कोई मैदानी भाग नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि तब पेप्सू हिमाचल प्रदेश का हिस्सा था। राज्य बनने से पहले संशोधन कर केंद्र सरकार ने पेप्सू को पंजाब में मिलाने का निर्णय लिया और हिमाचल प्रदेश एक पूर्ण पर्वतीय राज्य बन गया। जिसका परिणाम यह हुआ है कि एक वास्तविक धरातल पर खड़ा, फल उत्पादन के लिए ख्यात और गांवों के पलायन से अप्रभावित राज्य हिमाचल बन पाया। यह नहीं कह सकते कि हिमाचल प्रदेश में पलायन नहीं है। सामान्य पलायन तो प्रकृति का नियम है। देहरादून, दिल्ली, मुंबई से भी पलायन होता है। लेकिन पलायन के बाद उत्तराखंड के पहाड़ों की जो तस्वीर सामने आ रही है, वह पलायन नहीं उजाड़ है।
प्रो.केएस राना बिजनौर, सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल करने वाले आंदोलन की उपज तो नहीं हैं? इन 19 सालों में यह होता रहा है कि उत्तराखंड के अंदर महत्वपूर्ण पदों पर उत्तराखंड विरोधियों की ताजपोशी होती रही है। वे तातकतवर बनकर उभरते रहे हैं और उत्तराखंड का अहित करते रहे हैं। प्रो.केएस राना उसी कैटागिरी के अफसर लगते हैं। अब जरूरत इस बात की है कि इस तरह के अफसरों को उत्तराखंड से भगाने की मुहिम शुरू की जाए।

Share57SendTweet36
Previous Post

बदहाल सरकारी स्कूलों में लगातार कम हो रही है छात्र संख्या, बढ़ता जा रहा है वेतन भार

Next Post

नवोदय विद्यालय गैरसैंण में विधिक सेवा प्राधिकरण का जागरूकता शिविर आयोजित

Related Posts

उत्तराखंड

सफाई कर्मियों के हितों व समस्याओं का हो रहा समाधान : मकवाना

May 3, 2026
8
उत्तराखंड

प्रसिद्ध समाजसेवी ठाकुर श्री सुंदर सिंह चौहान की स्मृति में किया समळौ॑ण पौधारोपण

May 3, 2026
23
उत्तराखंड

भारत सरकार के संयुक्त सचिव राजेश कुलहारी ने गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना का निरीक्षण किया

May 3, 2026
92
उत्तराखंड

बेहतर पोषण से भरपूर है शहद

May 3, 2026
11
उत्तराखंड

मुख्य सेवक सदन में मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याएं सुनी

May 3, 2026
9
उत्तराखंड

प्रदेश में कांग्रेस की मजबूती का आधार है समर्पित कार्यकर्ता: उनियाल

May 2, 2026
42

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67682 shares
    Share 27073 Tweet 16921
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37442 shares
    Share 14977 Tweet 9361
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

सफाई कर्मियों के हितों व समस्याओं का हो रहा समाधान : मकवाना

May 3, 2026

प्रसिद्ध समाजसेवी ठाकुर श्री सुंदर सिंह चौहान की स्मृति में किया समळौ॑ण पौधारोपण

May 3, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.