डॉ. हरीश चन्द्र अन्डोला
जिले में पिछले कुछ महीनों से जंगली जानवरों के हमलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है. गुलदार के बढ़ते हमलों से ग्रामीण क्षेत्रों में दहशत का माहौल बना हुआ है. खिर्सू विकासखंड में घर के पास घात लगाए गुलदार ने एक महिला को मौत के घाट उतार दिया. जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया. घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने श्रीनगर–कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर विरोध किया.महिला की मौत से आक्रोशित ग्रामीण शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में श्रीनगर कोटद्वार राष्ट्रीय राजमार्ग पर इकट्ठा हो गए. लोग सड़क पर बैठ गए. विभागीय लापरवाही के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की. ग्रामीणों की प्रमुख मांगें थीं कि हमला करने वाले गुलदार को तुरंत शूट किया जाए. मृतक परिवार को उचित और त्वरित मुआवजा दिया जाए. क्षेत्र में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए. गांव के आसपास ट्रैप कैमरे, पिंजरे और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जाए. विरोध इतना तीव्र था कि करीब दो घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप रहा. बड़ी संख्या में वाहन दोनों ओर फंसे रहे. जिससे यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा. प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी मौके पर पहुंचे.उन्होंने ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया. सीडीओ ने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की सभी मांगों को उच्च अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाया जाएगा. क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे. घटना को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग की टीम को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. सीडीओ के आश्वासन के बाद धीरे-धीरे ग्रामीण शांत हुए. जिसके बाद सड़क को यातायात के लिए खोला गया.डीएफओ पौड़ी ने बताया महिला की मौत की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत स्थल पर पहुंची. मृतक परिवार को 1 लाख 80 हजार रुपये की अग्रिम मुआवजा राशि जारी की जा चुकी है. गांव के आसपास ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं. जिससे गुलदार की मूवमेंट का पता चल सके. गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगा दिया गया है. टीम लगातार क्षेत्र में कैंप कर रही है. गांव के आस-पास निगरानी बढ़ा दी गई है. उच्च अधिकारियों से गुलदार को शूट करने की अनुमति मांगी गई है. अनुमति मिलते ही शूटर को उसी समय मौके पर तैनात कर दिया जाएगा.पौड़ी जनपद के खिर्सू विकासखंड के अंतर्गत आने वाले कोटी गांव में बीते गुरुवार की शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई. जिसने पूरे क्षेत्र को दहशत और गुस्से से भर दिया. गांव की 62 वर्षीय गिन्नी देवी पर घर से लगभग 300 मीटर दूर घास काटते समय घात लगाए बैठे एक गुलदार ने अचानक हमला कर दिया. हमले में गिन्नी देवी की मौके पर ही मौत हो गई. घटना की पुष्टि होते ही पूरे गांव में शोक के साथ-साथ भय का माहौल फैल गया. ग्रामीणों ने बताया पिछले कुछ महीनों में गुलदार की सक्रियता असामान्य रूप से बढ़ गई है. विभाग को बार-बार शिकायत करने के बावजूद संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई. जिसका परिणाम अब एक जानलेवा घटना के रूप में सामने आया है. उत्तराखंड में आए दिन गुलदार, भालू, बाघ आदि जंगली जानवरों के हमले के मामले सामने आ रहे हैं. जिसमें कई लोग असमय ही जान गंवा चुके हैं. जबकि, कई लोग घायल हो चुके हैं. इसी बीच बदरीनाथ विधायक ने उत्तर प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश सरकार बंदर, सुअर, भालू आदि जानवर उत्तराखंड में न छोड़ें. इसके चलते यहां मानव वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है. जिसमें यहां के लोग अपनी जान गंवा रहे हैं.दरअसल, बदरीनाथ विधायक ने सरकार से पर्वतीय अंचल में रहने वाले लोगों को जंगली जानवरों से निजात दिलाने की मांग उठाई है. उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार पर इस मामले को लेकर कुछ सवाल भी उठाए हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछले कुछ सालों मे उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में जंगली जानवरों का आतंक बढ़ा है, वो काफी चिंतनीय है. पहाड़ों में लगातार सुअर, बंदरों, भालूओं और गुलदारों की मौजूदगी से ग्रामीणों में डर का वातावरण व्याप्त है. इस मुद्दे को विधानसभा में कई बार उठा चुके हैं, इसके बावजूद एक बार फिर वो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकार से अपील करना चाहते हैं कि जल्द से जल्द उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में रहने वाले निवासियों को जंगली जानवरों से बचाया जाए. पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार जंगली जानवरों के बढ़ते मामलों पर अखिल भारतीय पूर्व-सैनिक सेवा परिषद ने रोष व्यक्त किया है। कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
इस सबंध में सदस्यों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा। बताया कि पहाड़ों में लगातार जंगली जानवरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। आए दिन जंगली जानवर लोगों को अपना निवाला बना रहा है। कहा कि जंगली जानवरों के आतंक को रोकने के लिए गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। *लेखक विज्ञान व तकनीकी विषयों के जानकार दून विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं*











