फाइल फोटो–विश्व धरोहर फूलों की घाटी राष्ट्रीय पार्क का विंहगम दृश्य।
प्रकाश कपरूवाण
जोशीमठ। पर्यटकों की आवाजाही के लिए नहीं खुल सकी फूलों की घाटी। विभागीय गतिविधियाॅ शुरू। गत वर्ष करीब 18 हजार देशी-विदेशी पर्यटकों ने फूलों की घाटी की सैर की थी।
विश्व धरोहर फूलों की घाटी हर वर्ष एक जून को देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही के लिए खुलती रही है लेकिन इस वर्ष कोरोना की छाया फूलों की घाटी पर पड गई है। राज्य के अन्य पार्को की ही तरह फूलांे की घाटी राष्ट्रीय पार्क को भी पर्यटकों की आवाजाही के लिए नही खोला जा सका है। हाॅलाकि सोमवार को फूलों की घाटी को विभागीय गतिविधियों के लिए खोल दिया गया है। फुलों की घाटी रैंज के वन कर्मियों ने घाटी के प्रवेश द्वार पर पंहुचकर विभागीय गतिविधियों के लिए प्रवेश द्वार खोल दिया है।
फूलों की घाटी रैंज के रैंज आफीसर बृजमोहन भारती के अनुसार विभागीय गतिविधियों के लिए फूलों की घाटी को खोल दिया गया है। बर्फ पिघलने के बाद घाटी में किसी प्रकार के वन्य जीव व वन अपराध के साथ ही बेशकीमती जडी-बूटियों का दोहन ना हो इसके लिए विभाग की लंबी दूरी की गश्त व अन्य गतिविधियाॅ शुरू कर दी हैं। कहा कि घाटी मंे अभी भी कुछ स्थानों पर डेढ से दो फीट तक बर्फ जमी है। जबकि घूसाधार, द्वारी पैरा , बामण धौड व नागताल ग्लेशियर प्वांइट ग्लेशियर से पटे हैं।
श्री भारती ने बताया कि गत वर्ष 01 जून से 31 अक्टूबर तक 17 हजार 950 पर्यटकों ने घाटी की सैर की जिनमे 17 हजार 100 भारतीय व 850 विदेशी पर्यटक थे। इनसे पर्यटन शुल्क के रूप मे 27 लाख 60 हजार रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।
उन्होंने कहा कि घाटी में देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही के लिए अभी कोई गाइडलाइन प्राप्त नहीं हुई है। कोरोना को देखते हुए जो भी निर्देश होंगे उसी के आधार पर घाटी को आवागमन के लिए खोला जा सकेगा।











