• About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact
Uttarakhand Samachar
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल
No Result
View All Result
Uttarakhand Samachar
No Result
View All Result

पहाड़ का पारम्परिक त्यौहार दूतिया

13/11/20
in उत्तराखंड, संस्कृति
Reading Time: 1min read
149
SHARES
186
VIEWS
Share on FacebookShare on WhatsAppShare on Twitter

डॉ० हरीश चन्द्र अन्डोला
कुमाऊं में मनाया जाता है पहाड़ का पारम्परिक त्यौहार दूतिया दीपावली एक ऐसा त्यौहार है जिसे पूरे देश भर में हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता हैं। जब बात त्यौहारो की आती है तो हमारे उत्तराखंड में हर त्यौहार को मनाने का अंदाज़ थोड़ा अलग है। यहां पर विभिन्न तरीकों से त्यौहारों को मनाया जाता है, एक ऐसा ही त्यौहार जिसे भारतवर्ष में भाईदूज के नाम से मनाया जाता है, जबकि उत्तराखंड के कुमाऊं में भाईदूज का त्यौहार नहीं बल्कि दूतिया त्यौहार मनाने की मान्यता है। तीज, त्यौहार व कौतिक पहाड़ की वे समृद्ध परम्पराएं रही हैं, जो सदियों से हमें अपनी जड़ों से जोड़े रही हैं। वैसे भी इतिहास गवाह है कि जो कौमें अपने संस्कृति को संजोये व सहेजे रहीं, वही इतिहास में कालजयी बनी रही।
कुमाऊं की संस्कृति अपने आप में वैभवशाली रही है। लेकिन लगातार हो रहे सांस्कृतिक अतिक्रमण की आबोहवा से कुमाऊं की लोक संस्कृति भी अछूती नहीं रही है। ऐसे ही दीपावली के तीन दिन बाद मनाये जाने वाले भैयादूज त्यौहार की बात करें तो भैयादूज का त्यौहार कुमाऊं की लोक संस्कृति का हिस्सा ही नहीं है। करीब तीन दशक पूर्व कब दबे पांव यह हमारी लोक सस्कृति का हिस्सा बन गया इसका हमें एहसास तक नहीं हुआ। यहां बता दे कि कुमाऊं में भैयादूज की जगह दूतिया त्यार मनाने की लोक परम्परा रही है, जिसे मनाने की तैयारी एकादशी या धनतेरस के आसपास शुरू हो जाती है। दूतिया में दीपवाली के दिन एक बर्तन में धान पानी में भिगौने के लिए डाले जाते हैं। इसके बाद गौवर्धन पूजा के दिन इस धान को पानी से बाहर निकाल लिया जाता है। धान को निखारने के लिए उसे एक कपड़े में बांध दिया जाता है। धान का सारा पानी निखरने के बाद धान का कढ़ाई में भूना जाता है। उसके बाद उसे गर्म ओखले में मूसल से कूटने की परम्परा है। इस दौरान धान गर्म होने के कारण उसका आकार चपटा हो जाता है और भूसा भी उससे अलग हो जाता है। इन भूने हुए व चपटे चावलों को चूड़ा कहते हैं। ये चूडे़ सिर में चढ़ाने के साथ ही मजे से खाने के लिए भी उपयोग किये जाते हैं।
बुजुर्ग महिला दूब के गुच्छों से परिवार के सदस्यों के सिर में तेल लगाती है। इस दौरान कई बार तेल सिर से बहने लग जाता है, इसे भी दूतिया की धार कहा जाता है। तेल बहने के बाद घर के सदस्यों के घुटनों, कंधों व सिर में च्यूड़े चढ़ाये जाते हैं, जिसे तीन से पांच बार क्रम में दौहराया जाता है।
इस प्रक्रिया को दौहराने के दौरान बुजुर्ग महिला घर के सदस्यों को आशीष वचन देती हैं, आप अपने जीवन में खुश व खुशहाल रहें। सुख शांति बनी रहे, खुशी का यह दिन यूं ही आपके जीवन में खुशियां लाता रहें। कुल मिलाकर कहने का अर्थ है कि इस दिन घर के बड़े बुजुर्गा द्वारा परिवार के सदस्यों के दुर्घायु के लिए मंगल कामना की जातीहै। इतना ही नहीं घर के सदस्यो के सिर पर च्यूड़ा चढ़ाने के बाद गाय व बैल के सिरों में भी च्यूड़े चढ़ाये जाने का रिवाज है। च्यूड़ा चड़ाने से पूर्व बैल के सींगों में सरसों का तेल लगाया जाता है गले में फूल माला पहनायी जाती है व गाय व बैल के माथे पर तिलक किया जाता हैए जो दर्शाता है कि हमारी लोक परम्पाओं में पालतू जानवरों को भी इंसान के समकक्ष सम्मान दिया जाता है। लेकिन समय में तेजी से आ रहे बदलाव व लगातार हो रहे सांस्कृतिक अतिक्रमण का असर हमारी लोक परम्पराओं पर भी दिखने लगा है। आधुनिकता की हवा ने हमारी परम्पराओं पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। उसी का नतीजा है कि जातर, ओखल की जगह बाजार में मौजूद उपकरणों ने ले ली है। आने वाले समय में न तो दादी, ईजा-कुमाउं में मां को ईजा कहा जाता है, चाची द्वारा ओखल में तैयार च्यूड़ों का स्वाद ही लोगों को चखने को मिलेगा और न ही अपनों का वह अपनापन। गनीमत है कि विकास की आंधी के बाद बावजूद हमारी दूतिया त्यार की परम्परा अभी बची हुई है।
उत्तराखंड 9 नवंबर को अपनी उत्तराखंड राज्य के 21वें वर्षगांठ स्थापना दिवस के मनाने है लेकिन राज्य आंदोलनकारियों का सपना आज भी अधूरा है। राज्य आंदोलनकारियों का मानना है कि जिस मकसद को लेकर उत्तराखंड का गठन किया गया था, वो आज भी पूरा नहीं हो पाया है। घर गाँव.गाँव में जब से मशीन से धान की कुटाई होने लगी है, तब से ओखल भी खत्म हो रहे हैं प्रगति और विकास ने हमसे हमारा लोक व संस्कृति ही नहीं, बल्कि अपनापन भी छीन लिया है। इस सब के बाद भी दूतिया त्यार की परम्परा अभी काफी हद तक बची हुई हैण्सरकार ने भी संरक्षण के लिए किसी ने ये नहीं सोचा था।

Share60SendTweet37
Previous Post

वनीकरण से लौट रही उर्गम क्षेत्र में हरियाली

Next Post

मुख्य न्यायाधीश ने सपरिवार किये भगवान बदरीविशाल के दर्शन

Related Posts

उत्तराखंड

चेपड़ो थराली के छात्र राहुल जोशी ने मेरिट सूची में प्राप्त किया 23 वां स्थान

April 25, 2026
15
उत्तराखंड

पूर्व मुख्यमंत्री ने थराली एवं चेपड़ो के आपदा प्रभावित गांवों का दौरा किया

April 25, 2026
15
उत्तराखंड

राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार में अंग्रेजी विभाग द्वारा ट्वेल्थ नाईट नाटक का आयोजन किया गया

April 25, 2026
9
उत्तराखंड

नियमित रूप से जनगणना कार्य की साप्ताहिक समीक्षा की जाए, जिससे प्रगति की सतत निगरानी हो सके : जिलाधिकारी

April 24, 2026
12
उत्तराखंड

मानव एकता दिवस पर रक्तदान शिविर में पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेन्द्र सिंह नेगी, दिया सेवा एवं एकजुटाता का संदेश

April 24, 2026
63
उत्तराखंड

विधायक भूपाल राम टम्टा ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आलम सिंह फर्स्वाण की आदमकद मूर्ति का अनावरण किया

April 24, 2026
10

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Popular Stories

  • चार जिलों के जिलाधिकारी बदले गए

    67675 shares
    Share 27070 Tweet 16919
  • डोईवाला : पुलिस,पीएसी व आईआरबी के जवानों का आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण सम्पन्न

    45776 shares
    Share 18310 Tweet 11444
  • ऑपरेशन कामधेनु को सफल बनाये हेतु जनपद के अन्य विभागों से मांगा गया सहयोग

    38051 shares
    Share 15220 Tweet 9513
  •  ढहते घर, गिरती दीवारें, दिलों में खौफ… जोशीमठ ही नहीं

    37438 shares
    Share 14975 Tweet 9360
  • विकासखंड देवाल क्षेत्र की होनहार छात्रा ज्योति बिष्ट ने किया उत्तराखंड का नाम रोशन

    37330 shares
    Share 14932 Tweet 9333

Stay Connected

संपादक- शंकर सिंह भाटिया

पता- ग्राम एवं पोस्ट आफिस- नागल ज्वालापुर, डोईवाला, जनपद-देहरादून, पिन-248140

फ़ोन- 9837887384

ईमेल- shankar.bhatia25@gmail.com

 

Uttarakhand Samachar

उत्तराखंड समाचार डाॅट काम वेबसाइड 2015 से खासकर हिमालय क्षेत्र के समाचारों, सरोकारों को समर्पित एक समाचार पोर्टल है। इस पोर्टल के माध्यम से हम मध्य हिमालय क्षेत्र के गांवों, गाड़, गधेरों, शहरों, कस्बों और पर्यावरण की खबरों पर फोकस करते हैं। हमारी कोशिश है कि आपको इस वंचित क्षेत्र की छिपी हुई सूचनाएं पहुंचा सकें।
संपादक

Browse by Category

  • Bitcoin News
  • Education
  • अल्मोड़ा
  • अवर्गीकृत
  • उत्तरकाशी
  • उत्तराखंड
  • उधमसिंह नगर
  • ऋषिकेश
  • कालसी
  • केदारनाथ
  • कोटद्वार
  • क्राइम
  • खेल
  • चकराता
  • चमोली
  • चम्पावत
  • जॉब
  • जोशीमठ
  • जौनसार
  • टिहरी
  • डोईवाला
  • दुनिया
  • देहरादून
  • नैनीताल
  • पर्यटन
  • पिथौरागढ़
  • पौड़ी गढ़वाल
  • बद्रीनाथ
  • बागेश्वर
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • रुद्रप्रयाग
  • रुद्रप्रयाग
  • विकासनगर
  • वीडियो
  • संपादकीय
  • संस्कृति
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • साहिया
  • हरिद्वार
  • हेल्थ

Recent News

चेपड़ो थराली के छात्र राहुल जोशी ने मेरिट सूची में प्राप्त किया 23 वां स्थान

April 25, 2026

पूर्व मुख्यमंत्री ने थराली एवं चेपड़ो के आपदा प्रभावित गांवों का दौरा किया

April 25, 2026
  • About Us
  • Privacy Policy
  • Cookie Policy
  • Terms & Conditions
  • Refund Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Contact

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • Home
  • संपादकीय
  • उत्तराखंड
    • अल्मोड़ा
    • उत्तरकाशी
    • उधमसिंह नगर
    • देहरादून
    • चमोली
    • चम्पावत
    • टिहरी
    • नैनीताल
    • पिथौरागढ़
    • पौड़ी गढ़वाल
    • बागेश्वर
    • रुद्रप्रयाग
    • हरिद्वार
  • संस्कृति
  • पर्यटन
    • यात्रा
  • दुनिया
  • वीडियो
    • मनोरंजन
  • साक्षात्कार
  • साहित्य
  • हेल्थ
  • क्राइम
  • जॉब
  • खेल

© 2015-21 Uttarakhand Samachar - All Rights Reserved.